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दुनिया में अमन-चैन के लिए खड़े रहकर तपस्या
Allahabad
Updated Wed, 16 Jan 2013 05:30 AM IST
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महाकुंभ नगर। विश्व में सुख-शांति की कामना करते हजारों साधु-संत महाकुंभ मेले में आए हैं। उनमें तमाम ऐसे हैं जो बरसों से किसी न किसी साधना में लीन हैं। काली मार्ग पर दशनाम आवाहन अखाड़ा में आए उर्ध्व बाहु तपस्वी हठयोगी महंत भोला गिरि और उनके शिष्य महंत कालगिरि खड़ेश्वरी भी ऐसे साधक हैं। वे दुनिया से बेटियों पर अत्याचार और गौ हत्या खत्म होने की कामना से तपस्या कर रहे हैं।
गुजरात में वडोडरा स्थित शिवबाड़ी आश्रम के महंत भोलागिरी बापू हठयोगी नागा हैं। पिछले 37 बरसों से वह लगातार अपने बाएं हाथ को ऊपर उठाकर रखते हैं। इस वजह से उन्हें उर्ध्व बाहु तपस्वी कहा जाता है। भोलागिरी कहते हैं कि वह दुनिया में चौतरफा गायों के वध से बेहद दुखी हैं। इसी तरह बहू-बेटियों पर हो रहे जुल्म ने भी उनके मन को भारी ठेस पहुंची है। ऐसी घटनाओं से विचलित होकर उन्होंने तय कर लिया कि वह कन्याओं और गायों की हत्या पर अंकुश की कामना करते हुए तपस्या करेंगे। तब से वह अपने बाएं हाथ को अनवरत उठाए रहते हैं। 35 साल तक उन्होंने अन्न नहीं लिया। सेहत बिगड़ने पर डॉक्टर के दबाव पर दो साल पहले उन्होंने एक वक्त फलाहार शुरू कर दिया। मगर वह अपने संकल्प पर अडिग हैं। हिमाचल प्रदेश से आए श्री महंत गंगा गिरि माताजी कहते हैं कि लोगों में जोर-जुल्म के खिलाफ चेतना और समाज कल्याण की भावना आनी चाहिए। महंत भोलागिरि के शिष्य राजस्थान के अलवर जनपद से आए महंत कालगिरि खड़ेश्वरी ने भी पांच साल पहले विश्व में अमन-चैन की कामना के साथ खड़े रहकर जीवन गुजारने का प्रण लिया। वह हरदम खड़े रहते हैं। खड़े-खड़े ही फलाहार और झपकी भी ले लेते हैं।
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गुजरात में वडोडरा स्थित शिवबाड़ी आश्रम के महंत भोलागिरी बापू हठयोगी नागा हैं। पिछले 37 बरसों से वह लगातार अपने बाएं हाथ को ऊपर उठाकर रखते हैं। इस वजह से उन्हें उर्ध्व बाहु तपस्वी कहा जाता है। भोलागिरी कहते हैं कि वह दुनिया में चौतरफा गायों के वध से बेहद दुखी हैं। इसी तरह बहू-बेटियों पर हो रहे जुल्म ने भी उनके मन को भारी ठेस पहुंची है। ऐसी घटनाओं से विचलित होकर उन्होंने तय कर लिया कि वह कन्याओं और गायों की हत्या पर अंकुश की कामना करते हुए तपस्या करेंगे। तब से वह अपने बाएं हाथ को अनवरत उठाए रहते हैं। 35 साल तक उन्होंने अन्न नहीं लिया। सेहत बिगड़ने पर डॉक्टर के दबाव पर दो साल पहले उन्होंने एक वक्त फलाहार शुरू कर दिया। मगर वह अपने संकल्प पर अडिग हैं। हिमाचल प्रदेश से आए श्री महंत गंगा गिरि माताजी कहते हैं कि लोगों में जोर-जुल्म के खिलाफ चेतना और समाज कल्याण की भावना आनी चाहिए। महंत भोलागिरि के शिष्य राजस्थान के अलवर जनपद से आए महंत कालगिरि खड़ेश्वरी ने भी पांच साल पहले विश्व में अमन-चैन की कामना के साथ खड़े रहकर जीवन गुजारने का प्रण लिया। वह हरदम खड़े रहते हैं। खड़े-खड़े ही फलाहार और झपकी भी ले लेते हैं।
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