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उल्टा पड़ रहा मेला प्रशासन का हर कदम
Allahabad
Updated Sun, 02 Dec 2012 05:30 AM IST
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इलाहाबाद। मेला प्रशासन का हर कदम उल्टा पड़ रहा है। उल्टे-सीधे फैसले लेने के कारण मेला से जुड़े हर काम पर विपरीत असर पड़ रहा है। कहीं पुलिया बनने के बाद तोड़ी जा रहा है तो कहीं पहले से लगे टेंट उखाड़े जा रहे हैं। वजह सीधी सी है कि मेला प्रशासन से जुड़े अफसर फील्ड पर निकलने के बजाय बैठकों में ही काम निपटा रहे हैं। कार्यदायी संस्थाओं से उनका कोई तालमेल नहीं। हर विभाग अपने हिसाब से काम कर रहा है और इनमें से तमाम काम चौपट होते जा रहे हैं।
मेला प्रशासन ने अब तक कुंभ मेले से जुड़ा नक्शा भी तैयार नहीं किया है। अफसरों को यह भी नहीं मालूम कि सड़क कहां और किस दिशा में बनेगी। संस्थाओं को भी जमीन आवंटन में देरी हो रही है। ऐसे में पीडब्ल्यूडी तय नहीं कर रहा पा रहा कि चकर्ड प्लेट कहां बिछानी है। जल निगम के लिए पानी की पाइप लाइन बिछाने का काम बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। बिजली विभाग ने खंभे तो लगा दिए हैं लेकिन जमीन आवंटन के देरी के कारण आशंका बनी हुई है कि खंभे गलत जगह तो नहीं लगा दिए। कुछ दिनों पहले की बात है, जब पीडब्ल्यूडी को एक पुलिया बनाने के बाद उखाड़नी पड़ी। दअरसल, पीडब्ल्यूडी जहां पुलिया बना रहा था, वह जगह अखाड़ों की है। मेला प्रशासन के अफसरों को इतना भी मालूम नहीं था कि पुलिया गलत जगह बनाई जा रही है जबकि पीडब्ल्यूडी तो सिर्फ दिशा-निर्देशों का अनुपालन कर रहा था। बाद में अखाड़ों की आपत्ति पर मेला प्रशासन को होश आया तो पुलिया तोड़ दी गई। इसी तरह दो दिन पहले पराग डेयरी के लिए टेंट लगाया जा रहा था, इसी बीच एक अखाड़े के कुछ लोग पहुंचे और वहां टेंट लगाने पर आपत्ति जताई। बाद में मालूम हुआ कि वह जमीन भी अखाड़े की है लेकिन मेला प्रशासन को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मेला प्रशासन के अफसरों की इस लापरवाही के कारण मेला से जुड़े सभी काम पिछड़ गए हैं। अगर हालात नहीं सुधरे तो मेला शुरू होने तक चकर्ड प्लेट बिछाने, पांटून पुल बनाने का काम अधूरा ही रह जाएगा।
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मेला प्रशासन ने अब तक कुंभ मेले से जुड़ा नक्शा भी तैयार नहीं किया है। अफसरों को यह भी नहीं मालूम कि सड़क कहां और किस दिशा में बनेगी। संस्थाओं को भी जमीन आवंटन में देरी हो रही है। ऐसे में पीडब्ल्यूडी तय नहीं कर रहा पा रहा कि चकर्ड प्लेट कहां बिछानी है। जल निगम के लिए पानी की पाइप लाइन बिछाने का काम बड़ी चुनौती साबित हो रहा है। बिजली विभाग ने खंभे तो लगा दिए हैं लेकिन जमीन आवंटन के देरी के कारण आशंका बनी हुई है कि खंभे गलत जगह तो नहीं लगा दिए। कुछ दिनों पहले की बात है, जब पीडब्ल्यूडी को एक पुलिया बनाने के बाद उखाड़नी पड़ी। दअरसल, पीडब्ल्यूडी जहां पुलिया बना रहा था, वह जगह अखाड़ों की है। मेला प्रशासन के अफसरों को इतना भी मालूम नहीं था कि पुलिया गलत जगह बनाई जा रही है जबकि पीडब्ल्यूडी तो सिर्फ दिशा-निर्देशों का अनुपालन कर रहा था। बाद में अखाड़ों की आपत्ति पर मेला प्रशासन को होश आया तो पुलिया तोड़ दी गई। इसी तरह दो दिन पहले पराग डेयरी के लिए टेंट लगाया जा रहा था, इसी बीच एक अखाड़े के कुछ लोग पहुंचे और वहां टेंट लगाने पर आपत्ति जताई। बाद में मालूम हुआ कि वह जमीन भी अखाड़े की है लेकिन मेला प्रशासन को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। मेला प्रशासन के अफसरों की इस लापरवाही के कारण मेला से जुड़े सभी काम पिछड़ गए हैं। अगर हालात नहीं सुधरे तो मेला शुरू होने तक चकर्ड प्लेट बिछाने, पांटून पुल बनाने का काम अधूरा ही रह जाएगा।
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