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गंगा को बचाने के लिए संवारे जाएंगे गांव
Allahabad
Updated Fri, 16 Nov 2012 12:00 PM IST
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इलाहाबाद। राष्ट्रीय नदी गंगा को बचाने और प्रदूषणरहित बनाने के लिए नया अभियान शुरू हो गया है। गंगा एक्शन परिवार ने नदी के किनारे बसे सभी गांवों को प्रदूषणमुक्त करने का अभियान शुरू किया है। संगठन की योजना है कि जब गंगा के किनारे बसे गांव प्रदूषणमुक्त होंगे तो नदी भी साफ हो जाएगी। तय किया है कि इसके लिए गंगा बेसिन पर स्थित हर गांव और स्कूल में अत्याधुनिक टायलेट्स बनाए जाएंगे। योजना को मूर्तरूप देने के लिए गंगा एक्शन परिवार परमार्थ निकेतन ऋषिकेश ने ‘टायलेट्स, ट्रीज एंड ट्रैश’ यानी ट्रिपल टी नाम से महत्वाकांक्षी योजना बनायी है। योजना को मूर्तरूप देने में डीआरडीओ व एनबीआरआई जैसे वैज्ञानिक संस्थानाें के अलावा केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय की भी मदद ली जा रही है।
देश के बड़े हिस्से में लोगों की जीवनचर्या का हिस्सा बन चुकी गंगा में तेजी से प्रदूषण बढ़ने के कारण इसके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। गंगा को बचाने के लिए केंद्र सरकार की ओर ‘गंगा एक्शन प्लान’ की शुरूआत की गई लेकिन इसके सकारात्मक नतीजे नहीं मिले। अब गंगा को बचाने का बीड़ा ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के गंगा एक्शन परिवार ने उठाया है।
योजना के तहत गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक गंगा बेसिन पर स्थित सभी गांवों और स्कूलों में अत्याधुनिक टायलेट़्स स्थापित करने के साथ ही सघन वृक्षारोपण और सफाई जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। योजना का उद्देश्य गांवों और स्कूलों का मलमूत्र नदी में प्रवाहित करने से रोकना है। साथ ही गंगा से सटे गांवों में जमा कूड़ा करकट भी नदी में न प्रवाहित हो। योजना को चरणबद्घ तरीके से लागू किया जा रहा है। पहले चरण में गंगोत्री से हरिद्वार तक और दूसरे चरण में हरिद्वार से लेकर इलाहाबाद तक योजना को लागू कराया जाएगा।
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योजना को मूर्तरूप देने में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) जैसे अनुसंधान संस्थानोेें के अलावा केंद्रीय वन एवं पर्यावरण, ग्रामीण विकास मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय की भी मदद ली जा रही है। योजना से जुड़े गंगा एक्शन परिवार के शोध विज्ञानियों और पदाधिकारियों की इस संबंध में कई दौर की वार्ताएं भी हो चुकी है।
‘गंगा को बचाने के लिए सरकारी मशीनरी के अलावा हरेक देशवासी को आगे आना होगा। गंगा को प्रदूषणरहित करने और विलुप्त होने से बचाने के लिए ‘टायलेट्स, ट्रैश व ट्रीज’ योजना शुरू की गई है। जिसमें आमजन के अलावा सरकारी तंत्र की भी मदद ली जा रही है।’
स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनिजी, परमार्थ निकेतन
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देश के बड़े हिस्से में लोगों की जीवनचर्या का हिस्सा बन चुकी गंगा में तेजी से प्रदूषण बढ़ने के कारण इसके अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है। गंगा को बचाने के लिए केंद्र सरकार की ओर ‘गंगा एक्शन प्लान’ की शुरूआत की गई लेकिन इसके सकारात्मक नतीजे नहीं मिले। अब गंगा को बचाने का बीड़ा ऋषिकेश स्थित परमार्थ निकेतन के गंगा एक्शन परिवार ने उठाया है।
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योजना के तहत गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक गंगा बेसिन पर स्थित सभी गांवों और स्कूलों में अत्याधुनिक टायलेट़्स स्थापित करने के साथ ही सघन वृक्षारोपण और सफाई जागरूकता अभियान चलाया जाएगा। योजना का उद्देश्य गांवों और स्कूलों का मलमूत्र नदी में प्रवाहित करने से रोकना है। साथ ही गंगा से सटे गांवों में जमा कूड़ा करकट भी नदी में न प्रवाहित हो। योजना को चरणबद्घ तरीके से लागू किया जा रहा है। पहले चरण में गंगोत्री से हरिद्वार तक और दूसरे चरण में हरिद्वार से लेकर इलाहाबाद तक योजना को लागू कराया जाएगा।
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योजना को मूर्तरूप देने में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), राष्ट्रीय बागवानी अनुसंधान संस्थान (एनबीआरआई) जैसे अनुसंधान संस्थानोेें के अलावा केंद्रीय वन एवं पर्यावरण, ग्रामीण विकास मंत्रालय और पर्यटन मंत्रालय की भी मदद ली जा रही है। योजना से जुड़े गंगा एक्शन परिवार के शोध विज्ञानियों और पदाधिकारियों की इस संबंध में कई दौर की वार्ताएं भी हो चुकी है।
‘गंगा को बचाने के लिए सरकारी मशीनरी के अलावा हरेक देशवासी को आगे आना होगा। गंगा को प्रदूषणरहित करने और विलुप्त होने से बचाने के लिए ‘टायलेट्स, ट्रैश व ट्रीज’ योजना शुरू की गई है। जिसमें आमजन के अलावा सरकारी तंत्र की भी मदद ली जा रही है।’
स्वामी चिदानंद सरस्वती मुनिजी, परमार्थ निकेतन