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लोअर-2013 में भी मिले धांधली के सुराग
Updated Mon, 19 Nov 2018 02:03 AM IST
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लोअर-2013 में भी सीबीआई को मिले धांधली के सुराग
0 मुख्य परीक्षा में जीएस की ओएमआर शीट बदले जाने की आशंका
0 पीसीएस मेंस में एक पूर्व सदस्य के पुत्र के चयन पर भी उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई को लोअर सबऑर्डिनेट-2013 परीक्षा में धांधली के अहम सुराग मिले हैं। मेंस में हिंदी की परीक्षा के दौरान मॉडरेशन की आड़ में नंबर घटाए-बढ़ाए जाने और सामान्य अध्ययन की परीक्षा में ओएमआर शीट बदले जाने के कुछ मामले सामने आए हैं। मामले में सीबीआई ने शिकायत करने वाले कुछ प्रतियोगियों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है। इसके साथ ही पीसीएस-2016 के मेंस में एक पूर्व सदस्य के पुत्र के चयन पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि पूर्व सदस्य पहले से ही सीबीआई के निशाने पर हैं।
प्रतियोगियों ने लोअर सबऑर्डिनेट-2013 और आरओ/एआरओ-2014 को लेकर सीबीआई में धांधली की शिकायत दर्ज कराई थी। सीबीआई ने जांच की तो दोनों ही परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतें सही पाई गईं लेकिन, लोअर-2013 में हुई गड़बड़ी ज्यादातर गंभीर निकली। मुख्य परीक्षा में दो पेपर होते हैं। हिंदी का पेपर विस्तृत उत्तरीय और सामान्य अध्ययन का पेपर बहुविकल्पीय होता है। अभ्यर्थियों ने शिकायत की थी कि मुख्य परीक्षा में हिंदी के पेपर में मॉडरेशन की आड़ में नंबर घटाए-बढ़ाए गए हैं और कुछ अभ्यर्थियों को विशेष तौर पर लाभ पहुंचा गया है। इसके अलावा सामान्य अध्ययन के पेपर में कुछ अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट भी बदली गई है।
सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने जांच शुरू की तो शिकायत सही पाई। सीबीआई को कुछ ओएमआर शीट बदले जाने के प्रमाण भी मिले हैं। सीबीआई ने मामले में बयान दर्ज करने के लिए प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय और कुछ प्रतियोगियों को दिल्ली स्थित मुख्यालय बुलाया लेकिन, इसी बीच सीबीआई में आंतरिक घमसान शुरू हो गया और प्रतियोगियों के बयान अब तक दर्ज नहीं किए जा सके। अब तक जांच का नेतृत्व कर रहे आईपीएस राजीव रंजन अब सीबीआई से हट गए हैं और उन्हें सिक्किम भेज दिया गया है। अब किसी अन्य अफसर को जांच का जिम्मा मिलने के बाद मामला आगे बढ़ सकेगा।
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सीबीआई के निशाने पर आयोग के पूर्व सदस्य भी थे, जिनके पुत्र का पीसीएस-2016 की मुख्य परीक्षा में चयन हुआ है। दो साल पहले जब पीसीएस-2016 की प्रारंभिक परीक्षा हुई थी, उस वक्त कुछ प्रतियोगियों ने जनसूचना अधिकार के तहत आयोग से पूछा था कि परीक्षा में किन अधिकारियों, कर्मचारियों और सदस्यों के नाते-रिश्तेदारों ने आवेदन किया है। आयोग ने अब तक इसका जवाब नहीं दिया है। उस वक्त संबंधित सदस्य आयोग में थे। प्रतियोगियों ने उस सदस्य की शिकायत भी सीबीआई में की है और सीबीआई यह खंगाल रही थी कि संबंधित सदस्य को पीसीएस-2016 में कोई अहम जिम्मेदारी दी गई थी या नहीं। अभ्यर्थियों को आशंका है कि राजीव रंजन के हटने के बाद इस मामले की जांच भी अब धीमी पड़ सकती है।
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लोअर-2013 में भी सीबीआई को मिले धांधली के सुराग
0 मुख्य परीक्षा में जीएस की ओएमआर शीट बदले जाने की आशंका
0 पीसीएस मेंस में एक पूर्व सदस्य के पुत्र के चयन पर भी उठे सवाल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच कर रही सीबीआई को लोअर सबऑर्डिनेट-2013 परीक्षा में धांधली के अहम सुराग मिले हैं। मेंस में हिंदी की परीक्षा के दौरान मॉडरेशन की आड़ में नंबर घटाए-बढ़ाए जाने और सामान्य अध्ययन की परीक्षा में ओएमआर शीट बदले जाने के कुछ मामले सामने आए हैं। मामले में सीबीआई ने शिकायत करने वाले कुछ प्रतियोगियों को बयान दर्ज कराने के लिए बुलाया है। इसके साथ ही पीसीएस-2016 के मेंस में एक पूर्व सदस्य के पुत्र के चयन पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि पूर्व सदस्य पहले से ही सीबीआई के निशाने पर हैं।
प्रतियोगियों ने लोअर सबऑर्डिनेट-2013 और आरओ/एआरओ-2014 को लेकर सीबीआई में धांधली की शिकायत दर्ज कराई थी। सीबीआई ने जांच की तो दोनों ही परीक्षाओं में गड़बड़ी की शिकायतें सही पाई गईं लेकिन, लोअर-2013 में हुई गड़बड़ी ज्यादातर गंभीर निकली। मुख्य परीक्षा में दो पेपर होते हैं। हिंदी का पेपर विस्तृत उत्तरीय और सामान्य अध्ययन का पेपर बहुविकल्पीय होता है। अभ्यर्थियों ने शिकायत की थी कि मुख्य परीक्षा में हिंदी के पेपर में मॉडरेशन की आड़ में नंबर घटाए-बढ़ाए गए हैं और कुछ अभ्यर्थियों को विशेष तौर पर लाभ पहुंचा गया है। इसके अलावा सामान्य अध्ययन के पेपर में कुछ अभ्यर्थियों की ओएमआर शीट भी बदली गई है।
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सूत्रों के मुताबिक सीबीआई ने जांच शुरू की तो शिकायत सही पाई। सीबीआई को कुछ ओएमआर शीट बदले जाने के प्रमाण भी मिले हैं। सीबीआई ने मामले में बयान दर्ज करने के लिए प्रतियोगी छात्र संघर्ष समिति के मीडिया प्रभारी अवनीश पांडेय और कुछ प्रतियोगियों को दिल्ली स्थित मुख्यालय बुलाया लेकिन, इसी बीच सीबीआई में आंतरिक घमसान शुरू हो गया और प्रतियोगियों के बयान अब तक दर्ज नहीं किए जा सके। अब तक जांच का नेतृत्व कर रहे आईपीएस राजीव रंजन अब सीबीआई से हट गए हैं और उन्हें सिक्किम भेज दिया गया है। अब किसी अन्य अफसर को जांच का जिम्मा मिलने के बाद मामला आगे बढ़ सकेगा।
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सीबीआई के निशाने पर आयोग के पूर्व सदस्य भी थे, जिनके पुत्र का पीसीएस-2016 की मुख्य परीक्षा में चयन हुआ है। दो साल पहले जब पीसीएस-2016 की प्रारंभिक परीक्षा हुई थी, उस वक्त कुछ प्रतियोगियों ने जनसूचना अधिकार के तहत आयोग से पूछा था कि परीक्षा में किन अधिकारियों, कर्मचारियों और सदस्यों के नाते-रिश्तेदारों ने आवेदन किया है। आयोग ने अब तक इसका जवाब नहीं दिया है। उस वक्त संबंधित सदस्य आयोग में थे। प्रतियोगियों ने उस सदस्य की शिकायत भी सीबीआई में की है और सीबीआई यह खंगाल रही थी कि संबंधित सदस्य को पीसीएस-2016 में कोई अहम जिम्मेदारी दी गई थी या नहीं। अभ्यर्थियों को आशंका है कि राजीव रंजन के हटने के बाद इस मामले की जांच भी अब धीमी पड़ सकती है।