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संग्रहालय में व्याख्यान
Updated Sat, 25 Nov 2017 09:10 PM IST
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दूसरों को नुकसान पहुंचाए बगैर अपने धर्म पर अमल
0 संग्रहालय में ‘अनेकता में एकता, हिंद की विशेषता’ पर व्याख्यान
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
संग्रहालय में आयोजित कौमी एकता सप्ताह के समापन पर शनिवार को विविध संप्रदाय के प्रतिनिधियों ने धर्म और राष्ट्रीयता की चर्चा की। प्रथम वक्ता आशु मसीह ने ‘अनेकता में एकता, हिंद की विशेषता’ को रेखांकित करते हुए सभी धर्मों एवं संप्रदायों के आपसी सहचर्य की अपील की। बुद्ध की अवधारणा का उल्लेख करते हुए जीएस शाक्य ने कहा, हमें दूसरे के धर्म एवं विचारों को नुकसान पहुंचाए बिना अपने धर्म का पालन करना चाहिए।
हसन नकवी ने कहा, हमें आपसी सद्भाव से रहते हुए प्रेम के साथ देश की एकता को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। सरदार अजीत सिंह ने ‘नदिया एक घाट बहुतेरे, कहय कबीर वचन के फेरे।’ से अपनी बात की शुरुआत करते हुए गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखने की अपील की। साथ ही कहा, गोष्ठी में कही बातें व्यवहार में भी लाई जानी चाहिए, तभी कौमी एकता की सार्थकता होगी। आरंभ में संग्रहालय के उप-संग्रहाध्यक्ष डॉ.ओए वानखेड़े ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा, विविधता से भरा भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जो स्वयं में हमारी एकता एवं अखण्डता का प्रमाण है। निदेशक डॉ. सुनील गुप्ता ने कहा, कोई भी धर्म आचरण सम्मत होता है और आचरण की शुद्धता ही सभी धर्मों का मूल है। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: एवं वसुधैव कुटुम्बकम के सूत्रवाक्य के साथ हमें मानवमात्र की एकता के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। संचालन डॉ आरके मिश्र ने किया। कार्यक्र म में डॉ.आरसी मिश्र, डॉ अजय मिश्र, एमसीपी गुप्त, श्वेता सिंह सहित संग्रहालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे।
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0 संग्रहालय में ‘अनेकता में एकता, हिंद की विशेषता’ पर व्याख्यान
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
संग्रहालय में आयोजित कौमी एकता सप्ताह के समापन पर शनिवार को विविध संप्रदाय के प्रतिनिधियों ने धर्म और राष्ट्रीयता की चर्चा की। प्रथम वक्ता आशु मसीह ने ‘अनेकता में एकता, हिंद की विशेषता’ को रेखांकित करते हुए सभी धर्मों एवं संप्रदायों के आपसी सहचर्य की अपील की। बुद्ध की अवधारणा का उल्लेख करते हुए जीएस शाक्य ने कहा, हमें दूसरे के धर्म एवं विचारों को नुकसान पहुंचाए बिना अपने धर्म का पालन करना चाहिए।
हसन नकवी ने कहा, हमें आपसी सद्भाव से रहते हुए प्रेम के साथ देश की एकता को मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। सरदार अजीत सिंह ने ‘नदिया एक घाट बहुतेरे, कहय कबीर वचन के फेरे।’ से अपनी बात की शुरुआत करते हुए गंगा-जमुनी तहजीब को बनाए रखने की अपील की। साथ ही कहा, गोष्ठी में कही बातें व्यवहार में भी लाई जानी चाहिए, तभी कौमी एकता की सार्थकता होगी। आरंभ में संग्रहालय के उप-संग्रहाध्यक्ष डॉ.ओए वानखेड़े ने विषय प्रवर्तन करते हुए कहा, विविधता से भरा भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है, जो स्वयं में हमारी एकता एवं अखण्डता का प्रमाण है। निदेशक डॉ. सुनील गुप्ता ने कहा, कोई भी धर्म आचरण सम्मत होता है और आचरण की शुद्धता ही सभी धर्मों का मूल है। ‘सर्वे भवन्तु सुखिन: एवं वसुधैव कुटुम्बकम के सूत्रवाक्य के साथ हमें मानवमात्र की एकता के लिए प्रयासरत रहना चाहिए। संचालन डॉ आरके मिश्र ने किया। कार्यक्र म में डॉ.आरसी मिश्र, डॉ अजय मिश्र, एमसीपी गुप्त, श्वेता सिंह सहित संग्रहालय के सभी अधिकारी एवं कर्मचारी मौजूद थे।
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