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विवि में 900 नकलचियों के खिलाफ कार्रवाई
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
Updated Sun, 11 Oct 2015 01:44 AM IST
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। इलाहाबाद विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों में इस बार रिकार्ड नकलची पकड़े गए। यह संख्या 900 से अधिक है। पूर्व के वर्षों की तुलना में यह संख्या तकरीबन तीन गुना है। खास यह कि इनमें से ज्यादातर नकलचियों को संबंधित वर्ष में तो फेल कर ही दिया गया है, उन्हें एक और साल के लिए परीक्षा से डिबार कर दिया गया है।
केंद्रीय दर्जा मिलने से पहले विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों में नकलचियों की संख्या एक हजार के करीब हुआ करती थी, लेकिन पिछले वर्षों में यह संख्या 300 से 400 के बीच रही। अब इस बार फिर यह आंकड़ा 900 को पार कर गया है। इतने व्यापक स्तर पर नकल की शिकायत की बाबत परीक्षा समिति ने सख्त कदम उठाया है। तकरीबन सभी नकलचियों को संबंधित सत्र में फेल कर दिया गया है। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे विद्यार्थियों की भी है जिन्हें 2015-16 की परीक्षा से डिबार कर दिया गया है। यानी, उनके दो साल खराब हो गए हैं।
इस तरह से अब वे सत्र 2016-17 की परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। संबंधित छात्र-छात्राओं को पत्र भेजकर कार्रवाई से अवगत कराया जा रहा है। दो साल बर्बाद न हो इसके लिए कई छात्र-छात्रा दूसरे संस्थानों में दाखिले की कोशिश में भी जुट गए हैं। विश्वविद्यालय और कालेजों में इस स्थिति के पीछे सख्ती के साथ बोर्ड परीक्षा में व्यापक नकल को बड़ा कारण माना जा रहा है। परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर एचएस उपाध्याय का कहना है कि इस बार नकल में पकड़ गए विद्यार्थियों की संख्या अधिक रही। परीक्षा समिति के फैसले से विद्यार्थियों को अवगत कराया जा रहा है।
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केंद्रीय दर्जा मिलने से पहले विश्वविद्यालय और संघटक कालेजों में नकलचियों की संख्या एक हजार के करीब हुआ करती थी, लेकिन पिछले वर्षों में यह संख्या 300 से 400 के बीच रही। अब इस बार फिर यह आंकड़ा 900 को पार कर गया है। इतने व्यापक स्तर पर नकल की शिकायत की बाबत परीक्षा समिति ने सख्त कदम उठाया है। तकरीबन सभी नकलचियों को संबंधित सत्र में फेल कर दिया गया है। इनमें से बड़ी संख्या ऐसे विद्यार्थियों की भी है जिन्हें 2015-16 की परीक्षा से डिबार कर दिया गया है। यानी, उनके दो साल खराब हो गए हैं।
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इस तरह से अब वे सत्र 2016-17 की परीक्षा में शामिल नहीं हो सकेंगे। संबंधित छात्र-छात्राओं को पत्र भेजकर कार्रवाई से अवगत कराया जा रहा है। दो साल बर्बाद न हो इसके लिए कई छात्र-छात्रा दूसरे संस्थानों में दाखिले की कोशिश में भी जुट गए हैं। विश्वविद्यालय और कालेजों में इस स्थिति के पीछे सख्ती के साथ बोर्ड परीक्षा में व्यापक नकल को बड़ा कारण माना जा रहा है। परीक्षा नियंत्रक प्रोफेसर एचएस उपाध्याय का कहना है कि इस बार नकल में पकड़ गए विद्यार्थियों की संख्या अधिक रही। परीक्षा समिति के फैसले से विद्यार्थियों को अवगत कराया जा रहा है।
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