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गायों के चारे पर हर महीने 90 लाख खर्च

Fri, 13 Sep 2019 02:06 AM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 13 Sep 2019 02:06 AM IST
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90 lakh spent every month on fodder for cows
90 lakh spent every month on fodder for cows - फोटो : CITY DESK
प्रयागराज। जिले में सरकारी गोशालाओं में रखी गईं गायों पर हर महीने 90 रुपये खर्च हो रहे हैं। यह राशि सिर्फ पशुओं के चारा पर खर्च होती है। कई अन्य मद में होने वाला खर्च इससे अलग है। जिले में 100 गोशालाएं सक्रिय हैं। इनमें करीब 10 हजार गोवंश रखे गए हैं। हालांकि, यह संख्या घटती-बढ़ती रहती है।
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गोशालाओं के संचालन के लिए अलग-अलग मद से बजट का इंतजाम किया जाता है लेकिन, चारे के लिए शासन से प्रति पशु रोजाना 30 रुपये दिए जाते हैं। इस लिहाज से हर महीने करीब नौ लाख रुपये चारे पर खर्च होते हैं। इसके अलावा इच्छुक ग्रामीण भी गोवंश को पाल रहे हैं। उन्हें भी प्रति गोवंश 30 रुपये दिए जाते हैं। गोशाला को चलाने के लिए तमाम दूसरे खर्च भी हैं, जिसे सरकार देती है।
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इस सारे इंतजाम के बाद भी गोशालाओं में बदइंतजामी सामने आती रही है। गोशाला संचालन के लिए दी जा रही राशि भी बढ़ाने की मांग की जाती रही है। प्रधान तथा गोवंश संचालकों का कहना है कि चारे के लिए प्रति गोवंश दिए जा रहे 30 रुपये कम हैं। इसमें चारे का इंतजाम मुश्किल है। इसीलिए उन्हें चारे के लिए अन्य जगहों से भी इंतजाम करना पड़ता है। एडीएम प्रशासन वीएस दुबे का कहना है कि गोशालाओं में किसी तरह की कमी न रहे इसके निर्देश दिए गए हैं। चारा के मद में आई राशि समय-समय पर संचालकों को उपलब्ध कराई जाती है।
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निर्माण, रखरखाव पर खर्च हो जाते हैं लाखों
एक गोशाला के निर्माण में एक से दो लाख खर्च हो जाते हैं। अब तक स्थायी गोशालाओं के निर्माण पर ही एक करोड़ से अधिक राशि खर्च हो चुकी है। पानी की आपूर्ति के लिए सबमर्सिबल लगाने पर 25 से 30 लाख रुपये खर्च हुए हैं। एक सबमर्सिबल पर 30 से 35 हजार रुपये खर्च होते हैं। इसके लिए अलग-अलग मद से बजट का इंतजाम किया गया। चारे के अलावा गोशालाओं के संचालन में भी हर महीने 20 से 25 लाख रुपये खर्च होते हैं। पशुओं की देखरेख तथा गोशाला की सफाई आदि काम के लिए दो से तीन कर्मचारी रखे जाते हैं। प्रत्येक कर्मचारी को हर महीने पांच हजार रुपये दिए जाते हैं। गांव में ही उनके खाने की व्यवस्था की जाती है। इस तरह से हर गोशाला पर महीने में 10 से 15 हजार रुपये कर्मचारी पर खर्च होते हैं। इस राशि की व्यवस्था पंचायत तथा मनरेगा के मद से की जाती है। इसके अलावा हर महीने 700 से 800 रुपये बिजली पर खर्च होते हैं। साफ-सफाई, संविदा कर्मचारी के वेतन आदि की व्यवस्था मनरेगा के बजट से की जाती है। इसी तरह से पशुओं के इलाज अन्य इंतजाम की व्यवस्था संबंधित विभाग करते हैं।
शराब पर विशेष शुल्क
गोवंश के सरंक्षण के लिए शराब पर काउ सेज की घोषणा की गई। अलग-अलग तरह की शराब पर टैक्स की राशि में भिन्नता है लेकिन आबकारी नीति में इस तरह का टैक्स लेने का कोई प्रावधान नहीं है। ऐसे में शराब पर विशेष कर की व्यवस्था लागू की गई है। इसके तहत टैक्स लिए भी जा रहे हैं।

करोड़ों खर्च के बाद भी बुरा हाल, मर रहीं गायें
करोड़ों रुपर्य खर्च करने के बावजूद गोशालाओं का बुरा हाल है तो अव्यवस्था की वजह से गायों के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा। आवारा गोवंश को गोशालाओं में रखने का प्रावधान है। इसके विपरीत मांडा के बराही क्षेत्र में एक दर्जन से अधिक गायें ट्रेन से कटकर मर गईं। इनके कान पर सरकारी टैग भी लगे थे। इनके अलावा कई गायें भटकती हुई मिली थीं। हालांकि, अफसरों का कहना था कि ये गायें गोशाला की नहीं हैं। इसके अलावा गोशालाओं में अव्यवस्था की शिकायत आम है। चारा न मिलने तथा सुविधाओं के अभाव की शिकायत ज्यादातार गोशालाओं में है। प्रधान तथा गोशाला संचालका का कहना है कि एक पशु पर सिर्फ चारा पर 55 से 60 रुपये खर्च आता है। इसके विपरीत सरकार मात्र 30 रुपये देती है। यह राशि भी समय से नहीं मिलती। एक प्रधान ने बताया कि बाजार में भूसा 800 से 850 रुपये प्रति क्ंिवटल मिल रहा है। जबकि, वे 600 रुपये से अधिक का बिल नहीं दे सकते। इसके अलावा भी कई तरह की समस्याएं हैं, जिसकी वजह से गायों का उचित ध्यान रख पाना मुश्किलों भरा है।
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