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पक्षी िविहार की जमीन बेचने वाले अफसरों पर कार्रवाई का आदेश
Updated Tue, 05 Sep 2017 08:19 PM IST
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पक्षी विहार बेचने वाले अफसरों पर कार्रवाई का आदेश
अर्थला पक्षी विहार के मामले में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से 10 दिन में मांगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
गाजियाबाद में हिंडन नदी के किनारे स्थित झील अर्थला पक्षी विहार की जमीन प्राइवेट बिल्डर को बेचने के मामले में कई जिम्मेदार अफसरों पर गाज गिरना तय है। मंगलवार को हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को ऐसे अधिकारियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव को कार्रवाई रिपोर्ट दस दिन के भीतर हलफनामे के मार्फत कोर्ट में दाखिल करनी है। कोर्ट ने नगर आयुक्त और आवास विकास परिषद के हाउसिंग कमिश्नर को रिपोर्ट के साथ तलब किया है।
सुलेमान डबास की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने इस मामले में पहले ही मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी। आवास विकास परिषद ने इस मामले में सफाई दी है कि गांव सभा की बंजर जमीन आवास विकास परिषद के लिए अधिगृहीत की गई थी। मगर राजस्व रिकार्ड में परिषद का नाम दर्ज नहीं हो सका था। परिषद ने बंजर भूमि शराब व्यवसायी मोहन मेकिन को आवंटित कर दी। झील एरिया को बाद में पक्षी विहार घोषित कर दिया गया। मोहन मेकिन यह भूमि जेपी गर्ग प्राइवेट बिल्डर को बेच दी। इसमें से 948 एकड़ क्षेत्र में झील है और शेष 1454 एकड़ जमीन बंजर है।
कोर्ट केआदेश पर मुख्य सचिव ने जो रिपोर्ट दी उसमें कहा गया है कि बिल्डर को आवासीय क्षेत्र बताकर जमीन दी गई है, पहले इस जमीन पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना थी। जबकि बिल्डर के वकील का कहना था कि उसे मिली जमीन पक्षी विहार नहीं है बल्कि दूसरी जगह है। कोर्ट इन दलीलों से सहमत नहीं थी। पीठ ने कहा कि इस मामले में सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह का अपराध किया गया है। मुख्य सचिव ने बताया कि दोषी अफसरों पर कार्रवाई केलिए एक कमेटी गठित की गई है। मगर कोर्ट ने इससे असहमत होते हुए 14 सितंबर को रिपोर्ट मांगी है। याची का कहना है कि 12.04 एकड़ में पक्षी विहार घोषित है जिसे प्राइवेट बिल्डर जेपी गर्ग को बेच दिया गया है।
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अर्थला पक्षी विहार के मामले में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव से 10 दिन में मांगी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
गाजियाबाद में हिंडन नदी के किनारे स्थित झील अर्थला पक्षी विहार की जमीन प्राइवेट बिल्डर को बेचने के मामले में कई जिम्मेदार अफसरों पर गाज गिरना तय है। मंगलवार को हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव को ऐसे अधिकारियों को चिह्नित कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। मुख्य सचिव को कार्रवाई रिपोर्ट दस दिन के भीतर हलफनामे के मार्फत कोर्ट में दाखिल करनी है। कोर्ट ने नगर आयुक्त और आवास विकास परिषद के हाउसिंग कमिश्नर को रिपोर्ट के साथ तलब किया है।
सुलेमान डबास की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने इस मामले में पहले ही मुख्य सचिव से रिपोर्ट मांगी थी। आवास विकास परिषद ने इस मामले में सफाई दी है कि गांव सभा की बंजर जमीन आवास विकास परिषद के लिए अधिगृहीत की गई थी। मगर राजस्व रिकार्ड में परिषद का नाम दर्ज नहीं हो सका था। परिषद ने बंजर भूमि शराब व्यवसायी मोहन मेकिन को आवंटित कर दी। झील एरिया को बाद में पक्षी विहार घोषित कर दिया गया। मोहन मेकिन यह भूमि जेपी गर्ग प्राइवेट बिल्डर को बेच दी। इसमें से 948 एकड़ क्षेत्र में झील है और शेष 1454 एकड़ जमीन बंजर है।
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कोर्ट केआदेश पर मुख्य सचिव ने जो रिपोर्ट दी उसमें कहा गया है कि बिल्डर को आवासीय क्षेत्र बताकर जमीन दी गई है, पहले इस जमीन पर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की योजना थी। जबकि बिल्डर के वकील का कहना था कि उसे मिली जमीन पक्षी विहार नहीं है बल्कि दूसरी जगह है। कोर्ट इन दलीलों से सहमत नहीं थी। पीठ ने कहा कि इस मामले में सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह का अपराध किया गया है। मुख्य सचिव ने बताया कि दोषी अफसरों पर कार्रवाई केलिए एक कमेटी गठित की गई है। मगर कोर्ट ने इससे असहमत होते हुए 14 सितंबर को रिपोर्ट मांगी है। याची का कहना है कि 12.04 एकड़ में पक्षी विहार घोषित है जिसे प्राइवेट बिल्डर जेपी गर्ग को बेच दिया गया है।
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