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प्रोफेशनल डिग्री धारक शिक्ष् ाकों की उड़ी नींद
Updated Sun, 20 May 2018 01:12 AM IST
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प्रोफेशनल डिग्री धारक शिक्षकों की उड़ी नींद
साइंस व गणित के 29334 सहायक अध्यापकों की भर्ती में अपात्रों की नियुक्ति का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद्र।
साइंस व गणित के 29334 सहायक अध्यापकों की भर्ती में अपात्रों की नियुक्ति की शिकायत पर हाईकोर्ट द्वारा जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए जाने से प्रोफेशनल डिग्री धारक शिक्षकों की नींद उड़ी हुई है। शिक्षकों का कहना है कि उक्त भर्ती का शासनादेश 11 जुलाई 2013 में आया था। इसके बाद शासनादेश में 23 अगस्त 2013 को संशोधन कर योग्यता स्नातक में विज्ञान/गणित निर्धारित की गई, न कि विज्ञान स्नातक (बीएससी की उपाधि)।
जिन शिक्षकों ने स्नातक उपाधि के तहत बीटेक/बीसीए/बीएससी (गृह विज्ञान)/बीएससी (कृषि) / बीएससी (फारेस्ट्री) की है, उनकी चिंता है कि कहीं जांच अधिकारी बीएसए द्वारा उन्हें भी परेशान न किया जाए। इसके लिए उन्होंने अभी से अपना पक्ष संबंधित फोरमों पर रखना तेज कर दिया है। इसके लिए 04 अगस्त 2014 को राज्य सरकार द्वारा गठित एक हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है। निदेशक, एससीईआरटी की अध्यक्षता में गठित कमेटी में दो सदस्यों के रूप में निदेशक, बेसिक शिक्षा व सचिव, बेसिक शिक्षा को शामिल किया गया था। इस कमेटी की रिपोर्ट में स्नातक उपाधि के लिए बीटेक/बीसीए/बीएससी (गृह विज्ञान)/बीएससी(कृषि)/बीएससी(फारेस्ट्री) को उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान/गणित विषय के सहायक अध्यापकों की नियुक्ति हेतु मान्य किए जाने पर मुहर लगाई गई थी। कमेटी के मुताबिक बीटीसी प्रशिक्षण स्तर पर ऐसे अभ्यर्थियों का चयन विज्ञान वर्ग के अंतर्गत किए जाने के उपरांत उन्हें विज्ञान शिक्षक के रूप में सीधी भर्ती से मान्यता न दिया जाना न्यायसंगत नहीं होगा। इसके बाद उक्त डिग्री धारकों को शिक्षक भर्ती में आवेदन के लिए अर्ह माना गया। हाईकोर्ट ने बिना साइंस या मैथ के स्नातक पास नियुक्त अध्यापकों को सुनकर चार माह में निर्णय लेने को कहा है। बता दें कि प्रोफेशनल डिग्री धारक करीब ढाई वर्षों से नौकरी कर रहे हैं।
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साइंस व गणित के 29334 सहायक अध्यापकों की भर्ती में अपात्रों की नियुक्ति का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद्र।
साइंस व गणित के 29334 सहायक अध्यापकों की भर्ती में अपात्रों की नियुक्ति की शिकायत पर हाईकोर्ट द्वारा जांच कर कार्रवाई के आदेश दिए जाने से प्रोफेशनल डिग्री धारक शिक्षकों की नींद उड़ी हुई है। शिक्षकों का कहना है कि उक्त भर्ती का शासनादेश 11 जुलाई 2013 में आया था। इसके बाद शासनादेश में 23 अगस्त 2013 को संशोधन कर योग्यता स्नातक में विज्ञान/गणित निर्धारित की गई, न कि विज्ञान स्नातक (बीएससी की उपाधि)।
जिन शिक्षकों ने स्नातक उपाधि के तहत बीटेक/बीसीए/बीएससी (गृह विज्ञान)/बीएससी (कृषि) / बीएससी (फारेस्ट्री) की है, उनकी चिंता है कि कहीं जांच अधिकारी बीएसए द्वारा उन्हें भी परेशान न किया जाए। इसके लिए उन्होंने अभी से अपना पक्ष संबंधित फोरमों पर रखना तेज कर दिया है। इसके लिए 04 अगस्त 2014 को राज्य सरकार द्वारा गठित एक हाई पावर कमेटी की रिपोर्ट का हवाला दिया जा रहा है। निदेशक, एससीईआरटी की अध्यक्षता में गठित कमेटी में दो सदस्यों के रूप में निदेशक, बेसिक शिक्षा व सचिव, बेसिक शिक्षा को शामिल किया गया था। इस कमेटी की रिपोर्ट में स्नातक उपाधि के लिए बीटेक/बीसीए/बीएससी (गृह विज्ञान)/बीएससी(कृषि)/बीएससी(फारेस्ट्री) को उच्च प्राथमिक विद्यालयों में विज्ञान/गणित विषय के सहायक अध्यापकों की नियुक्ति हेतु मान्य किए जाने पर मुहर लगाई गई थी। कमेटी के मुताबिक बीटीसी प्रशिक्षण स्तर पर ऐसे अभ्यर्थियों का चयन विज्ञान वर्ग के अंतर्गत किए जाने के उपरांत उन्हें विज्ञान शिक्षक के रूप में सीधी भर्ती से मान्यता न दिया जाना न्यायसंगत नहीं होगा। इसके बाद उक्त डिग्री धारकों को शिक्षक भर्ती में आवेदन के लिए अर्ह माना गया। हाईकोर्ट ने बिना साइंस या मैथ के स्नातक पास नियुक्त अध्यापकों को सुनकर चार माह में निर्णय लेने को कहा है। बता दें कि प्रोफेशनल डिग्री धारक करीब ढाई वर्षों से नौकरी कर रहे हैं।
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