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ट्रांसपोर्टर मांग रहे ई-वे बिल, त्योहारी सीजन में कैसे आए माल
Updated Sun, 01 Oct 2017 07:47 PM IST
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ट्रांसपोर्टर मांग रहे ई-वे बिल, त्योहारी सीजन में कैसे आए माल
0 ई-वे बिल की केंद्रीयकृत व्यवस्था न लागू होने से बढ़ी व्यापारियों की परेशान
0 केंद्रीय ई-वे बिल न होने से कई जिलों में ट्रांसपोर्टरों का माल भेजने से इंकार
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
त्योहारी सीजन में व्यापारियों के सामने माल मंगाना मुश्किल होने लगा है, क्योंकि कई जिलों में ट्रांसपोर्टर व्यापारियों से केंद्रीय ई-वे बिल मांग रहे हैं। समस्या यह है कि जीएसटी पोर्टल पर ई-वे बिल के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हुई है। जबकि, जीएसटी काउंसिल ने एक अक्तूबर से इसे लागू कर दिया है। आगे व्यापारियों को क्या करना है, जीएसटी काउंसिल ने इस संबंध में भी कोई फरमान नहीं जारी किया। अब व्यापारी परेशान हैं।
जीएसटी लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने ई-वे बिल के संबंध में प्रदेश सरकार को अपने स्तर से निर्णय लेने को कहा था। इसके साथ जीएसटी काउंसिल ने एक अक्तूबर से केंद्रीयकृत ई-वे बिल लागू करने का निर्णय लिया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने 50 हजार रुपये या उससे अधिक के माल पर परिवहन के लिए ई-वे बिल अनिवार्य कर दिया। उधर, काउंसिल ने एक अक्तूबर से इसे लागू करने का फैसला तो कर लिया लेकिन इसके लिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन नहीं शुरू हुआ, क्योंकि पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद ही ई-वे बिल डाउनलोड होगा, जिसके जरिए व्यापारी बाहर से माल मंगा सकेंगे।
अब व्यापारियों के सामने समस्या है कि वह बाहर से माल मंगाने के लिए प्रदेश सरकार वाला ई-वे बिल दे रहे हैं तो ट्रांसपोर्टर उसे लेने से इंकार कर दे रहे हैं।
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इलाहाबाद, मुरादाबाद, कानपुर समेत कई जिलों में ट्रांसपोर्टर बिना केंद्रीय ई-वे बिल के माल के परिवहन से इंकार कर रहे हैं। व्यापारी इसलिए भी परेशान हैं क्योंकि इसके लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया कब शुरू होगी, इस पर कोई दिशा-निर्देश नहीं आया है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि आधी-अधूरी तैयारी के बीच लागू जीएसटी का खामियाजा व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार टैक्स वसूलने में पीछे नहीं हैं लेकिन अन्य व्यवस्था शून्य है।
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पीएम ने सौ दिन तक जांच न होने का दिया था आश्वासन
इलाहाबाद। सचल दल द्वारा मार्गों में शुरू की गई जांच से भी व्यापारियों में नाराजगी है। उनका कहा है कि प्रधानमंत्री ने जीएसटी लागू होने के बाद सौ दिन तक माल की जांच न करने का आश्वासन दिया था। इस हिसाब से सौ दिन नौ अक्तूबर को पूरे हो रहे हैं लेकिन त्योहार के दौरान सचल दल ने जांच भी शुरू कर दी।
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0 ई-वे बिल की केंद्रीयकृत व्यवस्था न लागू होने से बढ़ी व्यापारियों की परेशान
0 केंद्रीय ई-वे बिल न होने से कई जिलों में ट्रांसपोर्टरों का माल भेजने से इंकार
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
त्योहारी सीजन में व्यापारियों के सामने माल मंगाना मुश्किल होने लगा है, क्योंकि कई जिलों में ट्रांसपोर्टर व्यापारियों से केंद्रीय ई-वे बिल मांग रहे हैं। समस्या यह है कि जीएसटी पोर्टल पर ई-वे बिल के लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अब तक शुरू नहीं हुई है। जबकि, जीएसटी काउंसिल ने एक अक्तूबर से इसे लागू कर दिया है। आगे व्यापारियों को क्या करना है, जीएसटी काउंसिल ने इस संबंध में भी कोई फरमान नहीं जारी किया। अब व्यापारी परेशान हैं।
जीएसटी लागू होने के बाद केंद्र सरकार ने ई-वे बिल के संबंध में प्रदेश सरकार को अपने स्तर से निर्णय लेने को कहा था। इसके साथ जीएसटी काउंसिल ने एक अक्तूबर से केंद्रीयकृत ई-वे बिल लागू करने का निर्णय लिया। इसके बाद प्रदेश सरकार ने 50 हजार रुपये या उससे अधिक के माल पर परिवहन के लिए ई-वे बिल अनिवार्य कर दिया। उधर, काउंसिल ने एक अक्तूबर से इसे लागू करने का फैसला तो कर लिया लेकिन इसके लिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन नहीं शुरू हुआ, क्योंकि पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन के बाद ही ई-वे बिल डाउनलोड होगा, जिसके जरिए व्यापारी बाहर से माल मंगा सकेंगे।
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अब व्यापारियों के सामने समस्या है कि वह बाहर से माल मंगाने के लिए प्रदेश सरकार वाला ई-वे बिल दे रहे हैं तो ट्रांसपोर्टर उसे लेने से इंकार कर दे रहे हैं।
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इलाहाबाद, मुरादाबाद, कानपुर समेत कई जिलों में ट्रांसपोर्टर बिना केंद्रीय ई-वे बिल के माल के परिवहन से इंकार कर रहे हैं। व्यापारी इसलिए भी परेशान हैं क्योंकि इसके लिए रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया कब शुरू होगी, इस पर कोई दिशा-निर्देश नहीं आया है। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोजक संतोष पनामा का कहना है कि आधी-अधूरी तैयारी के बीच लागू जीएसटी का खामियाजा व्यापारियों को भुगतना पड़ रहा है। सरकार टैक्स वसूलने में पीछे नहीं हैं लेकिन अन्य व्यवस्था शून्य है।
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पीएम ने सौ दिन तक जांच न होने का दिया था आश्वासन
इलाहाबाद। सचल दल द्वारा मार्गों में शुरू की गई जांच से भी व्यापारियों में नाराजगी है। उनका कहा है कि प्रधानमंत्री ने जीएसटी लागू होने के बाद सौ दिन तक माल की जांच न करने का आश्वासन दिया था। इस हिसाब से सौ दिन नौ अक्तूबर को पूरे हो रहे हैं लेकिन त्योहार के दौरान सचल दल ने जांच भी शुरू कर दी।