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लोककलाकार बनेंगे कुंभ के ब्रांड अंबेसडर
Updated Sun, 11 Feb 2018 01:32 AM IST
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लोक कलाकार बनेंगे कुंभ में ‘ब्रांड अंबेसडर’
भारतीय लोक कला महासंघ की पहल पर किए जा रहे प्रशिक्षित
लोकगाथाओं, परंपराओं से देंगे निर्मल रेती-निर्मल गंगा का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
संगम की रेती पर लगने वाले कुंभ पर्व के दौरान लोक कलाकार कुंभ और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के संवाहक और ‘ब्रांड अंबेसडर’ की भूमिका में दिखेंगे। ये कलाकार लोक परंपराओं के माध्यम से निर्मल रेती और निर्मल गंगा की अलख जगाएंगे, वहीं कल्पवासियों, श्रद्धालुओं, स्नानार्थियों को प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छता के संकल्प से जोड़ेंगे। मुहिम के तहत वे स्वच्छता के महत्व से अवगत कराते हुए प्रदूषण नियंत्रण के सूत्र भी सिखाएंगे।
भारतीय लोक कला महासंघ की पहल के तहत पहले चरण में इलाहाबाद और कौशाम्बी सहित पास-पड़ोस के जनपदों के विभिन्न विधाओं के 18,500 लोक कलाकारों को सूचीबद्ध करते हुए ग्राम कलाकारों की टीम गठित की गई है। लोक कलाकारों को गंगापुत्र का दर्जा देते हुए उन्हें निर्मल रेती और निर्मल गंगा की मुहिम से जोड़ा गया है। ये कलाकार गंगा गीतों सहित लोककथाओं और लोक परंपराओं से जागरूकता का संदेश देंगे।
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बॉक्स
0 अपने ‘घर के द्वार’ भी खोलेंगे लोककलाकार
लोक कलाकार कुंभ पर्व पर दुनिया भर से जुटने वाले मेहमानों के लिए अपने ‘घर के द्वार’ भी खोलेंगे, ताकि विदेशी मेहमान वहां जाकर ग्रामीण संस्कृति और ग्राम्य जीवन में रची-बसी लोककलाओं का आनंद ले सकें।
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फोटो सहित
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ये लोक कलाकार ही लोक परंपरा के असली संवाहक हैं। लोककलाओं का असर सीधे तौर पर प्रभावी होता है। इसीलिए जनसंदेशों के जरिये लोगों को जोड़ते हुए दुनिया भर में कुंभ की पताका लहराने के लिए इन्हें परंपराओं के मुताबिक प्रशिक्षित किया जा रहा है।
0 लोककलाविद् अतुल यदुवंशी
अध्यक्ष, भारतीय लोक कला महासंघ
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भारतीय लोक कला महासंघ की पहल पर किए जा रहे प्रशिक्षित
लोकगाथाओं, परंपराओं से देंगे निर्मल रेती-निर्मल गंगा का संदेश
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
संगम की रेती पर लगने वाले कुंभ पर्व के दौरान लोक कलाकार कुंभ और भारतीय सांस्कृतिक परंपरा के संवाहक और ‘ब्रांड अंबेसडर’ की भूमिका में दिखेंगे। ये कलाकार लोक परंपराओं के माध्यम से निर्मल रेती और निर्मल गंगा की अलख जगाएंगे, वहीं कल्पवासियों, श्रद्धालुओं, स्नानार्थियों को प्रदूषण नियंत्रण और स्वच्छता के संकल्प से जोड़ेंगे। मुहिम के तहत वे स्वच्छता के महत्व से अवगत कराते हुए प्रदूषण नियंत्रण के सूत्र भी सिखाएंगे।
भारतीय लोक कला महासंघ की पहल के तहत पहले चरण में इलाहाबाद और कौशाम्बी सहित पास-पड़ोस के जनपदों के विभिन्न विधाओं के 18,500 लोक कलाकारों को सूचीबद्ध करते हुए ग्राम कलाकारों की टीम गठित की गई है। लोक कलाकारों को गंगापुत्र का दर्जा देते हुए उन्हें निर्मल रेती और निर्मल गंगा की मुहिम से जोड़ा गया है। ये कलाकार गंगा गीतों सहित लोककथाओं और लोक परंपराओं से जागरूकता का संदेश देंगे।
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0 अपने ‘घर के द्वार’ भी खोलेंगे लोककलाकार
लोक कलाकार कुंभ पर्व पर दुनिया भर से जुटने वाले मेहमानों के लिए अपने ‘घर के द्वार’ भी खोलेंगे, ताकि विदेशी मेहमान वहां जाकर ग्रामीण संस्कृति और ग्राम्य जीवन में रची-बसी लोककलाओं का आनंद ले सकें।
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फोटो सहित
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ये लोक कलाकार ही लोक परंपरा के असली संवाहक हैं। लोककलाओं का असर सीधे तौर पर प्रभावी होता है। इसीलिए जनसंदेशों के जरिये लोगों को जोड़ते हुए दुनिया भर में कुंभ की पताका लहराने के लिए इन्हें परंपराओं के मुताबिक प्रशिक्षित किया जा रहा है।
0 लोककलाविद् अतुल यदुवंशी
अध्यक्ष, भारतीय लोक कला महासंघ