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मंझनपुर में महिला की मौत

Tue, 13 Jun 2017 06:31 PM IST
Updated Tue, 13 Jun 2017 06:31 PM IST
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मंझनपुर में महिला की मौत

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मंझनपुर (कौशाम्बी)।
जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने संवेदनहीनता की सारी हदें पार कर दी हैं। सोमवार को मासूम पूनम के शव को ले जाने के लिए शव वाहन नहीं दिया। पूनम का शव उसका मामा कांधे पर रखकर ले गया था। इससे नाराज डीएम ने रिपोर्ट दर्ज करा दी तो विरोध में मंगलवार की सुबह जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने हड़ताल शुरू कर दी। डॉक्टरों के गुस्से का शिकार गंभीर हालत में प्रसव को लायी गई नगमा (24) हुई। ढाई घंटे तक उसका इलाज नहीं हुआ। इससे उसकी मौत हो गई। एक और मरीज इमरजेंसी में तड़पता रहा। जानकारी होने पर डीएम ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की चेतावनी दी, तब डॉक्टर ओपीडी में बैठे और इलाज शुरू किया।

मलाकसद्दी निवासी अनंत कुमार की सात माह की बेटी पूनम की जिला अस्पताल में सोमवार दोपहर इलाज के दौरान मौत हो गई थी। वह डायरिया से पीड़ित थी। पूनम की मौत के बाद जिला अस्पताल से शव ले जाने के लिए शव वाहन नहीं दिया गया। मजबूरन पूनम का शव उसका मामा कांधे पर रखकर साइकिल से ले गया। जानकारी होने पर डीएम मनीष कुमार वर्मा के निर्देश पर इमरजेंसी वार्ड के चिकित्सक डॉ. विवेक केशरवानी के खिलाफ लोक सेवक द्वारा दायित्वों का सही निर्वहन न करने की रिपोर्ट मंझनपुर कोतवाली में दर्ज करा दिया। इसकी जानकारी होते ही मंगलवार की सुबह से जिला अस्पताल के चिकित्सकों ने हड़ताल शुरू कर दी।
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ओपीडी में चिकित्सक नहीं बैठे। इमरजेंसी वार्ड का भी स्टाफ गायब रहा। इसी दौरान प्रसव पीड़ा होने पर रहीमपुर मोलानी की नगमा पत्नी सलमान प्रसव के लिए आई। ढाई घंटे तक चिकित्सकों ने उसका इलाज नहीं किया। स्टाफ नर्स व अन्य कर्मचारियों ने भी उसकी मदद नहीं की। हालत गंभीर होने पर परिजन उसे निजी अस्पताल ले जा रहे थे कि रास्ते में उसने दम तोड़ दिया। इमरजेंसी वार्ड के बाहर भी एक मरीज तड़पता रहा, लेकिन उसका इलाज नहीं किया गया। इसके बाद डॉक्टर डीएम से मिलने उनके कार्यालय पहुंचे। डीएम को जब जानकारी हुई कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं तो उन्होंने संयुक्त रूप से कार्रवाई की चेतावनी दी। इसके बाद डॉक्टर वापस आए और मरीजों का इलाज शुरू किया।
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रहीमपुर मोलानी की नगमा (24) की मौत से परिजनों में कोहराम मचा है। डॉक्टरों की लापरवाही से नगमा की मौत हुई। इससे परिजनों में आक्रोश है। परिजन इसके लिए डॉक्टरों को ही जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उनका कहना है कि इस मामले में भी डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। समदा की नगमा की एक साल पहले रहीमपुर मोलानी निवासी सलमान से मई वर्ष 2016 में शादी हुई थी। सलमान मुंबई में कपड़ा सिलाई का काम करता है। नगमा गर्भवती थी। पति के मुंबई में होने के कारण नगमा अपने मायके चली आई थी। मंगलवार की सुबह प्रसव पीड़ा हुई तो परिजन उसे लेकर जिला अस्पताल पहुंचे थे। डॉक्टर हड़ताल पर थे, इसलिए उसका इलाज नहीं हुआ। दो घंटे बाद वह उसे लेकर एक निजी अस्पताल जा रहे थे, इसी दौरान उसकी मौत हो गई। नगमा की मौत से परिजन आक्रोशित हैं। मौत की जानकारी होने पर पति मुंबई से गांव के आने के लिए निकल पड़ा है। नगमा के ससुर कलीम खान का कहना है कि वह इस मामले में डॉक्टरों के खिलाफ कार्रवाई कराएंगे।


कोखराज के कशिया का धर्मराज (13) पुत्र हरिश्चंद्र मंगलवार की सुबह आम के पेड़ से गिर गया। इससे उसके हाथ व पैर में गंभीर चोटें आईं। धर्मराज को इलाज के लिए मूरतगंज पीएचसी ले जाया गया। वहां से उसको जिला अस्पताल रेफर किया गया। जिला अस्पताल में डॉक्टर हड़ताल पर थे। धर्मराज को भी इमरजेंसी वार्ड के बाहर लिटा दिया गया। वह दर्द से चीखता-चिल्लाता रहा, लेकिन किसी ने भी पीड़ा नहीं सुनी। धर्मराज के पिता हरिश्चंद्र डॉक्टरों के आगे हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन किसी को भी तरस नहीं आया। अस्पताल के कर्मचारी भी हड़ताल की आड़ में मनमानी पर उतारू रहे। ढाई घंटे बाद जब डॉक्टर वापस आए तभी धर्मराज का इलाज किया गया।


मासूम पूनम के शव को ले जाने के लिए शव वाहन न देने के मामले में बुरी तरह से फंसे स्वास्थ्य विभाग के कर्मी समझौता करने का प्रयास कर रहे हैं। मंगलवार की सुबह ही स्वास्थ्य विभाग के दो कर्मचारी मलाक सद्दी गांव पहुंच गए थे और समझौते के लिए दबाव बनाया। बीडीसी के आने पर बात नहीं बन सकी। पूनम के पिता अनंत कुमार ने मामले की शिकायत मुख्यमंत्री को शिकायती पत्र भेजकर किया है।



डॉक्टरों की हड़ताल से करीब दो सौ मरीज मंगलवार को परेशान रहे। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद विरोध में उतरे डॉक्टर किसी भी कीमत पर ओपीडी में बैठने को तैयार नहीं थे। घंटों इंतजार के बाद मरीजों को निजी अस्पतालों में जाना पड़ा। जिला अस्पताल के बाहर स्थित निजी अस्पतालों में अचानक मरीजों की भीड़ पहुंची तो वहां के डॉक्टरों के चेहरे खिल गए। जिला अस्पताल के डॉक्टरों ने अपनी लापरवाही पर पर्दा डालने के लिए मंगलवार की सुबह से हड़ताल शुरू कर दी थी। डॉक्टरों का कहना था कि उनके खिलाफ जो रिपोर्ट लिखाई गई है, वह गलत है। इसमें उनका कोई दोष नहीं है। इसी का हवाला देकर वह विरोध कर रहे थे। सुबह से ही हड़ताल होने के कारण दूर दराज से इलाज कराने आए लोगों को तमाम परेशानी का सामना करना पड़ा। करारी के रामनेवाज अपनी बेटी स्वेता, पिंडरा के लल्लू अपने बेटे कैलाश का इलाज कराने आए थे। दोनों को बुखार आ रहा था। इसी तरह पश्चिमशरीरा के रामचंद्र खुद का इलाज कराने आए थे। बड़ी संख्या में महिलाएं भी आई थी। ओपीडी खुली थी, लेकिन डॉक्टर नहीं थे। पर्चा लेकर मरीज डॉक्टरों का इंतजार ही करते रहे। समय बीता तो मरीज निजी अस्पतालों में गए।


धरती के भगवान के गुस्से का शिकार हुई प्रसूता, मौत
रिपोर्ट दर्ज होने से हड़ताल पर थे डॉक्टर
मासूम बच्ची की मौत पर शव वाहन न देने के मामले में डीएम ने दर्ज कराई थी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
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