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जनधन के 45 फीसदी खाते बेकार, शेष योजनाओं के भरोसे

Sun, 17 Sep 2017 01:39 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद Updated Sun, 17 Sep 2017 01:39 AM IST
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45 per cent of the accounts are worthless, the rest of the schemes
जन धन योजना
जन धन खाते खुलवाकर सबको बैंकों से जोड़ने की मुहिम केंद्र सरकार की उपलब्धियों में शामिल है, लेकिन इसका दूसरा सच ये भी है कि जिले में तकरीबन 45 प्रतिशत खातों का औचित्य नहीं रह गया है। आठ लाख जनधन खातों में से लगभग 80 हजार शून्य बैलेंस की वजह से बंद हो चुके हैं। तीन लाख से अधिक खाते बैलेंस होने की वजह से चल तो रहे हैं, लेकिन उनमें लेनदेन बंद है। शेष खाते भी सरकारी योजनाओं के भरोसे चल रहे हैं।
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दो साल पहले अभियान के तौर पर जनधन खाते खोले गए। चूंकि शून्य बैलेंस पर खाता खुलना था, इसलिए सरकार के इस अभियान को सफलता भी मिली और जिले में आठ लाख से अधिक जनधन खाते खोले गए। बड़ी संख्या में खातों में साल भर बाद तक कोई लेनदेन नहीं हुआ। उनमें शून्य बैलेंस ही बना रहा। आरबीआई के नए आदेश के तहत जिले में ऐसे तकरीबन 10 फीसदी जनधन खाते बंद कर दिए गए।
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इस तरह की रिपोर्ट आने के बाद सरकार ने खातों का संचालन जारी रखने का दबाव बनवाया। इस दबाव में बैंक कर्मियों ने अभियान चलाकर खातों में पैसा डलवाया, लेकिन उसके बाद कोई लेनदेन नहीं हुआ। हालांकि, कुछ बैलेंस होने की वजह से खाते बंद तो नहीं हुए, लेकिन उनका कोई औचित्य नहीं रह गया है। इस तरह के तीन लाख से अधिक खाते हैं, जिनमें लेनदेन नहीं हुआ। अकेले बड़ौदा पूर्वी उत्तर प्रदेश ग्रामीण बैंक में ही 77 हजार से अधिक जन धन खाते हैं, जिनमें कोई लेनदेन नहीं हो रहा। बैंक के 266928 में से 1.90 लाख खातों में ही लेनदेन हो रहा है।
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गौर करने वाली बात यह है कि जो जनधन खाते संचालित हैं, वे भी सरकारी योजनाओं के भरोसे हैं। अटल पेंशन योजना, प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षा, वृद्धा पेंशन, विधवा पेंशन, दिव्यांग पेंशन, पूर्व की समाजवादी पेंशन, प्रधानमंत्री आवास, शौचालय निर्माण आदि योजनाओं की राशि लाखों लाभार्थियों के जनधन खाते में भेजी गई। इसके लिए बैंकों की ओर से खाताधारकों के आधार कार्ड भी बनवाए गए।

जनधन खाताधारक खुद को ठगा हुआ भी महसूस कर रहे हैं। शुरू में शून्य बैलेंस में खाता खुलवाने के साथ लेनदेन को लेकर भी कोई पाबंदी नहीं थी, लेकिन नोटबंदी के बाद मुश्किलें बढ़ गईं। महीनों तो लाखों खाते सीज कर दिए गए थे। इसकी वजह से लोग अपना ही पैसा नहीं निकाल पाए। अब खाता खोल दिया गया है, लेकिन अधिकतम निकासी की पाबंदी बनी हुई है। ग्राहक एक महीने में अधिकतम 10 हजार रुपये ही निकाल सकते हैं। कई अन्य तरह की भी पाबंदियां हैं। इसकी वजह से भी लोगों ने खाता बंद करवा दिए।


कितने जन धन खाते खुले और कितने बंद हो गए, इसका सही आंकड़ा बताना कठिन है। शून्य बैलेंस वाले खाते बंद कर दिए गए हैं। सरकारी योजनाओं की राशि अब सीधे लाभार्थियों के खाते में जाती है। ऐसे में विभिन्न योजनाओं के पात्रों के जनधन खाता इनसे जोड़े गए हैं। - रामजी, अग्रणी बैंक प्रबंधक
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