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सामान्य की सीटों पर 2134 महिलाओं की कर दी नियुक्ति
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सामान्य की सीटों पर 2134 ओबीसी महिलाओं की कर दी नियुक्ति
प्रयागराज। 2013 में विज्ञापित 41610 कांस्टेबल भर्ती में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा गलत तरीके से क्षैजित आरक्षण लागू करने का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस बार विवाद अनारिक्षत वर्ग में महिलाओं का 20 फीसदी क्षैतिज आरक्षण लागू करने को लेकर खड़ा हुआ है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जनरल की 20 प्रतिशत सीटों का कोटा पूरा करने के लिए 2134 ओबीसी महिलाओं को इन पर नियुक्ति कर दी गई क्योंकि, सामान्य वर्ग की उतनी महिला अभ्यर्थी नहीं मिल सकी थीं।
याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थियों के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना है कि नियमानुसार महिला आरक्षण की बची सीटों पर सामान्य वर्ग के पुरुषों की नियुक्ति की जानी चाहिए। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने 19 अगस्त तक याचिका में उठाए गई आपत्तियों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अभ्यर्थियों का कहना है कि 41610 पदों में से 17750 सीटें सामान्य की, 9585 ओबीसी की और 7455 एससी की होती हैं। इसमें यदि महिलाओं का 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का अनुपात देखा जाए तो सामान्य में 3550 और ओबीसी में 1917 सीटें महिलाओं को मिलनी चाहिए। इससे पूर्व पुलिस भर्ती बोर्ड ने क्षैतिज आरक्षण को लेकर दाखिल रवि कुमार शर्मा की याचिका में कोर्ट में हलफनामा दिया था कि सामान्य वर्ग की 1416 महिलाओं की ही नियुक्ति हो पाई है।
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इस हिसाब से सामान्य में महिलाओं के 2134 पद बच जाते हैं। इन बचे पदों पर सामान्य वर्ग के पुरुषों को नियुक्ति दी जानी चाहिए। मगर पुलिस भर्ती बोर्ड ने 20 प्रतिशत महिलाओं का कोटा पूरा करने के लिए इन पदों पर ओबीसी की महिलाओं की नियुक्ति कर दी।
यह नियमानुसार गलत है क्योंकि आरक्षित वर्ग का क्षैतिज आरक्षण उसी वर्ग में दिया जा सकता है। अधिवक्ता का कहना है कि मौजूदा अनुपात में आरक्षण 50 प्रतिशत के निर्धारित कोटे से ज्यादा हो रहा है जो कि इंदिरा साहनी केस में सुप्रीमकोर्ट की गाइड लाइन के विपरीत है। इस मामले पर 19 अगस्त को सुनवाई होगी।
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प्रयागराज। 2013 में विज्ञापित 41610 कांस्टेबल भर्ती में विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। पुलिस भर्ती बोर्ड द्वारा गलत तरीके से क्षैजित आरक्षण लागू करने का मामला एक बार फिर हाईकोर्ट पहुंच गया है। इस बार विवाद अनारिक्षत वर्ग में महिलाओं का 20 फीसदी क्षैतिज आरक्षण लागू करने को लेकर खड़ा हुआ है। अभ्यर्थियों का आरोप है कि जनरल की 20 प्रतिशत सीटों का कोटा पूरा करने के लिए 2134 ओबीसी महिलाओं को इन पर नियुक्ति कर दी गई क्योंकि, सामान्य वर्ग की उतनी महिला अभ्यर्थी नहीं मिल सकी थीं।
याचिका दाखिल करने वाले अभ्यर्थियों के अधिवक्ता सीमांत सिंह का कहना है कि नियमानुसार महिला आरक्षण की बची सीटों पर सामान्य वर्ग के पुरुषों की नियुक्ति की जानी चाहिए। याचिका पर सुनवाई कर रहे न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्र ने 19 अगस्त तक याचिका में उठाए गई आपत्तियों पर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
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अभ्यर्थियों का कहना है कि 41610 पदों में से 17750 सीटें सामान्य की, 9585 ओबीसी की और 7455 एससी की होती हैं। इसमें यदि महिलाओं का 20 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का अनुपात देखा जाए तो सामान्य में 3550 और ओबीसी में 1917 सीटें महिलाओं को मिलनी चाहिए। इससे पूर्व पुलिस भर्ती बोर्ड ने क्षैतिज आरक्षण को लेकर दाखिल रवि कुमार शर्मा की याचिका में कोर्ट में हलफनामा दिया था कि सामान्य वर्ग की 1416 महिलाओं की ही नियुक्ति हो पाई है।
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इस हिसाब से सामान्य में महिलाओं के 2134 पद बच जाते हैं। इन बचे पदों पर सामान्य वर्ग के पुरुषों को नियुक्ति दी जानी चाहिए। मगर पुलिस भर्ती बोर्ड ने 20 प्रतिशत महिलाओं का कोटा पूरा करने के लिए इन पदों पर ओबीसी की महिलाओं की नियुक्ति कर दी।
यह नियमानुसार गलत है क्योंकि आरक्षित वर्ग का क्षैतिज आरक्षण उसी वर्ग में दिया जा सकता है। अधिवक्ता का कहना है कि मौजूदा अनुपात में आरक्षण 50 प्रतिशत के निर्धारित कोटे से ज्यादा हो रहा है जो कि इंदिरा साहनी केस में सुप्रीमकोर्ट की गाइड लाइन के विपरीत है। इस मामले पर 19 अगस्त को सुनवाई होगी।