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नए छात्रों को अब भी हॉस्टल का इंतजार
Updated Mon, 07 Aug 2017 09:15 PM IST
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काम हुआ नहीं, हॉस्टल आवंटन भी अटका
0 हॉस्टलों के ज्यादातर कमरों में लगा हुआ है ताला
0 हॉस्टल आवंटन के लिए भटक रहे नवप्रवेशित छात्र
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सत्र 2017-18 के तहत प्रवेश की प्रक्रिया अंतिम दौर में हैं और कुछ पाठ्यक्रमों में कक्षाओं का संचालन भी शुरू हो गया है, लेकिन बड़ी संख्या में छात्रों को अब भी हॉस्टल आवंटन का इंतजार है। हॉस्टल वॉश आउट से पहले इविवि प्रशासन ने दावा किया था कि जुलाई तक हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी लेकिन हॉस्टलों में आधे से अधिक कमरे अब भी खाली पड़े हैं। ज्यादातर हॉस्टलों में मरम्मत का काम भी आधा-अधूरा हुआ है।
इविवि प्रशासन ने स्नातक एवं परास्नातक के नवप्रवेशितों को हिंदू हॉस्टल में कमरे आवंटित करने की योजना बनाई है। हिंदू हॉस्टल में सभी कमरे दो-दो बेड के हैं। वहां 184 कमरे हैं, जिनमें 368 छात्रों के रहने की क्षमता है। यह हॉस्टल जिस ट्रस्ट का है, उसके पास हॉस्टल की मरम्मत पर खर्च करने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है। ऐसे में हॉस्टल में मरम्मत के नाम पर एक रुपया खर्च नहीं किया गया। हॉस्टल में अब सिर्फ दर्जन भर कमरों में छात्र रहने आए हैं जबकि अन्य कमरों में ताला लगा है। जीएन झा हॉस्टल की भी यही हालत है। जीएन झा में भी नए छात्रों का आना है लेकिन आवंटन की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण वहां आधे से अधिक कमरों में ताला लगा हुआ है। दो में से एक आरओ खराब पड़ा है। बाथरूम में साबुनदानी टूटी पड़ी है। दो में से एक वाटर प्यूरीफायर खराब पड़ा है।
कमरों के बाहर गैलरी में जगह-जगह पान की पीक पड़ी है। हॉस्टल में रंगाई-पुताई भी नहीं हुई है। हॉस्टल से बैंक रोड की ओर जाने वाला नाला जाम पड़ा है और झाड़ियों ने जंगल का रूप ले लिया है। हॉलैंड हॉल के भी 80 फीसदी कमरों में ताला लगा है। इसमें एलएलबी के नव प्रवेशितों को भी कमरे आवंटित किए जाने हैं। हॉस्टल की दीवारों पर तो रंगाई-पुताई कराई गई है लेकिन शौचालय आदि में कोई काम नहीं हुआ है। इसी तरह डॉ. एसआरके हॉस्टल में मरम्मत के नाम पर दीवार के आधे हिस्से की रंगाई-पुताई की गई है। बाकी हिस्से को ऐसे ही छोड़ दिया गया है, जिसपर पाक की पीक साफ नजर आती है। ज्यादातर हॉस्टलों में काम के नाम पर खानापूरी हुई है और अब तक आवंटन की प्रक्रिया भी अधूरी पड़ी है।
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0 हॉस्टलों के ज्यादातर कमरों में लगा हुआ है ताला
0 हॉस्टल आवंटन के लिए भटक रहे नवप्रवेशित छात्र
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सत्र 2017-18 के तहत प्रवेश की प्रक्रिया अंतिम दौर में हैं और कुछ पाठ्यक्रमों में कक्षाओं का संचालन भी शुरू हो गया है, लेकिन बड़ी संख्या में छात्रों को अब भी हॉस्टल आवंटन का इंतजार है। हॉस्टल वॉश आउट से पहले इविवि प्रशासन ने दावा किया था कि जुलाई तक हॉस्टल आवंटन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी लेकिन हॉस्टलों में आधे से अधिक कमरे अब भी खाली पड़े हैं। ज्यादातर हॉस्टलों में मरम्मत का काम भी आधा-अधूरा हुआ है।
इविवि प्रशासन ने स्नातक एवं परास्नातक के नवप्रवेशितों को हिंदू हॉस्टल में कमरे आवंटित करने की योजना बनाई है। हिंदू हॉस्टल में सभी कमरे दो-दो बेड के हैं। वहां 184 कमरे हैं, जिनमें 368 छात्रों के रहने की क्षमता है। यह हॉस्टल जिस ट्रस्ट का है, उसके पास हॉस्टल की मरम्मत पर खर्च करने के लिए पर्याप्त धनराशि नहीं है। ऐसे में हॉस्टल में मरम्मत के नाम पर एक रुपया खर्च नहीं किया गया। हॉस्टल में अब सिर्फ दर्जन भर कमरों में छात्र रहने आए हैं जबकि अन्य कमरों में ताला लगा है। जीएन झा हॉस्टल की भी यही हालत है। जीएन झा में भी नए छात्रों का आना है लेकिन आवंटन की प्रक्रिया पूरी न होने के कारण वहां आधे से अधिक कमरों में ताला लगा हुआ है। दो में से एक आरओ खराब पड़ा है। बाथरूम में साबुनदानी टूटी पड़ी है। दो में से एक वाटर प्यूरीफायर खराब पड़ा है।
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कमरों के बाहर गैलरी में जगह-जगह पान की पीक पड़ी है। हॉस्टल में रंगाई-पुताई भी नहीं हुई है। हॉस्टल से बैंक रोड की ओर जाने वाला नाला जाम पड़ा है और झाड़ियों ने जंगल का रूप ले लिया है। हॉलैंड हॉल के भी 80 फीसदी कमरों में ताला लगा है। इसमें एलएलबी के नव प्रवेशितों को भी कमरे आवंटित किए जाने हैं। हॉस्टल की दीवारों पर तो रंगाई-पुताई कराई गई है लेकिन शौचालय आदि में कोई काम नहीं हुआ है। इसी तरह डॉ. एसआरके हॉस्टल में मरम्मत के नाम पर दीवार के आधे हिस्से की रंगाई-पुताई की गई है। बाकी हिस्से को ऐसे ही छोड़ दिया गया है, जिसपर पाक की पीक साफ नजर आती है। ज्यादातर हॉस्टलों में काम के नाम पर खानापूरी हुई है और अब तक आवंटन की प्रक्रिया भी अधूरी पड़ी है।
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