{"_id":"597f56054f1c1bff448b462b","slug":"31501517317-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"स्कूलों में सामायोजन पर रोक","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
स्कूलों में सामायोजन पर रोक
Updated Mon, 31 Jul 2017 09:38 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सभी केंद्र
000000000000
परिषदीय शिक्षकों के समायोजन पर रोक लगी
0 सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद से जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के समायोजन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद से जवाब भी मांगा है। अजय कुमार मिश्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने दिया है।
याचिका में प्रदेश सरकार द्वारा जारी 13 जून 2017 के शासनादेश को चुनौती दी गई थी। याची के अधिवक्ता नवीन शर्मा ने दलील दी कि परिषदीय विद्यालयों के अध्यापकों का समायोजन आरटीई एक्ट के प्रावधानों के विपरीत है। नियमानुसार अध्यापकों की संख्या छात्र संख्या के आधार पर तय की जानी चाहिए। स्कूलों में अभी तक दाखिले चल रहे हैं। दाखिले 31 जुलाई तक होते हैं। इसके बाद ही सही छात्र संख्या का पता चल सकेगा। इससे पूर्व समायोजन करने का औचित्य नहीं है। यह भी कहा गया कि शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द हो जाने से बहुत से विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या कम हो गई है।
इसी प्रकार से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तीन विषयों गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के अध्यापकों का होना अनिवार्य है। इसको ध्यान रखे बिना समायोजन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने भी स्वीकार किया कि शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद स्थितियां बदली हैं। सरकार समायोजन नीति की समीक्षा कर रही है। कोर्ट ने 13 जून 2017 के शासनादेश पर रोक लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
000000000000
परिषदीय शिक्षकों के समायोजन पर रोक लगी
0 सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद से जवाब तलब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हाईकोर्ट ने परिषदीय प्राथमिक और उच्च प्राथमिक विद्यालयों के शिक्षकों के समायोजन पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने इस मामले में प्रदेश सरकार और बेसिक शिक्षा परिषद से जवाब भी मांगा है। अजय कुमार मिश्र की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने दिया है।
याचिका में प्रदेश सरकार द्वारा जारी 13 जून 2017 के शासनादेश को चुनौती दी गई थी। याची के अधिवक्ता नवीन शर्मा ने दलील दी कि परिषदीय विद्यालयों के अध्यापकों का समायोजन आरटीई एक्ट के प्रावधानों के विपरीत है। नियमानुसार अध्यापकों की संख्या छात्र संख्या के आधार पर तय की जानी चाहिए। स्कूलों में अभी तक दाखिले चल रहे हैं। दाखिले 31 जुलाई तक होते हैं। इसके बाद ही सही छात्र संख्या का पता चल सकेगा। इससे पूर्व समायोजन करने का औचित्य नहीं है। यह भी कहा गया कि शिक्षामित्रों का समायोजन रद्द हो जाने से बहुत से विद्यालयों में शिक्षकों की संख्या कम हो गई है।
विज्ञापन
इसी प्रकार से उच्च प्राथमिक विद्यालयों में तीन विषयों गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान के अध्यापकों का होना अनिवार्य है। इसको ध्यान रखे बिना समायोजन किया जा रहा है। प्रदेश सरकार के अधिवक्ता ने भी स्वीकार किया कि शिक्षा मित्रों का समायोजन रद्द होने के बाद स्थितियां बदली हैं। सरकार समायोजन नीति की समीक्षा कर रही है। कोर्ट ने 13 जून 2017 के शासनादेश पर रोक लगाते हुए सरकार से जवाब मांगा है। मामले की सुनवाई 21 अगस्त को होगी।
विज्ञापन