Mahakumbh : क्रेक और आकार में कम पाए गए 23 साल स्लीपर रिजेक्ट, गुणवत्ता पर उठे सवाल
गंगा पर पांटून पुलों के निर्माण के लिए साल स्लीपर का वर्क ऑर्डर लेने वाली पांच कंपनियों के रायपुर स्थित भंडारण का निरीक्षण कर पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता देवेंद्र सिंह और कुंभ मेला डिवीजन के अधिशासी अभियंता सुरेंद्र सिंह चार दिन बाद मंगलवार को यहां पहुंचे। दोनों अफसरों के आने के बाद मुख्य अभियंता एके द्विवेदी ने स्थिति की समीक्षा की।
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महाकुंभ में गंगा पर बनने वाले 30 अस्थायी पांटून पुलों के निर्माण लिए रायपुर से मंगाई जाने वाली साल स्लीपर की लकड़ी की गुणवत्ता हैरान कर देने वाली है। 40 करोड़ संतों-भक्तों के महाकुंभ में आने का अनुमान लगाया गया है, वहीं इतनी बड़ी भीड़ जिन पांटून पुलों से होकर गुजरेगी, उसमें इस्तेमाल होने वाली लकड़ी लगातार अधोमानक पाई जा रही है।
उधर, रायपुर से आपूर्ति शुरू होने के बाद चार दिन से परेड ग्राउंड में स्टोर परिसर में खड़े ट्रकों से अनलोडिंग शुरू हुई। एक ट्रक से 229 स्लीपर उतारे गए। इसमें 61 साल एजिंग थे, जबकि 168 में से 23 स्लीपर मानक के विपरीत होने की वजह से थर्ड पार्टी एजेंसी ने रिजेक्ट कर दिए। वहीं, रायपुर में घटिया गुणवत्ता की वजह से पासिंग न होने पर पीडब्ल्यूडी के अफसरों को परीक्षण मानक में भी बदलाव करना पड़ा है, ताकि स्लीपर छटने से रोका जा सके।
गंगा पर पांटून पुलों के निर्माण के लिए साल स्लीपर का वर्क ऑर्डर लेने वाली पांच कंपनियों के रायपुर स्थित भंडारण का निरीक्षण कर पीडब्ल्यूडी के अधीक्षण अभियंता देवेंद्र सिंह और कुंभ मेला डिवीजन के अधिशासी अभियंता सुरेंद्र सिंह चार दिन बाद मंगलवार को यहां पहुंचे। दोनों अफसरों के आने के बाद मुख्य अभियंता एके द्विवेदी ने स्थिति की समीक्षा की।
पासिंग में अब तक 15 स्लीपर ही पास हो सके हैं
साथ ही मैन पावर बढ़ाकर समय रहते साल स्लीपर की आपूर्ति पूरा कराने के उपायों पर मंथन किया। मुख्य अभियंता ने बताया कि 27 जगहों पर भंडारण देखा गया है। उन्होंने समय पर काम पूरा होने का दावा किया। वहीं, रायपुर में परीक्षण टीम के सदस्यों ने नई मानक शीट के आधार पर सौ स्लीपर पास किए। पिछले 20 दिनों से जारी पासिंग में अब तक 1500 स्लीपर पास हुए हैं।
इस गति को बेहद सुस्त और चिंताजनक माना जा रहा है। कहा जा रहा है कि पासिंग कमेटी के सदस्यों के तय मानक और शर्तों का पालन करने पर अड़े होने की वजह से मिल संचालक उन्हें या तो स्लीपर दिखा नहीं रहे हैं या फिर दिखाने पर रिजेक्ट हो जा रहे हैं। ऐसे में एसई और एक्सईएन ने तय किए गए नए मानकों के आधार पर अब पासिंग करने के लिए कहा है, ताकि स्थिति संभाली जा सके।
इस बार जिन फर्मों को साल स्लीपर की आपूर्ति का ठेका दिया गया है, उनमें धोरमनाथ ट्रेडर्स, अनमोल टिंबर, नथानी टिंबर, धोरमनाथ ट्रेडिंग कंपनी और केएन पटेल कंपनी शामिल हैं। कहा जा रहा है कि परीक्षण टीम के मानक पर उपयुक्त न पाए जाने की वजह से इन कंपनियों को मिले कुल वर्क आर्डर का अब तक 2.03 प्रतिशत साल स्लीपर ही पास हो सका है।