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समाज को जोड़ने में कुंभ की अहम भूमिका
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प्रयागराज। विज्ञान परिषद् के तत्वावधान में मंगलवार को कुंभ का धार्मिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं वैज्ञानिक महत्व विषयक परिचर्चा आयोजित हुई। वक्ताओं ने कुंभ के इन पक्षों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इनके विविध पहलूओं पर विस्तार से चर्चा की। डॉ. हरिदत्त शर्मा ने कहाकि नाट्य शास्त्र में कुंभ की मांगलिकता रेखांकित हुई है। हरिमोहन मालवीय ने कुंभ संप्रदायों के विस्तार की जरूरत बताई। डॉ. हेरंब चतुर्वेदी ने उसके ऐतिहासिक संदर्भों पर विस्तार से चर्चा की। राम नरेश तिवारी पिंडीवासा ने समाज को जोड़ने में कुंभ की अहम भूमिका बताई। डॉ. राजेंद्र त्रिपाठी रसराज ने वेद एवं पुराणों में कुंभ के उल्लेख पर चर्चा की। डॉ. राजेश मिश्रा ने कहा कि ज्ञान और कर्म के समुच्चय से प्रयाग बनता है। इसके संस्थापक भरद्वाज मुनि थे। प्रथम सत्र की अध्यक्षता कर रहे डॉ. दीनानाथ तिवारी ने कहा कि जब धर्म और विज्ञान का मिलन होगा वह सुखद अनुभव होगा। दूसरे सत्र में डॉ धनंजय चोपड़ा ने कहा कि इस बार कुंभ में लोक मीडिया का बोलबाला है। करोड़ों कैमरे अपनी नजरों से इसकी छवियां सोशल मीडिया में फैला रहे हैं। डॉ. शांति चौधरी ने कहा कुंभ ज्ञान के मंथन का चरम आयोजन है। सत्र के अध्यक्ष डॉ. कृष्ण बिहारी पाण्डेय ने कैलाश गौतम की कविता अमौसा का मेला की चर्चा करते हुए जनसाधारण को कुंभ का सबसे महत्वपूर्ण घटक बताया। संगोष्ठी के आरम्भ में डॉ शिवगोपाल मिश्रा ने अतिथियों का स्वागत किया। संचालन देवव्रत द्विवेदी ने तथा धन्यवाद ज्ञापन डॉ. हनुमान प्रसाद तिवारी और डॉ. केएन उत्तम ने किया। इस अवसर पर डॉ. रसराज की पुस्तक प्रयागराज कुंभ कथा का लोकार्पण भी हुआ।