{"_id":"595e674e4f1c1b9a538b46e0","slug":"181499359054-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"इंटरव्यू छोड़कर चले गए एक्सपर्ट","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
इंटरव्यू छोड़कर चले गए एक्सपर्ट
Updated Thu, 06 Jul 2017 10:07 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
इंटरव्यू छोड़कर चल गए एक्सपर्ट
0 एक कैंडिडेट का चयन न होने से सूची पर हस्ताक्षर करने से इनकार
0 अब शारीरिक शिक्षा विभाग में गैस्ट फैकेल्टी की नियुक्ति पर विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में गेस्ट फैकेल्टी की नियुक्ति के तहत जारी इंटरव्यू की प्रक्रिया को लेकर रोज नया विवाद सामने आ रहा है। पहले प्राचीन इतिहास विभाग तो अब शारीरिक शिक्षा विभाग में एक्सपर्ट की इंटरव्यू प्रक्रिया छोड़कर चले जाने का मामला सामने आया है। एक्सपर्ट ने चयनितों की सूची पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया और आरोप लगाया कि योग्यता के बावजूद एक कैंडिडेट का चयन नहीं किया और यूजीसी रेगुलेशन-2010 के विपरीत मेरिट बनाई गई। एक्सपर्ट ने वीसी को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की है।
शारीक्षिक शिक्षा विभाग में चार पदों पर अतिथि प्रवक्ताओं की नियुक्ति के लिए 12 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। कमेटी में विभाग के वरिष्ठ प्रो. डीसी लाल को बतौर एक्सपर्ट शामिल किया गया। प्रो. लाल का आरोप है कि इंटरव्यू वाले दिन दोपहर तीन बजे तक उन्हें कोई बुलावापत्र नहीं भेजा गया। जब इंटरव्यू लेने पहुंचे तो डीन और विभागाध्यक्ष ने मनमानी कर गलत तरीके से चयनितों की सूची तैयार कर ली और योग्य अभ्यर्थियों को मेरिट से बाहर कर दिया। इनमें से एक ऐसा अभ्यर्थी था, जो पांच साल से बतौर गेस्ट फैकेल्टी विश्वविद्यालय में पढ़ा रहा था और उसके 32 पेपर प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो एफआरसी के निदेशक ने चयनितों की सूची पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया लेकिन प्रो. लाल ने बतौर एक्सपर्ट हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। प्रो. लाल का आरोप है कि निदेशक इंटरव्यू स्थल पर चले आए, जो नियमों के विपरीत है।
उधर, एफआरसी के निदेशक प्रो. अनुपम दीक्षित का कहना है कि निदेशक किसी भी इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान वहां उपस्थित हो सकते हैं। प्रो. लाल को बतौर एक्सपर्ट कमेटी में रखा गया था और इस बाबत उन्हें ईमेल पर समय से बुलावा पत्र भेज दिया गया था। साथ ही इंटरव्यू कमेटी के बारे में जो जानकारी डीन आर्ट्स को भेजी थी, उसकी एक कॉपी भी प्रो. लाल को भी दी गई थी। चयन प्रक्रिया नियमों के तहत हुई है। विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना चहल का कहना है कि प्रो. लाल जिस अभ्यर्थी के चयन न होने से नाराज है, उसे फर्जी दस्तावेज लगाने के आरोप में विश्वविद्यालय पहले ही डिबार कर चुका है। इंटरव्यू के दौरान संबंधित अभ्यर्थी से उसके जेआरएफ, पीएचडी के बारे में कई सवाल पूछे गए और हर सवाल का जवाब संदेह के घेरे में था। इसके अलावा प्रो. लाल ने सभी अभ्यर्थियों को दिए अंक पर अपने हस्ताक्षर किए लेकिन जब इंटरव्यू कमेटी के अन्य सदस्यों एवं अध्यक्ष की ओर से दिए गए अंकों के आधार पर कॉमन मेरिट तैयार की गई और एक कैंडिडेट चयनितों की सूची से बाहर हो गया तो अंतिम सूची में उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन
0 एक कैंडिडेट का चयन न होने से सूची पर हस्ताक्षर करने से इनकार
0 अब शारीरिक शिक्षा विभाग में गैस्ट फैकेल्टी की नियुक्ति पर विवाद
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। इलाहाबाद विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में गेस्ट फैकेल्टी की नियुक्ति के तहत जारी इंटरव्यू की प्रक्रिया को लेकर रोज नया विवाद सामने आ रहा है। पहले प्राचीन इतिहास विभाग तो अब शारीरिक शिक्षा विभाग में एक्सपर्ट की इंटरव्यू प्रक्रिया छोड़कर चले जाने का मामला सामने आया है। एक्सपर्ट ने चयनितों की सूची पर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया और आरोप लगाया कि योग्यता के बावजूद एक कैंडिडेट का चयन नहीं किया और यूजीसी रेगुलेशन-2010 के विपरीत मेरिट बनाई गई। एक्सपर्ट ने वीसी को पत्र भेजकर मामले की जांच कराने की मांग की है।
शारीक्षिक शिक्षा विभाग में चार पदों पर अतिथि प्रवक्ताओं की नियुक्ति के लिए 12 अभ्यर्थियों को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। कमेटी में विभाग के वरिष्ठ प्रो. डीसी लाल को बतौर एक्सपर्ट शामिल किया गया। प्रो. लाल का आरोप है कि इंटरव्यू वाले दिन दोपहर तीन बजे तक उन्हें कोई बुलावापत्र नहीं भेजा गया। जब इंटरव्यू लेने पहुंचे तो डीन और विभागाध्यक्ष ने मनमानी कर गलत तरीके से चयनितों की सूची तैयार कर ली और योग्य अभ्यर्थियों को मेरिट से बाहर कर दिया। इनमें से एक ऐसा अभ्यर्थी था, जो पांच साल से बतौर गेस्ट फैकेल्टी विश्वविद्यालय में पढ़ा रहा था और उसके 32 पेपर प्रकाशित हो चुके हैं। उन्होंने इस पर आपत्ति जताई तो एफआरसी के निदेशक ने चयनितों की सूची पर हस्ताक्षर करने के लिए दबाव बनाया लेकिन प्रो. लाल ने बतौर एक्सपर्ट हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। प्रो. लाल का आरोप है कि निदेशक इंटरव्यू स्थल पर चले आए, जो नियमों के विपरीत है।
विज्ञापन
उधर, एफआरसी के निदेशक प्रो. अनुपम दीक्षित का कहना है कि निदेशक किसी भी इंटरव्यू प्रक्रिया के दौरान वहां उपस्थित हो सकते हैं। प्रो. लाल को बतौर एक्सपर्ट कमेटी में रखा गया था और इस बाबत उन्हें ईमेल पर समय से बुलावा पत्र भेज दिया गया था। साथ ही इंटरव्यू कमेटी के बारे में जो जानकारी डीन आर्ट्स को भेजी थी, उसकी एक कॉपी भी प्रो. लाल को भी दी गई थी। चयन प्रक्रिया नियमों के तहत हुई है। विभागाध्यक्ष प्रो. अर्चना चहल का कहना है कि प्रो. लाल जिस अभ्यर्थी के चयन न होने से नाराज है, उसे फर्जी दस्तावेज लगाने के आरोप में विश्वविद्यालय पहले ही डिबार कर चुका है। इंटरव्यू के दौरान संबंधित अभ्यर्थी से उसके जेआरएफ, पीएचडी के बारे में कई सवाल पूछे गए और हर सवाल का जवाब संदेह के घेरे में था। इसके अलावा प्रो. लाल ने सभी अभ्यर्थियों को दिए अंक पर अपने हस्ताक्षर किए लेकिन जब इंटरव्यू कमेटी के अन्य सदस्यों एवं अध्यक्ष की ओर से दिए गए अंकों के आधार पर कॉमन मेरिट तैयार की गई और एक कैंडिडेट चयनितों की सूची से बाहर हो गया तो अंतिम सूची में उन्होंने हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया।
विज्ञापन