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18000 सिपाहियों को पदावनत करने का मामला

Wed, 04 Mar 2015 11:51 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद Updated Wed, 04 Mar 2015 11:51 PM IST
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18,000 soldiers to downgrade case
पुलिस विभाग में नियम विरुद्ध तरीके से दी गई पदोन्नति को रद करने संबंधी डीजीपी के आदेश को सिपाही अदालत में चुनौती देंगे। ‘अमर उजाला’ में खबर प्रकाशित होने के  बाद इस आदेश को लेकर सिपाहियों में हड़कंप मचा है। प्रदेश के तमाम जिलों से प्रोन्नति पाए सिपाही हाईकोर्ट में अपने अधिवक्ताओं के संपर्क में हैं। गाजियाबाद, मुरादाबाद, मेरठ, आगरा, बनारस, गौतमबुद्ध नगर और इलाहाबाद के तमाम सिपाहियों की याचिकाएं तैयार हो चुकी हैं। हाईकोर्ट में होली का अवकाश होने के कारण अगले सप्ताह में इनकी याचिकाओं पर सुनवाई होगी।
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सिपाहियों का केस लड़ रहे अधिवक्ता विजय गौतम का कहना है कि उत्तर प्रदेश वर्दी विनिमय के पैरा 16 में प्रोन्नत वेतनमान पाने वाले हेडकांस्टेबल को लाल फीता और एक स्टार लगाने का अधिकार है। उनको छोटे अपराधों में विवेचना करने का भी अधिकार है। 25 फरवरी 2015 को डीजीपी ने सर्कुलर जारी कर प्रोन्नति पाए सिपाहियों को पदावनत करने का फरमान जारी कर दिया। जो  गलत है क्योंकि 15 सितंबर 1997 के शासनादेश के मुताबिक प्रोन्नत वेतनमान वाले हेडकांस्टेबल का वेतन दरोगा के बराबर है। यह लोग 24 से 26 वर्ष की सेवा पूरी कर चुके हैं इसलिए इनको पदावनत करने का आदेश गलत है।
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उल्लेखनीय है कि पुलिस विभाग में अगस्त-सितंबर माह में करीब 18 हजार सिपाहियों को प्रोन्नति देकर सहायक उपनिरीक्षक का पद दे दिया गया। अधिवक्ता अनिल सिंह बिसेन प्रोन्नति नहीं पाने वाले एक सिपाही की ओर से याचिका दाखिल की तो हाईकोर्ट ने इस पर सरकार से जवाब तलब कर लिया। इसके बाद डीजीपी ने सर्कुलर जारी किया कि पुलिस विभाग में सहायक उपनिरीक्षक का कोई पद नहीं है, इसलिए प्रोन्नति पाए सिपाही पदावनत होंगे।
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