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पहले कराई पीएचडी और अब नौकरी देने से इनकार

Wed, 18 Apr 2018 01:11 AM IST
Updated Wed, 18 Apr 2018 01:11 AM IST
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पहले कराई पीएचडी और अब नौकरी देने से इनकार
पहले कराई पीएचडी और अब नौकरी देने से इंकार
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0 यूजीसी के उलझाऊ नियमों से हजारों शोधार्थियों का भविष्य अधर में
0 मुक्त विश्वविद्यालय के पीएचडी धारकों ने राज्यपाल को भेजा ज्ञापन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के उलझाऊ नियमों ने हजारों शोधार्थियों का भविष्य संकट में डाल दिया है। यूजीसी के निर्देश पर पहले दूरस्थ शिक्षा के तहत पीएचडी की पढ़ाई कराई गई और जब शिक्षक भर्ती के तहत नौकरी देने की बात आई तो विश्वविद्यालयों और कॉलेजों ने यूजीसी के नियमों का हवाला देकर ऐसे शोधार्थियों को आवेदन से वंचित कर दिया। उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय के पीएचडी धारकों ने राज्यपाल को ज्ञापन देकर मांग की है कि उन्हें भी शिक्षक भर्ती में शामिल होने का मौका दिया जाए।
यूजीसी के निर्देश पर ही वर्ष 2006 में दूरस्थ शिक्षा के तहत पीएचडी की पढ़ाई शुरू कराई गई थी। हजारों की संख्या में छात्रों ने पीएचडी की पढ़ाई पूरी कर ली। इस दौरान ज्यादातर विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षक भर्ती ठप रही और जब शिक्षक भर्ती के लिए आवेदन करने का वक्त आया तो शोधार्थियों को इससे वंचित कर दिया गया। दूरस्थ शिक्षा के तहत शोध पूरा करने वाले छात्रों को इसलिए आवेदन करने से मना कर दिया गया, क्योंकि यूजीसी के निर्देश पर दूरस्थ शिक्षा के तहत वर्ष 2011 में पीएचडी की पढ़ाई समाप्त कर दी गई। साथ ही यह निर्देश जारी कर दिए गए कि विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की शिक्षक भर्ती परीक्षा में ऐसे शोधार्थी शामिल नहीं हो सकेंगे।
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अब शोधार्थी सवाल उठा रहे हैं कि इसमें उनका क्या दोष। शोधार्थियों का कहना है कि अगर यूजीसी के निर्देश पर उन्हें पीएचडी की पढ़ाई करने का मौका दिया तो अब आवेदन से क्यों वंचित किया जा रहा है। एक तरफ मुक्त विश्वविद्यालय ने तमाम बड़ी हस्तियों को मानव उपाधियां बांट रखी हैं, जिनमें खुद राज्यपाल भी शामिल हैं। वहीं, दूसरी ओर दूरस्थ शिक्षा के तहत शोध करने वालों को शिक्षक भर्ती से वंचित किया जा रहा है। मुक्त विश्वविद्यालय से शोध पूरा करने वाले डॉ. सुरेंद्र सिंह यादव, डॉ. संजय मिश्र, डॉ. अरुण सिंह, डॉ. एस. कुमार, डॉ. चंद्रभान मौर्या, डॉ. चंद्रशेखर यादव आदि ने राज्यपाल को ज्ञापन प्रेषित कर मांग की है कि उन्हें भी शिक्षाक भर्ती में शामिल होने का मौका दिया जाए।
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