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सोलह ले माल मंगाना होगा मुश्किल
Updated Sun, 13 Aug 2017 08:31 PM IST
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16 से बाहर से माल मंगाना होगा मुश्किल
0 15 अगस्त की मध्यरात्रि से अनिवार्य होगा ई-वे बिल
0 रजिस्ट्रेशन कराने पर ही जनरेट होगा यह फॉर्म, व्यापारियों में जानकारी का अभाव
0 निर्देश के बावजूद राज्य वस्तु एवं सेवा कर के अफसरों ने नहीं किया प्रचार-प्रसार
0 शनिवार तक इलाहाबाद में मात्र 23, प्रदेश में करीब 2500 ने ही कराया रजिस्ट्रेशन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
व्यापारियों के लिए 16 अगस्त से प्रांत के बाहर से माल मंगाना या भेजना मुश्किल होने जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर व्यापारियों ने माल भेजने और मंगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ई-वे बिल के लिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया है। सरकार ने ई-वे बिल की व्यवस्था 15 अगस्त की मध्य रात्रि तक स्थगित कर दी थी और व्यापारियों को इसके लिए अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराने को कहा था। विभाग को इसके लिए प्रचार-प्रसार का निर्देश दिया गया था, ताकि ज्यादातर व्यापारी रजिस्ट्रेशन करा लें, लेकिन विभाग ने कुछ नहीं किया। नतीजा है कि शनिवार तक इलाहाबाद में मात्र 23 और पूरे प्रदेश में तकरीबन 2500 व्यापारियों ने ही ई-वे बिल के लिए रजिस्ट्रेशन कराया।
वैट में प्रदेश के बाहर से माल मंगाने के लिए आयात घोषणा पत्र (फॉर्म-38) इस्तेमाल होता था। जीएसटी में इसके स्थान पर ऑनलाइन ई-वे बिल 1, 2 और 3 की व्यवस्था की गई। जीएसटी पोर्टल पर ई-वे बिल तभी जनरेट होगा, जब व्यापारी ने रजिस्ट्रेशन कराया होगा। सरकार ने इसे एक अगस्त से अनिवार्य किया था लेकिन व्यापरियों को जानकारी न होने के कारण 15 अगस्त तक स्थगित कर दिया गया। इस बीच राज्य वस्तु एवं सेवा कर (वाणिज्य कर) विभाग के कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने सभी एडीशनल कमिश्नरों को निर्देश दिया कि ई-वे बिल के बारे में वृहद स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए। कमिश्नर ने हर जोन में प्रतिदिन कम से कम 20 व्यापारियों को जीएसटी का प्रशिक्षण देने को भी कहा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोज संतोष पनामा का कहना है कि ज्यादातर व्यापारियों को ई-वे बिल की जानकारी ही नहीं है। इसकी वजह से व्यापारियों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। अब 15 अगस्त की मध्यरात्रि से ई-वे बिल अनिवार्य होने जा रहा है। ऐसे में बाहर से माल मंगाना मुश्किल हो जाए।
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दूसरे प्रदेशों से आता है ज्यादातर माल
इलाहाबाद। इलाहाबाद में ज्यादातर माल दिल्ली, पंजाब, कोलकाता, तमिलानाडू, कर्नाटक से आता है और अब त्योहारी सीजन शुरू होने जा रहा है। इस बीच बड़ी मात्रा में माल का आर्डर दिया गया है। प्रचार-प्रसार के अभाव में व्यापारियों ने ई-वे बिल के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया और अब 16 अगस्त से माल कैसे आएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। व्यापारियों को जानकारी होती तो वे शायद ई-वे बिल डाउनलोड कर माल यहां पहुंचने के पहले संबंधित प्रदेश के व्यापारी को भेज भी देते लेकिन अब समस्या खड़ी होना तय है। विभाग के अफसर इस बारे में कुछ नहीं बोल रहे।
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लिंक नहीं हो रहा फॉर्म-3बी
इलाहाबाद। जीएसटी में रिटर्न दाखिल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में फॉर्म-3बी अपलोड तो कर दिया लेकिन व्यापारी अब रिटर्न भरने के लिए उसे खोलना चाह रहे हैं तो पता चल रहा है कि वह जीएसटी से लिंक नहीं है। इसकी वजह से व्यापारी अब तक रिटर्न नहीं दाखिल कर सके हैं। फॉर्म-3बी में रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 20 अगस्त है। अब इसमें एक सप्ताह का समय शेष हैं सो व्यापारियों की चिंता भी बढ़ गई है।
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0 15 अगस्त की मध्यरात्रि से अनिवार्य होगा ई-वे बिल
0 रजिस्ट्रेशन कराने पर ही जनरेट होगा यह फॉर्म, व्यापारियों में जानकारी का अभाव
0 निर्देश के बावजूद राज्य वस्तु एवं सेवा कर के अफसरों ने नहीं किया प्रचार-प्रसार
0 शनिवार तक इलाहाबाद में मात्र 23, प्रदेश में करीब 2500 ने ही कराया रजिस्ट्रेशन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
व्यापारियों के लिए 16 अगस्त से प्रांत के बाहर से माल मंगाना या भेजना मुश्किल होने जा रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि ज्यादातर व्यापारियों ने माल भेजने और मंगाने के लिए इस्तेमाल होने वाले ई-वे बिल के लिए जीएसटी में रजिस्ट्रेशन ही नहीं कराया है। सरकार ने ई-वे बिल की व्यवस्था 15 अगस्त की मध्य रात्रि तक स्थगित कर दी थी और व्यापारियों को इसके लिए अनिवार्य रूप से रजिस्ट्रेशन कराने को कहा था। विभाग को इसके लिए प्रचार-प्रसार का निर्देश दिया गया था, ताकि ज्यादातर व्यापारी रजिस्ट्रेशन करा लें, लेकिन विभाग ने कुछ नहीं किया। नतीजा है कि शनिवार तक इलाहाबाद में मात्र 23 और पूरे प्रदेश में तकरीबन 2500 व्यापारियों ने ही ई-वे बिल के लिए रजिस्ट्रेशन कराया।
वैट में प्रदेश के बाहर से माल मंगाने के लिए आयात घोषणा पत्र (फॉर्म-38) इस्तेमाल होता था। जीएसटी में इसके स्थान पर ऑनलाइन ई-वे बिल 1, 2 और 3 की व्यवस्था की गई। जीएसटी पोर्टल पर ई-वे बिल तभी जनरेट होगा, जब व्यापारी ने रजिस्ट्रेशन कराया होगा। सरकार ने इसे एक अगस्त से अनिवार्य किया था लेकिन व्यापरियों को जानकारी न होने के कारण 15 अगस्त तक स्थगित कर दिया गया। इस बीच राज्य वस्तु एवं सेवा कर (वाणिज्य कर) विभाग के कमिश्नर मुकेश कुमार मेश्राम ने सभी एडीशनल कमिश्नरों को निर्देश दिया कि ई-वे बिल के बारे में वृहद स्तर पर प्रचार-प्रसार किया जाए। कमिश्नर ने हर जोन में प्रतिदिन कम से कम 20 व्यापारियों को जीएसटी का प्रशिक्षण देने को भी कहा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ। उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार कल्याण समिति के संयोज संतोष पनामा का कहना है कि ज्यादातर व्यापारियों को ई-वे बिल की जानकारी ही नहीं है। इसकी वजह से व्यापारियों ने रजिस्ट्रेशन नहीं कराया। अब 15 अगस्त की मध्यरात्रि से ई-वे बिल अनिवार्य होने जा रहा है। ऐसे में बाहर से माल मंगाना मुश्किल हो जाए।
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दूसरे प्रदेशों से आता है ज्यादातर माल
इलाहाबाद। इलाहाबाद में ज्यादातर माल दिल्ली, पंजाब, कोलकाता, तमिलानाडू, कर्नाटक से आता है और अब त्योहारी सीजन शुरू होने जा रहा है। इस बीच बड़ी मात्रा में माल का आर्डर दिया गया है। प्रचार-प्रसार के अभाव में व्यापारियों ने ई-वे बिल के लिए रजिस्ट्रेशन नहीं कराया और अब 16 अगस्त से माल कैसे आएगा, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। व्यापारियों को जानकारी होती तो वे शायद ई-वे बिल डाउनलोड कर माल यहां पहुंचने के पहले संबंधित प्रदेश के व्यापारी को भेज भी देते लेकिन अब समस्या खड़ी होना तय है। विभाग के अफसर इस बारे में कुछ नहीं बोल रहे।
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लिंक नहीं हो रहा फॉर्म-3बी
इलाहाबाद। जीएसटी में रिटर्न दाखिल करने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में फॉर्म-3बी अपलोड तो कर दिया लेकिन व्यापारी अब रिटर्न भरने के लिए उसे खोलना चाह रहे हैं तो पता चल रहा है कि वह जीएसटी से लिंक नहीं है। इसकी वजह से व्यापारी अब तक रिटर्न नहीं दाखिल कर सके हैं। फॉर्म-3बी में रिटर्न दाखिल करने की आखिरी तारीख 20 अगस्त है। अब इसमें एक सप्ताह का समय शेष हैं सो व्यापारियों की चिंता भी बढ़ गई है।