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चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी के अफसरों की गिरफ्तारी पर रोक
Updated Mon, 12 Jun 2017 09:03 PM IST
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चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी के अफसरों की गिरफ्तारी पर रोक
0 कर्ज की किश्त न मिलने पर जब्त कर बेच दिया वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने आगरा के सिंकदरा स्थित चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी के वित्त अधिकारी आशीष कुमार शर्मा और एरिया मैनेजर प्रतीक मिश्र की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इनके खिलाफ एक वाहन की जब्ती को लेकर आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से छह सप्ताह में इस मामले में जवाब मांगा है। याचीगण पर आरोप है कि उन्होंने टाटा कंपनी की मार्कोपोलो बस देवेश कुमार को फाइनेंस की थी। इसकी किश्त समय पर न चुकाने पर बस जब्त कर बेच दी गई।
देवेश कुमार ने इसकी प्राथमिकी आगरा के सिंकदरा थाने में दर्ज करा दी। प्राथमिकी को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई। याचिका पर न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा सुनवाई कर रहे है। याची के अधिवक्ता प्रांजन मेहरोत्रा का कहना था कि लोन की शर्तों में यह भी शर्त शामिल थी कि यदि किश्त का भुगतान समय से नहीं होता है तो कंपनी फाइनेंस किया गया वाहन अपने कब्जे में ले लेगी। देवेश ने किश्तों का भुगतान समय रहते नहीं किया। कंपनी ने बस अपने कब्जे में लेकर 30 सितंबर 2013 को बेच दिया। इसके खिलाफ 17 अप्रैल 2013 को प्राथमिकी दर्ज कराई। याचीगण का कहना था कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया। सभी कार्य नियमानुसार किए गए हैं।
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0 कर्ज की किश्त न मिलने पर जब्त कर बेच दिया वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने आगरा के सिंकदरा स्थित चोलामंडलम फाइनेंस कंपनी के वित्त अधिकारी आशीष कुमार शर्मा और एरिया मैनेजर प्रतीक मिश्र की गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। इनके खिलाफ एक वाहन की जब्ती को लेकर आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया गया है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार से छह सप्ताह में इस मामले में जवाब मांगा है। याचीगण पर आरोप है कि उन्होंने टाटा कंपनी की मार्कोपोलो बस देवेश कुमार को फाइनेंस की थी। इसकी किश्त समय पर न चुकाने पर बस जब्त कर बेच दी गई।
देवेश कुमार ने इसकी प्राथमिकी आगरा के सिंकदरा थाने में दर्ज करा दी। प्राथमिकी को हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर चुनौती दी गई। याचिका पर न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा सुनवाई कर रहे है। याची के अधिवक्ता प्रांजन मेहरोत्रा का कहना था कि लोन की शर्तों में यह भी शर्त शामिल थी कि यदि किश्त का भुगतान समय से नहीं होता है तो कंपनी फाइनेंस किया गया वाहन अपने कब्जे में ले लेगी। देवेश ने किश्तों का भुगतान समय रहते नहीं किया। कंपनी ने बस अपने कब्जे में लेकर 30 सितंबर 2013 को बेच दिया। इसके खिलाफ 17 अप्रैल 2013 को प्राथमिकी दर्ज कराई। याचीगण का कहना था कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया। सभी कार्य नियमानुसार किए गए हैं।
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