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प्रसून... ------
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कुंभ
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मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं से बातचीत.....फोटो के साथ।
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हिया आके जी जुड़ा गया
शंकरगढ़ से अपनी नातिनी डा. दीपिका के साथ कुंभ मेले में संक्रांति का स्नान करने पहुंचीं 65 वर्ष की कमला कली बड़ी मुश्किल से चल पा रही थीं। हाथ में छड़ी लेकर अपनी नातिनी का सहारा लेकर वह धीरे-धीरे पैदल आगे बढ़ रही थीं। उन्हें देखकर हर कोई यह सोच रहा था कि ऐसी हालत में वह तीन किलोमीटर तक का पैदल रास्ता कैसे पूरा कर पाएंगी। जब उनसे पूछा कि उन्हें यहां कैसा लग रहा है तो उन्होंने तपाक से कहा, जी जुड़ा गया बेटा। बहुत सुख मिल रहा है। यह कहते हुए वह तनकर खड़ी हो गईं। एक पल को तो ऐसे लगा जैसे उनका पांव बिल्कुल ठीक हो गए। उनकी नातिनी डा. दीपिका ने बताया कि वह यहां डफरिन हास्पिटल में पोस्टेड हैं। दादी शंकरगढ़ से आई हैं। उन्हें कुंभ क्षेत्र में आने की इतनी जल्दी थी कि वे सुबह से ही रट लगाए थीं।
ये तो अलग ही दुनिया दिख रही बाबू
बीकानेर राजस्थान से पहली बार कुंभ स्नान के लिए यहां आए मालाराम मेले में पहुंचे तो कुछ देर के लिए आश्वर्यचकित होकर चारों तरफ देखते ही रहे। उन्होंने सिर पर बंधी राजस्थानी पगड़ी को थोड़ा और सही किया फिर अचंभे से बोले, ये तो अलग ही दुनिया दिख रही बाबू। मालाराम ने बताया कि वह करीब तीन किलोमीटर से पैदल चलकर आए हैं, पहली बार ऐसा लग रहा है कि उन्हें जितनी थकान होनी चाहिए, उतनी महसूस नहीं हो रही है। बताया कि उनके साथ कई और लोग भी आए हैं, सभी अलग-अलग शिविरों में रुके हैं।
यहां आकर शुगर, ब्लड प्रेशर भी ठीक हो गया
कानपुर से कुंभ क्षेत्र के सेेक्टर 14 स्थित अखंड परमधाम के शिविर में कल्पवास करने आए रामरूप सिंह सेंगर का कहना है कि संगम की रेती पर संतों के बीच रहने का आनंद निराला है। बताया कि उन्हें शुगर और ब्लड प्रेशर की बीमारी है लेकिन यहां आकर वह पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से गंगा स्थान के साथ भजन-पूजन से पूरी दिनचर्या ही बदल गई है। रोजाना नए-नए लोगों से मिलने का अलग ही आनंद है। गुुरुजी के प्रवचन और अखाड़ों का दूश्य देखकर लगता है कि हम कितने विशाल देश में रहते हैं।
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मेले में पहुंचे श्रद्धालुओं से बातचीत.....फोटो के साथ।
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हिया आके जी जुड़ा गया
शंकरगढ़ से अपनी नातिनी डा. दीपिका के साथ कुंभ मेले में संक्रांति का स्नान करने पहुंचीं 65 वर्ष की कमला कली बड़ी मुश्किल से चल पा रही थीं। हाथ में छड़ी लेकर अपनी नातिनी का सहारा लेकर वह धीरे-धीरे पैदल आगे बढ़ रही थीं। उन्हें देखकर हर कोई यह सोच रहा था कि ऐसी हालत में वह तीन किलोमीटर तक का पैदल रास्ता कैसे पूरा कर पाएंगी। जब उनसे पूछा कि उन्हें यहां कैसा लग रहा है तो उन्होंने तपाक से कहा, जी जुड़ा गया बेटा। बहुत सुख मिल रहा है। यह कहते हुए वह तनकर खड़ी हो गईं। एक पल को तो ऐसे लगा जैसे उनका पांव बिल्कुल ठीक हो गए। उनकी नातिनी डा. दीपिका ने बताया कि वह यहां डफरिन हास्पिटल में पोस्टेड हैं। दादी शंकरगढ़ से आई हैं। उन्हें कुंभ क्षेत्र में आने की इतनी जल्दी थी कि वे सुबह से ही रट लगाए थीं।
ये तो अलग ही दुनिया दिख रही बाबू
बीकानेर राजस्थान से पहली बार कुंभ स्नान के लिए यहां आए मालाराम मेले में पहुंचे तो कुछ देर के लिए आश्वर्यचकित होकर चारों तरफ देखते ही रहे। उन्होंने सिर पर बंधी राजस्थानी पगड़ी को थोड़ा और सही किया फिर अचंभे से बोले, ये तो अलग ही दुनिया दिख रही बाबू। मालाराम ने बताया कि वह करीब तीन किलोमीटर से पैदल चलकर आए हैं, पहली बार ऐसा लग रहा है कि उन्हें जितनी थकान होनी चाहिए, उतनी महसूस नहीं हो रही है। बताया कि उनके साथ कई और लोग भी आए हैं, सभी अलग-अलग शिविरों में रुके हैं।
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यहां आकर शुगर, ब्लड प्रेशर भी ठीक हो गया
कानपुर से कुंभ क्षेत्र के सेेक्टर 14 स्थित अखंड परमधाम के शिविर में कल्पवास करने आए रामरूप सिंह सेंगर का कहना है कि संगम की रेती पर संतों के बीच रहने का आनंद निराला है। बताया कि उन्हें शुगर और ब्लड प्रेशर की बीमारी है लेकिन यहां आकर वह पूरी तरह से स्वस्थ महसूस कर रहे हैं। पिछले कई दिनों से गंगा स्थान के साथ भजन-पूजन से पूरी दिनचर्या ही बदल गई है। रोजाना नए-नए लोगों से मिलने का अलग ही आनंद है। गुुरुजी के प्रवचन और अखाड़ों का दूश्य देखकर लगता है कि हम कितने विशाल देश में रहते हैं।
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