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पुनर्मूल्यांकन दो माह में पूरा करने का आदेश
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सहायक अध्यापक भर्ती 2018
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पुनर्मूल्यांकन दो माह पूरा करने का आदेश
0 समय से पुनर्मूल्यांकन पूरा नहीं तो बचे पद अगली भर्ती में नहीं किए जाएंगे शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने हाईकोर्ट में आश्वासन दिया है कि दो माह में सहायक अध्यापक भर्ती 2018 की कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। यदि पुनर्मूल्यांकन पूरा नहीं हुआ तो बचे हुए पदों अगली भर्ती में शामिल नहीं किया जाएगा। पुनर्मूल्यांकन के बाद योग्य अभ्यर्थियों की उन पर नियुक्तियां की जाएंगी।
परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव ने यह आश्वासन रावेन्द्र सिंह की याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। न्यायमूर्ति अजित कुमार ने याचिका निस्तारित करते हुए सचिव को अनिरुद्ध नारायण शुक्ल की याचिका पर पारित आदेश के अनुसार याची के मामले में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। याची का कहना था कि उसे स्कैन कॉपी नहीं दी गई। उसे सही जवाब देने के बावजूद अंक नहीं दिए गए हैं। इसलिए पांच अक्तूबर 2018 के शासनादेश के तहत उसकी कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। कोर्ट ने कहा कि कई याचियों ने याचिकाएं लंबित रहने के कारण समय रहते पुनर्मूल्यांकन की अर्जी नहीं दी। ऐसे में उनको भी मौका दिया गया है ।
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पुनर्मूल्यांकन दो माह पूरा करने का आदेश
0 समय से पुनर्मूल्यांकन पूरा नहीं तो बचे पद अगली भर्ती में नहीं किए जाएंगे शामिल
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। सचिव परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने हाईकोर्ट में आश्वासन दिया है कि दो माह में सहायक अध्यापक भर्ती 2018 की कॉपियों के पुनर्मूल्यांकन का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। यदि पुनर्मूल्यांकन पूरा नहीं हुआ तो बचे हुए पदों अगली भर्ती में शामिल नहीं किया जाएगा। पुनर्मूल्यांकन के बाद योग्य अभ्यर्थियों की उन पर नियुक्तियां की जाएंगी।
परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सचिव ने यह आश्वासन रावेन्द्र सिंह की याचिका की सुनवाई के दौरान दिया। न्यायमूर्ति अजित कुमार ने याचिका निस्तारित करते हुए सचिव को अनिरुद्ध नारायण शुक्ल की याचिका पर पारित आदेश के अनुसार याची के मामले में निर्णय लेने का निर्देश दिया है। याची का कहना था कि उसे स्कैन कॉपी नहीं दी गई। उसे सही जवाब देने के बावजूद अंक नहीं दिए गए हैं। इसलिए पांच अक्तूबर 2018 के शासनादेश के तहत उसकी कॉपियों का पुनर्मूल्यांकन किया जाए। कोर्ट ने कहा कि कई याचियों ने याचिकाएं लंबित रहने के कारण समय रहते पुनर्मूल्यांकन की अर्जी नहीं दी। ऐसे में उनको भी मौका दिया गया है ।
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