{"_id":"59baaab34f1c1b1e688b4880","slug":"141505405619-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
विश्वविद्यालय और महाविद्यालयों में हिंदी दिवस पर कार्यक्रम
Updated Thu, 14 Sep 2017 09:43 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हिंदी में पचास बोलियों का संगम
- इविवि में हिंदी पखवाड़ा के दौरान बताया गया भाषा का महत्व
इलाहाबाद। हिंदी हमारे देश की आत्मा है। इस भाषा में 50 बोलियों का संगम है। यह दरिया की तरह है। आज के दौर में हिंदी को खतरा बाहर से कम, भीतर से अधिक है। इसे हिंदी भाषियों को समझना होगा। हमें अपनी साझी विरासत की रक्षा करनी होगी। यह विचार इविवि के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने बृहस्पतिवार को राजभाषा कार्यान्वयन समिति की ओर से आयोजित कार्यशाला में व्यक्त किए।
‘मीडिया और हिंदी’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि हिंदी हमारी आजादी की लड़ाई है। हिंदी को राष्ट्र निर्माण की लड़ाई से जोड़ने का दायित्व मीडिया का है। प्रो. मुश्ताक अली ने 1990 के पूर्व और उसके बाद हुए परिवर्तनों की पृष्ठभूमि में हिंदी फिल्मी गीतों में अंग्रेजी और अंग्रेजियत के बढ़ते प्रभाव और उसके दुष्परिणाम पर प्रकाश डाला। मीडिया स्टडीज सेंटर के शिक्षक डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि हिंदी के शब्द, संपदा बेहद समृद्ध हैं। इस मौके पर डॉ. भूरे लाल, डॉ. सूर्य नारायण, अरिओम कुमार, प्रो. एचएस उपाध्याय, प्रो. बीएन सिंह, प्रो. रामसेवक दुबे, प्रो. अनीता गोपेश, प्रो. हर्ष कुमार मौजूद रहे। उधर, हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी विभाग की ओर से इविवि के नॉर्थ हाल में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि बीएचयू के फार्मेसी विभाग के आचार्य प्रो. शंकर वी. तत्ववादी ने बताय कि किस तरह स्वामी विवेकानंद ने शिकागो व्याख्यान में भारती परचल लहराया था। कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सोमेश्वर भारद्वाज ने बताया कि पांच हजार साल पहले ही भारतीय संस्कृति में विज्ञान की उत्पत्ति हो गई थी। उन्होंने बताया कि किस तरह डॉ. मातापुर कर ने महाभारत ग्रंथ में ऋषि वेदव्यास के द्वारा गांधारी के 100 पुत्रों की उत्पत्ति से प्रेरणा लेकर क्लोनिंग का अविष्कार किया। संगोष्ठी की अध्यक्ष कुलपति ने की। इस मौके पर डॉ. विजय कुमार, डॉ. आनंद पांडेय, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. शशिकांत शुक्ल आदि मौजूद रहे।
त्रिभाषा फार्मूले के अनुसरण पर जोर
इलाहाबाद। अगर हम देश में हिंदी का अधिकाधिक विस्तार एवं लोकप्रियता चाहते हैं तो त्रिभाषा फार्मूले का अनुसरण करना होगा। यह विचार इविवि के पूर्व कुलपति प्रो. आरपी मिश्र ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित विचार गोष्ठी में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में हिंदी एक विषय के रूप में पढ़ाई जाती है। उत्तरी भारत के प्रदेशों, खासतौर पर हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी माध्यमिक शिक्ष स्तर पर पढ़ाई जाने वाली भाषाओं में दक्षिण की तमिल, तेलगू, कन्नड़ एवं मलयालयम में किसी को सीखना अनिवार्य किया जाना चाहिए। विचार गोष्ठी का संचालन डॉ. रामजी मिश्र ने किया। इस मौके पर डॉ. ओमजी गुप्ता, डॉ. आरपीएस यादव, डॉ. रुचि बाजपेयी, डॉ. विनोद कुमार गुप्ता, डॉ. राजेश पांडैय, डॉ. पीपी दुबे, प्रो. पीके पांडेय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
प्रचलन, प्रयोग से ही लोकप्रिय होगी हिंदी
इलाहाबाद। मातृभाषा के रूप में प्रचलन और प्रयोग सये ही हिंदी को लोकप्रिय भाषा बनाया जा सकता है। यह विचार नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय के जमुनीपुर परिसर में बृहस्पतिवार हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में कुलपति प्रो. लल्लनजी सिंह ने व्यक्त किए। ‘राष्ट्रीय एकता में हिंदी की भूमिका’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि हिंदी को कामकाज की भाषा बनाने के लिए तकनीक से जोड़ना जरूरी है। मुख्य अतिथि इविवि के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम किशोर शर्मा ने कहा कि हिंदी हृदय को जोड़ने वाली वाली भाषा है। संगोष्ठी में डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र, डॉ. रेनू आनंद, डॉ. संजय पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत डॉ. आशीष मिश्र एवं विषय प्रवर्तन डॉ. एचए सिंह ने किया।
विज्ञापन
- इविवि में हिंदी पखवाड़ा के दौरान बताया गया भाषा का महत्व
इलाहाबाद। हिंदी हमारे देश की आत्मा है। इस भाषा में 50 बोलियों का संगम है। यह दरिया की तरह है। आज के दौर में हिंदी को खतरा बाहर से कम, भीतर से अधिक है। इसे हिंदी भाषियों को समझना होगा। हमें अपनी साझी विरासत की रक्षा करनी होगी। यह विचार इविवि के कुलपति प्रो. रतन लाल हांगलू ने बृहस्पतिवार को राजभाषा कार्यान्वयन समिति की ओर से आयोजित कार्यशाला में व्यक्त किए।
‘मीडिया और हिंदी’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में मुख्य वक्ता प्रो. संतोष भदौरिया ने कहा कि हिंदी हमारी आजादी की लड़ाई है। हिंदी को राष्ट्र निर्माण की लड़ाई से जोड़ने का दायित्व मीडिया का है। प्रो. मुश्ताक अली ने 1990 के पूर्व और उसके बाद हुए परिवर्तनों की पृष्ठभूमि में हिंदी फिल्मी गीतों में अंग्रेजी और अंग्रेजियत के बढ़ते प्रभाव और उसके दुष्परिणाम पर प्रकाश डाला। मीडिया स्टडीज सेंटर के शिक्षक डॉ. धनंजय चोपड़ा ने कहा कि हिंदी के शब्द, संपदा बेहद समृद्ध हैं। इस मौके पर डॉ. भूरे लाल, डॉ. सूर्य नारायण, अरिओम कुमार, प्रो. एचएस उपाध्याय, प्रो. बीएन सिंह, प्रो. रामसेवक दुबे, प्रो. अनीता गोपेश, प्रो. हर्ष कुमार मौजूद रहे। उधर, हिंदी दिवस के मौके पर हिंदी विभाग की ओर से इविवि के नॉर्थ हाल में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। मुख्य अतिथि बीएचयू के फार्मेसी विभाग के आचार्य प्रो. शंकर वी. तत्ववादी ने बताय कि किस तरह स्वामी विवेकानंद ने शिकागो व्याख्यान में भारती परचल लहराया था। कैंसर रिसर्च इंस्टीट्यूट के पूर्व वैज्ञानिक डॉ. सोमेश्वर भारद्वाज ने बताया कि पांच हजार साल पहले ही भारतीय संस्कृति में विज्ञान की उत्पत्ति हो गई थी। उन्होंने बताया कि किस तरह डॉ. मातापुर कर ने महाभारत ग्रंथ में ऋषि वेदव्यास के द्वारा गांधारी के 100 पुत्रों की उत्पत्ति से प्रेरणा लेकर क्लोनिंग का अविष्कार किया। संगोष्ठी की अध्यक्ष कुलपति ने की। इस मौके पर डॉ. विजय कुमार, डॉ. आनंद पांडेय, डॉ. राजेश कुमार, डॉ. शशिकांत शुक्ल आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
त्रिभाषा फार्मूले के अनुसरण पर जोर
इलाहाबाद। अगर हम देश में हिंदी का अधिकाधिक विस्तार एवं लोकप्रियता चाहते हैं तो त्रिभाषा फार्मूले का अनुसरण करना होगा। यह विचार इविवि के पूर्व कुलपति प्रो. आरपी मिश्र ने बृहस्पतिवार को उत्तर प्रदेश राजर्षि टंडन मुक्त विश्वविद्यालय में आयोजित विचार गोष्ठी में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में हिंदी एक विषय के रूप में पढ़ाई जाती है। उत्तरी भारत के प्रदेशों, खासतौर पर हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी माध्यमिक शिक्ष स्तर पर पढ़ाई जाने वाली भाषाओं में दक्षिण की तमिल, तेलगू, कन्नड़ एवं मलयालयम में किसी को सीखना अनिवार्य किया जाना चाहिए। विचार गोष्ठी का संचालन डॉ. रामजी मिश्र ने किया। इस मौके पर डॉ. ओमजी गुप्ता, डॉ. आरपीएस यादव, डॉ. रुचि बाजपेयी, डॉ. विनोद कुमार गुप्ता, डॉ. राजेश पांडैय, डॉ. पीपी दुबे, प्रो. पीके पांडेय आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन
प्रचलन, प्रयोग से ही लोकप्रिय होगी हिंदी
इलाहाबाद। मातृभाषा के रूप में प्रचलन और प्रयोग सये ही हिंदी को लोकप्रिय भाषा बनाया जा सकता है। यह विचार नेहरू ग्राम भारती विश्वविद्यालय के जमुनीपुर परिसर में बृहस्पतिवार हिंदी दिवस पर आयोजित संगोष्ठी में कुलपति प्रो. लल्लनजी सिंह ने व्यक्त किए। ‘राष्ट्रीय एकता में हिंदी की भूमिका’ विषय पर आयोजित संगोष्ठी में उन्होंने कहा कि हिंदी को कामकाज की भाषा बनाने के लिए तकनीक से जोड़ना जरूरी है। मुख्य अतिथि इविवि के हिंदी विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. राम किशोर शर्मा ने कहा कि हिंदी हृदय को जोड़ने वाली वाली भाषा है। संगोष्ठी में डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र, डॉ. रेनू आनंद, डॉ. संजय पांडेय ने भी अपने विचार व्यक्त किए। अतिथियों का स्वागत डॉ. आशीष मिश्र एवं विषय प्रवर्तन डॉ. एचए सिंह ने किया।