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नकल मंडी वाले जिले टॉप, सख्ती काम नहीं आई
Updated Fri, 09 Jun 2017 09:31 PM IST
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नकलमंडी वाले जिले टॉप, सख्ती काम नहीं आई
- नकल माफियाओं वाले जिले हाईस्कूल-इंटरमीडिएट रहे टॉप
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। यूपी बोर्ड की ओर से परीक्षा में नकल रोकने के लिए शासन और कोर्ट की सख्ती का असर होता दिखाई नहीं पड़ा। नकलमंडी के रूप में कुख्यात गाजीपुर, हरदोई, बलिया, बदायूं जैसे जिले जहां हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के परिणाम में टॉप टेन में रहे। बोर्ड की ओर से परीक्षा के दौरान कुछ जिलों में तो सख्ती बरती गई परंतु कुछ में नकल माफिया का कब्जा रहा। इस कारण से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के परिणाम में काफी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। इस बार इंटरमीडिएट के परिणाम में 5.37 फीसदी की गिरावट तो हाईस्कूल में 6.48 फीसदी की गिरावट आई है।
नकल के गढ़ कहे जाने वाले जिले ललितपुर, एटा, मिर्जाप़ुर, बांदा, चित्रकूट, गोण्डा हाईस्कूल के परिणाम में अंतिम पायदान पर पहुंच गए हैं। बोर्ड की ओर से की गई सख्ती का असर रहा कि इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा परिणाम आगे नहीं बढ़ सका। इससे इंटरमीडिएट में गिरावट जबकि हाईस्कूल का परिणाम भी कम हो गया। जिन जिलों से अधिक फर्जी परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, पूरी परीक्षा के दौरान नकल का बोलबाला रहा, वहां के नतीजे सामान्य रहे। नकलमंडी के लिए बदनाम जिले प्रदेश की लिस्ट में फिसड्डी साबित हुए। परीक्षा में काफी बदनाम रहा गाजीपुर जिला अबकी बार हाईस्कूल के परिणाम में सातवें स्थान पर पहुंच गया है।
फर्जी छात्रों को परीक्षा से रोकने में नाकाम माध्यमिक शिक्षा विभाग ने नकलमाफिया का जाल तोड़ने के लिए मूल्यांकन का डंडा चलाया। सूत्रों की माने तो बदनाम जिले जहां बड़े पैमाने पर फर्जी दाखिले और नकल की शिकायत थी, वहां के लिए ‘विशेष मूल्यांकन’ का फार्मूला अपनाया गया। जिन स्कूलों के बारे में बोर्ड के पास शिकायत थी, वहां पांच से दस कापियों के जवाब एक जैसे दिखे तो कॉमन मार्किंग करा दी गई। नतीजा रहा कि गोंडा, एटा, मिर्जापुर, कासगंज, मऊ, मुरादाबाद, कौशाम्बी जैसे बदनाम जिले जहां नकल माफिया ने पूरी कापियां लिखवाईं, वहां के नतीजे काफी खराब रहे। इस बार जबकि बोर्ड ने दिल खोलकर नंबर लुटाए, नकलमंडी के रूप में कुख्यात जिले प्रदेश में सबसे निचले पायदान पर रहे।
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- नकल माफियाओं वाले जिले हाईस्कूल-इंटरमीडिएट रहे टॉप
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। यूपी बोर्ड की ओर से परीक्षा में नकल रोकने के लिए शासन और कोर्ट की सख्ती का असर होता दिखाई नहीं पड़ा। नकलमंडी के रूप में कुख्यात गाजीपुर, हरदोई, बलिया, बदायूं जैसे जिले जहां हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के परिणाम में टॉप टेन में रहे। बोर्ड की ओर से परीक्षा के दौरान कुछ जिलों में तो सख्ती बरती गई परंतु कुछ में नकल माफिया का कब्जा रहा। इस कारण से हाईस्कूल एवं इंटरमीडिएट के परिणाम में काफी उतार-चढ़ाव दर्ज किया गया। इस बार इंटरमीडिएट के परिणाम में 5.37 फीसदी की गिरावट तो हाईस्कूल में 6.48 फीसदी की गिरावट आई है।
नकल के गढ़ कहे जाने वाले जिले ललितपुर, एटा, मिर्जाप़ुर, बांदा, चित्रकूट, गोण्डा हाईस्कूल के परिणाम में अंतिम पायदान पर पहुंच गए हैं। बोर्ड की ओर से की गई सख्ती का असर रहा कि इस बार पिछले वर्ष की अपेक्षा परिणाम आगे नहीं बढ़ सका। इससे इंटरमीडिएट में गिरावट जबकि हाईस्कूल का परिणाम भी कम हो गया। जिन जिलों से अधिक फर्जी परीक्षार्थी परीक्षा में शामिल हुए, पूरी परीक्षा के दौरान नकल का बोलबाला रहा, वहां के नतीजे सामान्य रहे। नकलमंडी के लिए बदनाम जिले प्रदेश की लिस्ट में फिसड्डी साबित हुए। परीक्षा में काफी बदनाम रहा गाजीपुर जिला अबकी बार हाईस्कूल के परिणाम में सातवें स्थान पर पहुंच गया है।
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फर्जी छात्रों को परीक्षा से रोकने में नाकाम माध्यमिक शिक्षा विभाग ने नकलमाफिया का जाल तोड़ने के लिए मूल्यांकन का डंडा चलाया। सूत्रों की माने तो बदनाम जिले जहां बड़े पैमाने पर फर्जी दाखिले और नकल की शिकायत थी, वहां के लिए ‘विशेष मूल्यांकन’ का फार्मूला अपनाया गया। जिन स्कूलों के बारे में बोर्ड के पास शिकायत थी, वहां पांच से दस कापियों के जवाब एक जैसे दिखे तो कॉमन मार्किंग करा दी गई। नतीजा रहा कि गोंडा, एटा, मिर्जापुर, कासगंज, मऊ, मुरादाबाद, कौशाम्बी जैसे बदनाम जिले जहां नकल माफिया ने पूरी कापियां लिखवाईं, वहां के नतीजे काफी खराब रहे। इस बार जबकि बोर्ड ने दिल खोलकर नंबर लुटाए, नकलमंडी के रूप में कुख्यात जिले प्रदेश में सबसे निचले पायदान पर रहे।
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