Prayagraj : 17 साल में बढ़ गए 14 लाख मतदाता, एसआईआर में होगा हिसाब
जिले में 17 वर्षों के दौरान तकरीबन 14 लाख मतदाता बढ़ गए। अब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत एक-एक वोटर का हिसाब होगा। जिला निर्वाचन कार्यालय में इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। वर्षों से अलमारी में बंद पड़ी 2003 की मतदाता सूची निकाली जा रही है।
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जिले में 17 वर्षों के दौरान तकरीबन 14 लाख मतदाता बढ़ गए। अब विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के तहत एक-एक वोटर का हिसाब होगा। जिला निर्वाचन कार्यालय में इसकी तैयारी शुरू कर दी गई है। वर्षों से अलमारी में बंद पड़ी 2003 की मतदाता सूची निकाली जा रही है।
इससे पहले 2003 में विशेष गहन पुनरीक्षण किया था और उसी आधार पर 2007 के विधानसभा चुनाव हुए थे। तब जिले के 11 विधानसभा क्षेत्रों में मतदाताओं की संख्या 32 लाख 68 हजार 721 थी। 2024 के लोकसभा चुनाव में प्रयागराज के 12 विधानसभा क्षेत्रों में कुल 46 लाख 64 हजार 519 मतदाता थे। ऐसे में पिछले एसआईआर से लेकर अब तक 14 लाख मतदाता बढ़े हैं।
2003 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद वोटर लिस्ट में नाम जोड़ने और काटने की प्रक्रिया लगातार चलती रही लेकिन 2003 के बाद विशेष गहन पुनरीक्षण नहीं हुआ। बिहार के बाद अब देशभर में एसआईआर की शुरुआत होने वाली है। इस प्रक्रिया के तहत घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन किया जाएगा और वोटरों से उनका पहचान पत्र भी लिया जाएगा।
पहचान पत्र देने से उन मतदाताओं को छूट रहेगी जो 2003 के एसआईआर के तहत वोटर लिस्ट में शामिल थे और अब भी उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल हैं। एसआरआई से यह भी पता चल जाएगा कि ऐसे कितने मतदाता हैं जो पिछले एसआईआर के दौरान वोटर लिस्ट में शामिल थे और अब जीवित नहीं हैं लेकिन उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल हैं।
वहीं, बड़ी संख्या ऐसे मतदाताओं की भी है जिनके नाम दो से तीन विधानसभा क्षेत्रों में दर्ज हैं। एसआईआर के दौरान ऐसे बोगस वोटरों के नाम भी सामने आ जाएंगे। ऐसे में फर्जी वोटिंग पर काफी हद तक लगाम लग सकेगी। साथ ही मतदान प्रतिशत में भी सुधार होगा। दरअसर, बड़ी संख्या ऐसे वोटरों की है जो अब जीवित नहीं हैं लेकिन उनके नाम वोटर लिस्ट में शामिल हैं और मतदाता प्रतिशत प्रभावित होने के पीछे यह बड़ी वजह है।
देने होंगे स्वप्रमाणित दस्तावेज
2003 के विशेष गहन पुनरीक्षण के बाद वोटर लिस्ट में जो भी नए नाम शामिल किए गए हैं, उन्हें अपनी पहचान के लिए स्वप्रमाणित दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। वोटर लिस्ट में ऐसे मतदाताओं की संख्या 60 से 70 फीसदी हो सकती है। दस्तावेज प्रस्तुत न करने पर उनके नाम काटे जा सकते हैं। केंद्रीय, राज्य, सार्वजनिक उपक्रम के नियमित कर्मचारी/पेंशनभागी को निर्गत कोई पहचान पत्र या पेंशन भुगतान आदेश (पीपीओ) मान्य होगा। जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट, मान्यता प्राप्त बोर्ड/विश्वविद्यालयों द्वारा निर्गत शैक्षणिक प्रमाणपत्र, निवास प्रमाणपत्र, वन अधिकार प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां उपलब्ध हो), राज्य/स्थानीय प्राधिकारी द्वारा निर्गत परिवार रजिस्टर की नकल/प्रति को भी स्वप्रमाणित दस्तावेज के रूप में माना जाएगा।
विधानसभा - मतदाताओं की संख्या
मेजा - 313033
करछना - 302223
बारा - 289356
झूंसी - 271258
हंडिया - 312242
प्रतापपुर - 284028
सोरांव - 251357
नवाबगंज - 260580
इलाहाबाद उत्तर - 361543
इलाहाबाद दक्षिण - 272613
इलाहाबाद पश्चिम - 350488
वर्ष 2024 में विधानसभावार वोटरों का विवरण
फाफामऊ - 366003
सोरांव - 380075
फूलपुर - 410025
प्रतापपुर - 408714
हंडिया - 400811
मेजा - 330981
करछना - 363015
इलाहाबाद पश्चिम - 460205
इलाहाबाद उत्तर - 430800
इलाहाबाद दक्षिण - 414152
बारा - 341140
कोरांव - 358598
निर्वाचन आयोग से दिशानिर्देश मिलने का इंतजार है। आयोग से गाइडलाइन जारी होने के बाद उसी के अनुरूप विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। - मनीष कुमार वर्मा, डीएम