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बलिया के 14 सरकारी वकीलों की नियुक्ति रद्द

Wed, 15 May 2019 08:47 PM IST
विनोद सिंह न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Wed, 15 May 2019 08:47 PM IST
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14 government lawyers of Ballia canceled
डेमो - फोटो : डेमो
हाईकोर्ट ने बलिया जिला न्यायालय में आबद्ध किए गए 14 जिला अभियोजन अधिकारी, अपर जिला अभियोजन अधिकारियों और सहायक अभियोजन अधिकारियों की नियुक्ति को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने इन नियुक्तियों को मनमाना और विधि विरुद्ध करार दिया है। राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि जिला जज बलिया के परामर्श से डीएम बलिया द्वारा भेजे गए 51 नामों में से ही सरकारी वकीलों की नियुक्ति की जाए। यह प्रक्रिया पूरी होने के दौरान पूर्व में आबद्ध सरकारी वकीलों से काम चलाया जाए।
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बलिया न्यायालय के लिए जिलाधिकारी ने 51 नामों की संस्तुति राज्य सरकार को भेजी थी। मगर कानून मंत्री के कहने पर इस सूची को दरकिनार कर 19 नाम भेजे गए जिसमें कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ। इनमें से 14 वकीलों की नियुक्ति की गई। इन 14 वकीलों को भी महीने भर में 14-14 दिन की ड्यूटी मिल रही थी। बलिया के पूर्व सरकारी वकील संतोष कुमार पांडेय ने इन नियुक्तियों को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिका पर न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल और न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की पीठ ने सुनवाई की।
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बेहतर न्याय के लिए योग्य वकीलों की जरूरत

हाईकोर्ट ने राज्य सरकार के विधि विभाग की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा है कि विधि परामर्शी कार्यालय में तैनात न्यायिक अधिकारियों का काम सरकार को सही परामर्श देने का है। सुप्रीमकोर्ट ने भी कहा है कि कानून के शासन की परिकल्पना में सरकारी मनमानी कार्यपद्धति नहीं अपना सकती है। अदालतों में योग्य सरकारी वकीलों की आवश्यकता है क्योंकि 80 फीसदी मुकदमों में राज्य सरकार पक्षकार होती है। योग्य वकीलों के सहयोग से अदालत अच्छे निर्णय दे सकती है। सरकारी वकीलों की नियुक्ति में पारदर्शी और भेदभाव रहित प्रक्रिया अपनानी चाहिए। अयोग्य लोगों की नियुक्ति से न्याय के उच्च आदर्शों और मूल्यों को नुकसान पहुंचता है।
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बलिया में आठ दिसंबर 2017 को डीजीसी, एडीजीसी और सहायक डीजीसी के पदों के लिए विज्ञापन निकाला गया था। प्राप्त आवेदनों में से जिलाधिकारी ने जिला जज के परामर्श से 50 नामों की संस्तुति कर विधि परामर्शी कार्यालय को भेजा था। मगर इसकी अनदेखी कर 19 नाम भेज दिए गए जिनमें किसी प्रक्रिया का पालन नहीं हुआ था। जिलाधिकारी ने इस पर आपत्ति की मगर मंत्री का निर्देश होने के कारण 19 में से 14 की नियुक्तियां कर दी गई। कोर्ट का कहना था कि सरकार में बैठे न्यायिक अधिकारियों ने विधि विरुद्ध प्रक्रिया अपनाई है। जबकि इनका काम सरकार को सही सलाह देना है।
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