फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Prayagraj News ›   इविवि के गले की फांस बनी शिक्षक भर्ती

इविवि के गले की फांस बनी शिक्षक भर्ती

Fri, 13 Jul 2018 02:04 AM IST
Updated Fri, 13 Jul 2018 02:04 AM IST
विज्ञापन
इविवि के गले की फांस बनी शिक्षक भर्ती
इविवि के गले की फांस बनी शिक्षक भर्ती
विज्ञापन

0 वेबसाइट से इतर किसी दूसरी नियमावली पर हुआ एपीआई निर्धारण
0 सुहासिनी ने कुलपति को भेजा एक और पत्र, बढ़ता जा रहा विवाद
इलाहाबाद। पीसीएस-2015 के मामले में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की लापरवाही उजागर करने वाली सुहासिनी बाजपेयी ने अब इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सुहासिनी का आरोप है कि आवेदन के दौरान वेबसाइट पर एपीआई निर्धारण के लिए जो नियमावली दी गई थी, इविवि प्रशासन ने उससे इतर किसी दूसरी नियमावली के आधार पर एपीआई का निर्धारण कर दिया। सुहासिनी ने इस मामले में एक और पत्र कुलपति को भेजा है।
सुहासिनी ने शिक्षाशास्त्र में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर भर्ती के लिए इविवि में आवेदन किया है और वर्तमान में वर्धा विश्वविद्यालय, महाराष्ट्र में असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर तैनात हैं। स्क्रीनिंग के बाद इंटरव्यू के लिए न बुलाए जाने पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी, जिसके बाद इविवि प्रशासन की ओर से जवाब दिया गया कि उन्हें कुल 46.3 एपीआई अंक प्राप्त हुए हैं, जबकि उन्होंने अक्तूबर-2017 में वेबसाइट पर प्रदर्शित जिस नियमावली के आधार पर फॉर्म भरा था, उस हिसाब से गणना की जाए तो उन्हें इविवि प्रशासन की ओर से बताए गए एपीआई अंक की सूचना गलत साबित हो रही है।
विज्ञापन

सुहासिनी ने एक अन्य अभ्यर्थी को आरटीआई के तहत मिली एपीआई निर्धारण की जानकारी का भी कुलपति को लिखे पत्र में हवाला दिया है और सवाल उठाए हैं कि वेबसाइट पर प्रदर्शित नियमावली से इतर यह नई नियमावली क्यों बनाई गई और इसे वेबसाइट पर प्रदर्शित क्यों नहीं किया गया, क्योंकि सभी अभ्यर्थी एपीआई से संबंधित नियमावली देखकर ही आवेदन फॉर्म भरते हैं। सुहासिनी का आरोप है कि कुछ एमफिल और नेट-जेआरएफ अभ्यर्थियों को अतिरिक्त लाभ पहुंचाने के लिए गाइडलाइन में बदलाव किया गया। सुहासिनी ने कुलपति से मांग की है कि चयन प्रक्रिया की गरिमा बनाए रखने के लिए मामले में उचित कार्रवाई करें। उधर, एफआरसी निदेशक प्रो. अनुपम दीक्षित का कहना है कि शॉटलिस्टिंग गाइडलाइन विज्ञापन का हिस्सा नहीं था, ऐसे में यह सुहासिनी के पास कहां से आया। आरटीआई में जो जानकारी दी गई है, उसी के अनुसार एपीआई निर्धारण हुआ है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed