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अल्का पांडेय हत्याकांड के फैसले को चुनौती
Updated Sun, 24 Dec 2017 01:02 AM IST
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अलका पांडेय हत्याकांड के फैसले को चुनौती
0 हाईकोर्ट में दाखिल की गई अपील, आरोपियों को वारंट जारी
0 रायबरेली के लालगंज में मिला था अलका का अधजला शव
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
जार्जटाउन क्षेत्र के चर्चित अलका पांडेय हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मरहूम अलका के पति रिटायर्ड कर्नल जगदंबा प्रसाद पांडेय ने इस मामले में अपील दाखिल की है। कोर्ट ने अपील मंजूर करते हुए अधीनस्थ न्यायालय से रिकार्ड तलब किया है। साथ ही मामले में बरी किए गए आरोपियों आशिक उर्फ मल्ली, सुफियान और मो. अहमद नियाजी को वारंट जारी कर हाईकोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
अपील पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति एनए मुनीय और जेजे मुनीर की खंडपीठ ने आरोपियों को सीजेएम न्यायालय में छह सप्ताह में सरेंडर करने के लिए कहा है। यह भी निर्देश दिया है कि यदि आरोपी जमानत चाहते हैं तो उनसे व्यक्तिगत मुचलका और बंधपत्र लेकर जमानत पर रिहा कर दिया जाए। आरोपियोें को इस बात की अंडरटेकिंग देनी होगी कि वह हाईकोर्ट में 19 मार्च 2018 को उपस्थित होंगे।
उल्लेखनीय है कि 17 सितंबर 2011 की इस घटना में नामजद तीनों अभियुक्तों मल्ली, सुफियान और अहमद नियाजी को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके शुक्ला ने साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया था। अभियोजन अपनी कहानी साबित करने में नाकाम रहा। इस फैसले के खिलाफ अलका के पति जेपी पांडेय की अपील पर हाईकोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय द्वारा निकाले गए निष्कर्षों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। अलका पांडेय की गुमशुदगी की रिपोर्ट 17 सितंबर 2011 को दर्ज कराई गई थी। बाद में उसकी लाश रायबरेली के लालगंज थानाक्षेत्र में पूरा मगरहन गांव में अधजली हालत में मिली। इसके बाद इस मामले में अपहरण और हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज किया गया।
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0 हाईकोर्ट में दाखिल की गई अपील, आरोपियों को वारंट जारी
0 रायबरेली के लालगंज में मिला था अलका का अधजला शव
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
जार्जटाउन क्षेत्र के चर्चित अलका पांडेय हत्याकांड में अपर सत्र न्यायाधीश के फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। मरहूम अलका के पति रिटायर्ड कर्नल जगदंबा प्रसाद पांडेय ने इस मामले में अपील दाखिल की है। कोर्ट ने अपील मंजूर करते हुए अधीनस्थ न्यायालय से रिकार्ड तलब किया है। साथ ही मामले में बरी किए गए आरोपियों आशिक उर्फ मल्ली, सुफियान और मो. अहमद नियाजी को वारंट जारी कर हाईकोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
अपील पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति एनए मुनीय और जेजे मुनीर की खंडपीठ ने आरोपियों को सीजेएम न्यायालय में छह सप्ताह में सरेंडर करने के लिए कहा है। यह भी निर्देश दिया है कि यदि आरोपी जमानत चाहते हैं तो उनसे व्यक्तिगत मुचलका और बंधपत्र लेकर जमानत पर रिहा कर दिया जाए। आरोपियोें को इस बात की अंडरटेकिंग देनी होगी कि वह हाईकोर्ट में 19 मार्च 2018 को उपस्थित होंगे।
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उल्लेखनीय है कि 17 सितंबर 2011 की इस घटना में नामजद तीनों अभियुक्तों मल्ली, सुफियान और अहमद नियाजी को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश एके शुक्ला ने साक्ष्यों के अभाव में संदेह का लाभ देकर बरी कर दिया था। अभियोजन अपनी कहानी साबित करने में नाकाम रहा। इस फैसले के खिलाफ अलका के पति जेपी पांडेय की अपील पर हाईकोर्ट ने कहा कि अधीनस्थ न्यायालय द्वारा निकाले गए निष्कर्षों पर पुनर्विचार की आवश्यकता है। अलका पांडेय की गुमशुदगी की रिपोर्ट 17 सितंबर 2011 को दर्ज कराई गई थी। बाद में उसकी लाश रायबरेली के लालगंज थानाक्षेत्र में पूरा मगरहन गांव में अधजली हालत में मिली। इसके बाद इस मामले में अपहरण और हत्या का नामजद मुकदमा दर्ज किया गया।
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