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सीआरपीएफ कमाडेंट के सुकमा तबादले पर रोक
Updated Mon, 12 Jun 2017 08:35 PM IST
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सीआरपीएफ कमांडेंट के सुकमा तबादले पर रोक
0 हाईकोर्ट ने केेंद्र सरकार से मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने सीआरपीएफ की 148वीं बटालियन साहूपुरी चंदौली में तैनात कमांडेंट वेद प्रकाश त्रिपाठी का तबादला छत्तीसगढ़ के सुकमा में करने के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में छह सप्ताह में जवाब मांगा है। याची इससे पहले कश्मीर के चरारे-शरीफ और बड़गाम में तैनात था। वहां से स्थानांतरित कर उसे चंदौली भेजा गया, फिर उसका तबादला सुकमा के लिए कर दिया गया। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि तबादला स्थानांतरण नीति के विरुद्ध है।
वेदप्रकाश की याचिका पर न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति एसके अग्रवाल की पीठ सुनवाई कर रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक भूषण और अपर सॉलीसिटर जनरल अशोक मेहता ने याचिका पर पक्ष रखा। याचिका में कहा गया कि सीआरपीएफ निदेशालय ने 24 नवंबर 2014 को स्थानांतरण नीति जारी की थी। इसका कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया। नई नीति के अनुसार से एक स्थान पर कम से कम वर्ष की तैनाती होगी। इसके बाद ही स्थानांतरण किया जा सकेगा। याची पहले कश्मीर में तैनात था। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व उसका स्थानांतरण चंदौली के लिए किया गया। इसके बाद पुन: उसे सुकमा भेजा जा रहा है। यह 2014 की स्थानांतरण नीति के विरुद्ध है। तबादला आदेश में ऐसा कोई कारण भी नहीं दिया गया है कि बीच में स्थानांतरण करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। कोर्ट ने 20 मई 2017 के स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा दी है।
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सीआरपीएफ कमांडेंट के सुकमा तबादले पर रोक
0 हाईकोर्ट ने केेंद्र सरकार से मांगा जवाब
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
हाईकोर्ट ने सीआरपीएफ की 148वीं बटालियन साहूपुरी चंदौली में तैनात कमांडेंट वेद प्रकाश त्रिपाठी का तबादला छत्तीसगढ़ के सुकमा में करने के आदेश पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने केंद्र सरकार से इस मामले में छह सप्ताह में जवाब मांगा है। याची इससे पहले कश्मीर के चरारे-शरीफ और बड़गाम में तैनात था। वहां से स्थानांतरित कर उसे चंदौली भेजा गया, फिर उसका तबादला सुकमा के लिए कर दिया गया। इसे चुनौती देते हुए कहा गया कि तबादला स्थानांतरण नीति के विरुद्ध है।
वेदप्रकाश की याचिका पर न्यायमूर्ति कृष्ण मुरारी और न्यायमूर्ति एसके अग्रवाल की पीठ सुनवाई कर रही है। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक भूषण और अपर सॉलीसिटर जनरल अशोक मेहता ने याचिका पर पक्ष रखा। याचिका में कहा गया कि सीआरपीएफ निदेशालय ने 24 नवंबर 2014 को स्थानांतरण नीति जारी की थी। इसका कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया। नई नीति के अनुसार से एक स्थान पर कम से कम वर्ष की तैनाती होगी। इसके बाद ही स्थानांतरण किया जा सकेगा। याची पहले कश्मीर में तैनात था। करीब डेढ़ वर्ष पूर्व उसका स्थानांतरण चंदौली के लिए किया गया। इसके बाद पुन: उसे सुकमा भेजा जा रहा है। यह 2014 की स्थानांतरण नीति के विरुद्ध है। तबादला आदेश में ऐसा कोई कारण भी नहीं दिया गया है कि बीच में स्थानांतरण करने की आवश्यकता क्यों पड़ी। कोर्ट ने 20 मई 2017 के स्थानांतरण आदेश पर रोक लगा दी है।
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