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दो पीड़िताएं कोर्ट में तलिब
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सभी केंद्र : गोरखपुर के ध्यानार्थ
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देवरिया शेल्टर होम मामला
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दो पड़िताएं हाईकोर्ट में तलब, रिहा करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने देवरिया शेल्टर होम से जुड़े मामले की दो पीड़िताओं (जिन्होंने घटना की शिकायत की थी) को मुख्य न्यायाधीश के चैंबर में पेश करने का आदेश दिया है। इनमें से एक लड़की को मुंबई के उस्मान अली ने अपनी बताया है। उसने कोर्ट में अर्जी देकर कहा है कि उसकी पत्नी को शेल्टर होम से रिहा कर उसकी अभिरक्षा में सुपुर्द किया जाए। उस्मान अली ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की है। जबकि दूसरी पीड़िता के परिवार में हुई घटना के कारण घर जाना चाहती है। इस मामले में तीन पीड़िताओं को हाईकोर्ट के आदेश से अज्ञात स्थान पर रखा गया है ताकि उनकी सुरक्षा को कोई खतरा न हो। कोर्ट ने कहा है कि यदि संभव हो तो सुनवाई के समय तीसरी पीड़िता की मां को भी हाजिर किया जाए।
मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की पीठ ने एसआईटी को निर्देश दिया है कि वह पीड़िताओं को हाईकोर्ट की संयुक्त निबंधक (न्यायिक)(गोपनीयता) के मार्फत मुख्य न्यायाधीश के चैंबर में हाजिर करें। उस्माल अली की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूछा कि जब पीड़िताओं को इस अदालत के आदेश से अज्ञात स्थान पर गोपनीय तरीके से रखा गया है और किसी को भी उनसे मिलने की इजाजत नहीं है तो फिर याची ने पीड़िता से संपर्क कैसे किया और उससे शादी कब की है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि याची मुस्लिम है, उसने बिना धर्म परिवर्तन के पीड़िता से निकाह कैसे किया। कोर्ट ने उस्मान अली की पारिवारिक स्थिति बताने का भी निर्देश दिया है।
उस्मान ने अपनी याचिका में कहा है कि उसकी पत्नी बालिग है। इसलिए उसे तलब कर उसकी मर्जी पूछी जाए और उसकी इच्छा के अनुसार उसके पति के साथ जाने दिया जाए। याचिका पर 27 फरवरी को सुनवाई होगी।
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देवरिया शेल्टर होम मामला
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दो पड़िताएं हाईकोर्ट में तलब, रिहा करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। हाईकोर्ट ने देवरिया शेल्टर होम से जुड़े मामले की दो पीड़िताओं (जिन्होंने घटना की शिकायत की थी) को मुख्य न्यायाधीश के चैंबर में पेश करने का आदेश दिया है। इनमें से एक लड़की को मुंबई के उस्मान अली ने अपनी बताया है। उसने कोर्ट में अर्जी देकर कहा है कि उसकी पत्नी को शेल्टर होम से रिहा कर उसकी अभिरक्षा में सुपुर्द किया जाए। उस्मान अली ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की है। जबकि दूसरी पीड़िता के परिवार में हुई घटना के कारण घर जाना चाहती है। इस मामले में तीन पीड़िताओं को हाईकोर्ट के आदेश से अज्ञात स्थान पर रखा गया है ताकि उनकी सुरक्षा को कोई खतरा न हो। कोर्ट ने कहा है कि यदि संभव हो तो सुनवाई के समय तीसरी पीड़िता की मां को भी हाजिर किया जाए।
मामले की सुनवाई कर रही मुख्य न्यायमूर्ति गोविंद माथुर और न्यायमूर्ति एसएस शमशेरी की पीठ ने एसआईटी को निर्देश दिया है कि वह पीड़िताओं को हाईकोर्ट की संयुक्त निबंधक (न्यायिक)(गोपनीयता) के मार्फत मुख्य न्यायाधीश के चैंबर में हाजिर करें। उस्माल अली की याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पूछा कि जब पीड़िताओं को इस अदालत के आदेश से अज्ञात स्थान पर गोपनीय तरीके से रखा गया है और किसी को भी उनसे मिलने की इजाजत नहीं है तो फिर याची ने पीड़िता से संपर्क कैसे किया और उससे शादी कब की है। कोर्ट ने जानना चाहा है कि याची मुस्लिम है, उसने बिना धर्म परिवर्तन के पीड़िता से निकाह कैसे किया। कोर्ट ने उस्मान अली की पारिवारिक स्थिति बताने का भी निर्देश दिया है।
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उस्मान ने अपनी याचिका में कहा है कि उसकी पत्नी बालिग है। इसलिए उसे तलब कर उसकी मर्जी पूछी जाए और उसकी इच्छा के अनुसार उसके पति के साथ जाने दिया जाए। याचिका पर 27 फरवरी को सुनवाई होगी।
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