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पान मसाला खाने पर इंक्रीमेंट रोकने का आदेेश रद्द
Updated Mon, 19 Nov 2018 09:55 PM IST
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महोबा के लिए खास
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पान मसाला खाने पर इंक्रीमेंट रोकने का आदेश रद्द
0 हाईकोर्ट ने कहा दंड देने से पूर्व विभागीय कार्यवाही जरूरी
प्रयागराज। कार्यालय में पान मसाला खाते पकड़े गए कर्मचारी का इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) रोके जाने का डीएम महोबा का आदेश हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी को गंभीर दंड देने से पूर्व विभागीय कार्यवाही और जांच करना जरूरी है। दो वार्षिक इंक्रीमेंट स्थायी रूप से रोकने का आदेश गंभीर दंड है। इसके लिए विभागीय प्रक्रिया को अपनाना जरूरी था।
महोबा के सरकारी कर्मचारी मिथिलेश कुमार तिवारी की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने दिया। याची को कार्यालय परिसर में अत्याधिक पान मसाला खाते हुए पकड़े जाने पर डीएम ने उसका दो इंक्रीमेंट स्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा है कि यह गंभीर दंड है और ऐसा करने से पूर्व कर्मचारी को न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही कोई साक्ष्य लिया गया। उसे कोई आरोपपत्र भी नहीं दिया गया। बिना कोई वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए दंड का आदेश पारित कर दिया गया।
नियमानुसार अधिकारी को प्रक्रिया का पालन करते हुए ही कोई आदेश पारित करना चाहिए था। डीएम का आदेश रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि जिलाधिकारी चाहें तो नियमानुसार कार्यवाही कर सकते हैं।
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पान मसाला खाने पर इंक्रीमेंट रोकने का आदेश रद्द
0 हाईकोर्ट ने कहा दंड देने से पूर्व विभागीय कार्यवाही जरूरी
प्रयागराज। कार्यालय में पान मसाला खाते पकड़े गए कर्मचारी का इंक्रीमेंट (वेतन वृद्धि) रोके जाने का डीएम महोबा का आदेश हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कर्मचारी को गंभीर दंड देने से पूर्व विभागीय कार्यवाही और जांच करना जरूरी है। दो वार्षिक इंक्रीमेंट स्थायी रूप से रोकने का आदेश गंभीर दंड है। इसके लिए विभागीय प्रक्रिया को अपनाना जरूरी था।
महोबा के सरकारी कर्मचारी मिथिलेश कुमार तिवारी की याचिका पर यह आदेश न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा ने दिया। याची को कार्यालय परिसर में अत्याधिक पान मसाला खाते हुए पकड़े जाने पर डीएम ने उसका दो इंक्रीमेंट स्थायी रूप से रोकने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा है कि यह गंभीर दंड है और ऐसा करने से पूर्व कर्मचारी को न तो कारण बताओ नोटिस दिया गया और न ही कोई साक्ष्य लिया गया। उसे कोई आरोपपत्र भी नहीं दिया गया। बिना कोई वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए दंड का आदेश पारित कर दिया गया।
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नियमानुसार अधिकारी को प्रक्रिया का पालन करते हुए ही कोई आदेश पारित करना चाहिए था। डीएम का आदेश रद्द करते हुए कोर्ट ने कहा कि यदि जिलाधिकारी चाहें तो नियमानुसार कार्यवाही कर सकते हैं।
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