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बायो मेडिकल कचरे के निस्तारण पर कोर्ट नाराज
Updated Tue, 12 Sep 2017 09:27 PM IST
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बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण में सरकार फेल
0 हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव के हलफनामे पर जताई नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण में राज्य सरकार असफल है। इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं हो रहा है। सरकार इस बाबत कोर्ट को सही जानकारी भी नहीं दे पा रही है। बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण की व्यवस्था पर मंगलवार को मुख्य सचिव का हलफनामा देखने के बाद हाईकोर्ट की पीठ ने गहरी नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की। कोर्ट ने मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव पर्यावरण को फिर से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
प्राइवेट डाक्टर्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने पिछली तारीख पर मुख्य सचिव को उपस्थित होने का आदेश दिया था। अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट ने मुख्य सचिव को तलब करने के आदेश पर रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि सरकार बायो मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण को लेकर गंभीर है। इसके लिए बनी नियमावली का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। मुख्य सचिव की ओर से हलफनामा कोर्ट में दाखिल किया गया। मगर इसमें कोर्ट द्वारा मांगी गई जानकारियां नहीं थी। पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद जानकारी नहीं देना न्यायिक प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करना है।
हलफनामे में कहा गया कि प्रदेश मेें 9972 अस्पताल हैं। कोर्ट ने कहा यह जानकारी सही नहीं हो सकती है। सिर्फ इलाहाबाद में ही अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक आदि की संख्या दस हजार होगी। मेडिकल कचरा जनस्वास्थ्य के लिए घातक है। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है।
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बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण में सरकार फेल
0 हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव के हलफनामे पर जताई नाराजगी
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण में राज्य सरकार असफल है। इसके लिए निर्धारित नियमों का पालन नहीं हो रहा है। सरकार इस बाबत कोर्ट को सही जानकारी भी नहीं दे पा रही है। बायोमेडिकल कचरे के निस्तारण की व्यवस्था पर मंगलवार को मुख्य सचिव का हलफनामा देखने के बाद हाईकोर्ट की पीठ ने गहरी नाराजगी जताते हुए टिप्पणी की। कोर्ट ने मुख्य सचिव और प्रमुख सचिव पर्यावरण को फिर से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।
प्राइवेट डाक्टर्स एसोसिएशन की जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति अरुण टंडन और न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की पीठ ने पिछली तारीख पर मुख्य सचिव को उपस्थित होने का आदेश दिया था। अपर महाधिवक्ता एमसी चतुर्वेदी ने बताया कि सुप्रीमकोर्ट ने मुख्य सचिव को तलब करने के आदेश पर रोक लगा दी है। उन्होंने बताया कि सरकार बायो मेडिकल कचरे के सुरक्षित निस्तारण को लेकर गंभीर है। इसके लिए बनी नियमावली का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। मुख्य सचिव की ओर से हलफनामा कोर्ट में दाखिल किया गया। मगर इसमें कोर्ट द्वारा मांगी गई जानकारियां नहीं थी। पीठ ने नाराजगी जताते हुए कहा कि बार-बार जानकारी मांगे जाने के बावजूद जानकारी नहीं देना न्यायिक प्रक्रिया में अवरोध उत्पन्न करना है।
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हलफनामे में कहा गया कि प्रदेश मेें 9972 अस्पताल हैं। कोर्ट ने कहा यह जानकारी सही नहीं हो सकती है। सिर्फ इलाहाबाद में ही अस्पताल, नर्सिंग होम, क्लीनिक आदि की संख्या दस हजार होगी। मेडिकल कचरा जनस्वास्थ्य के लिए घातक है। इसकी अनदेखी नहीं की जा सकती है।
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