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आश्रित की कठिनाई पर दी जा सकती है विनंब में माफी
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आश्रित की कठिनाई पर दी जा सकती है विलंब में माफी
0 मृतक आश्रित कोटे के तहत आवेदन में विलंब पर सरकार आश्रित की परिस्थिति का करे परीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि मृतक आश्रित अनुकंपा नियुक्ति कानून के नियम पांच के तहत वह आश्रित के आवेदन में देरी को जायज वजह से माफ कर सकती है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार को देखना चाहिए कि आश्रित वास्तव में ऐसी परेशानी में था कि वह समय से आवेदन नहीं कर सका। उसकी आर्थिक परिस्थिति पर भी विचार कर विलंब से किया गया आवेदन स्वीकार किया जा सकता है।
कोर्ट का है कि ऐसे मामलों में मृतक आश्रित की यह जिम्मेदारी है कि वह अपनी कठिनाईयों का आवेदन में जिक्र करे और दस्तावेजी प्रमाण भी दे। कोर्ट ने पुलिस विभाग को अंतरिक्ष सिंह की मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पर विचार करने के लिए नियम 5 के तहत आवेदन देने में देरी को माफ करने पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि याची की आर्थिक स्थिति को देखते हुए छूट देने पर विचार किया जाए।
यह आदेश मुख्य न्यायधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति एस एस शमशेरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील को निस्तारित करते हुए दिया हाईकोर्ट ने एकलपीठ के आदेश को संशोधित करते हुए राज्य सरकार को नियम 5 के तहत निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अपील पर याची की तरफ से अधिवक्ता विजय गौतम ने प्रतिवाद किया।
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सरकार ने आवेदन देने में देरी को माफ करने से इंकार कर दिया था, जिसे कोर्ट में चुनौती दी गई थी। याची अंतरिक्ष सिंह के पिता सुरेंद्र सिंह पुलिस कांस्टेबल थे। सेवाकाल में उनकी मृत्यु हो गई। याची उस समय नाबालिग था। बालिग होने पर अर्जी दी। देरी होने के कारण अर्जी खारिज कर दी गई तो कोर्ट ने राज्य सरकार को नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया था। जिसे सरकार ने अपील में चुनौती दी गई थी।
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आश्रित की कठिनाई पर दी जा सकती है विलंब में माफी
0 मृतक आश्रित कोटे के तहत आवेदन में विलंब पर सरकार आश्रित की परिस्थिति का करे परीक्षण
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से कहा है कि मृतक आश्रित अनुकंपा नियुक्ति कानून के नियम पांच के तहत वह आश्रित के आवेदन में देरी को जायज वजह से माफ कर सकती है। कोर्ट ने कहा है कि सरकार को देखना चाहिए कि आश्रित वास्तव में ऐसी परेशानी में था कि वह समय से आवेदन नहीं कर सका। उसकी आर्थिक परिस्थिति पर भी विचार कर विलंब से किया गया आवेदन स्वीकार किया जा सकता है।
कोर्ट का है कि ऐसे मामलों में मृतक आश्रित की यह जिम्मेदारी है कि वह अपनी कठिनाईयों का आवेदन में जिक्र करे और दस्तावेजी प्रमाण भी दे। कोर्ट ने पुलिस विभाग को अंतरिक्ष सिंह की मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति पर विचार करने के लिए नियम 5 के तहत आवेदन देने में देरी को माफ करने पर निर्णय लेने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि याची की आर्थिक स्थिति को देखते हुए छूट देने पर विचार किया जाए।
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यह आदेश मुख्य न्यायधीश गोविन्द माथुर तथा न्यायमूर्ति एस एस शमशेरी की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील को निस्तारित करते हुए दिया हाईकोर्ट ने एकलपीठ के आदेश को संशोधित करते हुए राज्य सरकार को नियम 5 के तहत निर्णय लेने का निर्देश दिया है। अपील पर याची की तरफ से अधिवक्ता विजय गौतम ने प्रतिवाद किया।
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सरकार ने आवेदन देने में देरी को माफ करने से इंकार कर दिया था, जिसे कोर्ट में चुनौती दी गई थी। याची अंतरिक्ष सिंह के पिता सुरेंद्र सिंह पुलिस कांस्टेबल थे। सेवाकाल में उनकी मृत्यु हो गई। याची उस समय नाबालिग था। बालिग होने पर अर्जी दी। देरी होने के कारण अर्जी खारिज कर दी गई तो कोर्ट ने राज्य सरकार को नियुक्ति पर विचार करने का निर्देश दिया था। जिसे सरकार ने अपील में चुनौती दी गई थी।