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आजीवन कारावास की सजा रद्द
Updated Mon, 02 Oct 2017 01:39 AM IST
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हत्यारोपी बदरुद्दीन की आजीवन कारावास की सजा रद्द
आजमगढ़ के रानी की सराय थाना क्षेत्र का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजमगढ़ के रानी की सराय थाना क्षेत्र में अब्दुल राशिद की हत्या के आरोपी बदरुद्दीन को दी गई आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी है। कोर्ट ने अन्य केस में वांछित न होने पर तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश अभियोजन पक्ष द्वारा मुख्य गवाह की प्रति परीक्षा करने का अवसर दिए बगैर आरोप साबित होने के आधार पर सजा सुनाने पर दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति प्रत्यूष कुमार की खंडपीठ ने बदरुद्दीन की अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। मालूम हो कि 19 दिसंबर 2004 को शाम साढ़े तीन बजे रामपुर टडवा के चौकीदार पतिराज पासवान ने रानी की सराय थाने में रिपोर्ट किया कि नवरही गांव के सीवान में झाड़ियों में एक लाश पड़ी है जिसका गला कटा हुआ है। पोस्टमार्टम के लिए लाश भेजी गई। विवेचना के बाद अपीलार्थी के विरुद्ध चार्जशीट पेश हुई। सत्र न्यायाधीश आजमगढ़ ने मुख्य परीक्षा कराई। इसके बाद विवेचक अदालत में नहीं आए। इस पर आरोपी को दोषी करार करते हुए कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके विरूद्ध हुई अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सत्र न्यायाधीश के आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया है। अपील पर अधिवक्ता जफर अब्बास ने बहस की।
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हत्यारोपी बदरुद्दीन की आजीवन कारावास की सजा रद्द
आजमगढ़ के रानी की सराय थाना क्षेत्र का मामला
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजमगढ़ के रानी की सराय थाना क्षेत्र में अब्दुल राशिद की हत्या के आरोपी बदरुद्दीन को दी गई आजीवन कारावास की सजा रद्द कर दी है। कोर्ट ने अन्य केस में वांछित न होने पर तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने यह आदेश अभियोजन पक्ष द्वारा मुख्य गवाह की प्रति परीक्षा करने का अवसर दिए बगैर आरोप साबित होने के आधार पर सजा सुनाने पर दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति रमेश सिन्हा तथा न्यायमूर्ति प्रत्यूष कुमार की खंडपीठ ने बदरुद्दीन की अपील को स्वीकार करते हुए दिया है। मालूम हो कि 19 दिसंबर 2004 को शाम साढ़े तीन बजे रामपुर टडवा के चौकीदार पतिराज पासवान ने रानी की सराय थाने में रिपोर्ट किया कि नवरही गांव के सीवान में झाड़ियों में एक लाश पड़ी है जिसका गला कटा हुआ है। पोस्टमार्टम के लिए लाश भेजी गई। विवेचना के बाद अपीलार्थी के विरुद्ध चार्जशीट पेश हुई। सत्र न्यायाधीश आजमगढ़ ने मुख्य परीक्षा कराई। इसके बाद विवेचक अदालत में नहीं आए। इस पर आरोपी को दोषी करार करते हुए कोर्ट ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके विरूद्ध हुई अपील पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सत्र न्यायाधीश के आजीवन कारावास की सजा को रद्द कर दिया है। अपील पर अधिवक्ता जफर अब्बास ने बहस की।
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