{"_id":"5979f8974f1c1bd46b8b46b0","slug":"111501165719-allahabad-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"पदोन्नति होती तो न करना पड़ता समायोजन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
पदोन्नति होती तो न करना पड़ता समायोजन
Updated Thu, 27 Jul 2017 07:58 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पदोन्नति होती तो न करना पड़ता समायोजन
0 हाईकोर्ट के फैसले पर राजकीय शिक्षक संघ ने जताई खुशी
0 जीआईसी में हुई बैठक, दोषी अफसरों को दंडित करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश राजकीय शिक्षक संघ की जीआईसी में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन पर चर्चा हुई। हाईकोर्ट के फैसले पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते पदोन्नति कर दी गई होती तो समायोजन की जरूरत नहीं पड़ती। शिक्षकों ने विभाग पर सरकार को बदनाम करने का आरोप लगाया। कहा कि विभाग चाह लेता तो एक सप्ताह में सभी लंबित पदों पर अध्यापकों की पदोन्नति हो जाती, लेकिन अफसरों ने ऐसा करने के बजाए नियमावली के विपरीत शिक्षकों के समायोजन का प्रयास किया।
बैठक में कहा गया कि अफसरों को पता है कि एलटी एवं प्रवक्ता की अर्हता अलग-अलग है। विषयवार नियुक्ति होती है, फिर भी मंत्री को गलत जानकारी देकर शिक्षकों के शोषण का प्रयास किया गया। शिक्षकों ने हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत किया। प्रांतीय महामंत्री डॉ. रवि भूषण ने कहा कि न्यायालय का आदेश अन्याय पर न्याय की जीत है। उन्होंने उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री से इसके लिए जिम्मेदार अफसरों को दंडित करने तथा नए स्कूलों में पदोन्नति से प्रधानाचार्य को पदस्थापित करने की मांग की। बैठक में अहमद, बीएल पाल, जुबैर अहमद, रमेश वर्मा, दिलीप दिवाकर, राकेश निर्मल, विनीता यादव, स्मिता सिंह, स्वेता, संत प्रसाद आदि मौजूद थे। संचालन प्रभाकर त्रिपाठी ने किया।
विज्ञापन
0 हाईकोर्ट के फैसले पर राजकीय शिक्षक संघ ने जताई खुशी
0 जीआईसी में हुई बैठक, दोषी अफसरों को दंडित करने की मांग
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
उत्तर प्रदेश राजकीय शिक्षक संघ की जीआईसी में बृहस्पतिवार को हुई बैठक में सरप्लस शिक्षकों के समायोजन पर चर्चा हुई। हाईकोर्ट के फैसले पर चर्चा करते हुए वक्ताओं ने कहा कि यदि समय रहते पदोन्नति कर दी गई होती तो समायोजन की जरूरत नहीं पड़ती। शिक्षकों ने विभाग पर सरकार को बदनाम करने का आरोप लगाया। कहा कि विभाग चाह लेता तो एक सप्ताह में सभी लंबित पदों पर अध्यापकों की पदोन्नति हो जाती, लेकिन अफसरों ने ऐसा करने के बजाए नियमावली के विपरीत शिक्षकों के समायोजन का प्रयास किया।
बैठक में कहा गया कि अफसरों को पता है कि एलटी एवं प्रवक्ता की अर्हता अलग-अलग है। विषयवार नियुक्ति होती है, फिर भी मंत्री को गलत जानकारी देकर शिक्षकों के शोषण का प्रयास किया गया। शिक्षकों ने हाईकोर्ट के निर्णय का स्वागत किया। प्रांतीय महामंत्री डॉ. रवि भूषण ने कहा कि न्यायालय का आदेश अन्याय पर न्याय की जीत है। उन्होंने उप मुख्यमंत्री एवं माध्यमिक शिक्षा मंत्री से इसके लिए जिम्मेदार अफसरों को दंडित करने तथा नए स्कूलों में पदोन्नति से प्रधानाचार्य को पदस्थापित करने की मांग की। बैठक में अहमद, बीएल पाल, जुबैर अहमद, रमेश वर्मा, दिलीप दिवाकर, राकेश निर्मल, विनीता यादव, स्मिता सिंह, स्वेता, संत प्रसाद आदि मौजूद थे। संचालन प्रभाकर त्रिपाठी ने किया।
विज्ञापन