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पीलीभीत के जंगलों से राजभर जातियों की बेदखली पर रोक
Updated Mon, 19 Jun 2017 10:11 PM IST
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पीलीभीत के जंगलों राजभर जातियों की बेदखली पर रोक
इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने पीलीभीत के जंगलों में रहने वाले राजभर जाति के सदस्यों गिरजा सहित 18 लोगों की बेदखली पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने वन विभाग को निर्देश दिया है कि याचीगण की शिकायतों का तीन सप्ताह में निस्तारण किया जाए। याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि याचीगण 1966 से जंगलों में रह रहे हैं। उनको 1975 के शासनादेश के तहत अस्थायी पट्टा भी दिया गया था। उनके रिहायशी क्षेत्र को वन क्षेत्र घोषित कर दिया गया। इसके बाद उनको बेदखली का निर्देश दिया गया है। याची का कहना है कि हर परिवार को 3.12 एकड़ भूमि दी गई थी। मगर अधिकारियोें का दावा है कि उनको 6778.37 एकड़ पर कब्जा है। प्रभारी वन अधिकारी ने उनको जमीन खाली करने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं करने पर उनको बेदखल कर वसूली की कार्रवाई होगी। कोर्ट ने बेदखली के आदेश पर छह सप्ताह के लिए रोक लगाते हुए याचीगण को अपना प्रत्यावेदन सक्षम अधिकारी को देने का निर्देश दिया है। सक्षम अधिकारी को कोर्ट ने प्रत्यावेदन का निस्तारण तीन सप्ताह में करने का निर्देश दिया है।
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इलाहाबाद (ब्यूरो)। हाईकोर्ट ने पीलीभीत के जंगलों में रहने वाले राजभर जाति के सदस्यों गिरजा सहित 18 लोगों की बेदखली पर रोक लगा दी है। कोर्ट ने वन विभाग को निर्देश दिया है कि याचीगण की शिकायतों का तीन सप्ताह में निस्तारण किया जाए। याचिका पर न्यायमूर्ति दिलीप गुप्ता और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा की खंडपीठ सुनवाई कर रही है। याचिका में कहा गया है कि याचीगण 1966 से जंगलों में रह रहे हैं। उनको 1975 के शासनादेश के तहत अस्थायी पट्टा भी दिया गया था। उनके रिहायशी क्षेत्र को वन क्षेत्र घोषित कर दिया गया। इसके बाद उनको बेदखली का निर्देश दिया गया है। याची का कहना है कि हर परिवार को 3.12 एकड़ भूमि दी गई थी। मगर अधिकारियोें का दावा है कि उनको 6778.37 एकड़ पर कब्जा है। प्रभारी वन अधिकारी ने उनको जमीन खाली करने का निर्देश दिया है। ऐसा नहीं करने पर उनको बेदखल कर वसूली की कार्रवाई होगी। कोर्ट ने बेदखली के आदेश पर छह सप्ताह के लिए रोक लगाते हुए याचीगण को अपना प्रत्यावेदन सक्षम अधिकारी को देने का निर्देश दिया है। सक्षम अधिकारी को कोर्ट ने प्रत्यावेदन का निस्तारण तीन सप्ताह में करने का निर्देश दिया है।