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सचिवालय तक पहुंचेगी जांच की आंच
Updated Fri, 20 Jul 2018 01:00 AM IST
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सचिवालय तक पहुंच सकती है जांच की आंच
0 हरी झंडी मिलने के बाद शिकंजा कसने की तैयारी में सीबीआई
0 एपीएस की प्राथमिक जांच में ही मिल चुके हैं कई अहम सुराग
इलाहाबाद, 19 जुलाई। मुख्यमंत्री से अपर निजी सचिव (एपीएस) भर्ती परीक्षा की जांच के लिए हरी झंडी मिलने के बाद सीबीआई अब उन अफसरों पर शिकंजा कसने की तैयारी में हैं, जिन्होंने अपने पदों का इस्तेमाल करते हुए नाते-रिश्तेदारों का चयन कराया। इनमें से कुछ अफसर सचिवालय में तैनात हैं। ऐसे में सीबीआई जांच की आंच सचिवालय तक जा सकती है।
सीबीआई ने जब जनवरी-2018 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की भर्ती परीक्षाओं की जांच शुरू की थी तो रडार पर पीसीएस-2015 और पीसीएस-2011 की परीक्षा थी। जांच आगे बढ़ी तो तमाम शिकायतकर्ता खुलकर सामने आने लगे। इस बीच सीबीआई को एपीएस भर्ती परीक्षा-2010 को लेकर कुछ शिकायतें मिलीं। सीबीआई की एक टीम ने जब अपने स्तर पर इसकी प्रारंभिक जांच की तो शुरुआत में ही भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी से जुड़े कई महत्वपूर्ण सुराग जांच एजेंसी को मिल गए लेकिन सीबीआई को यह कहकर जांच से रोकने की कोशिश की गई कि इस परीक्षा का परिणाम मार्च-2017 के बाद जारी किया गया, इसलिए यह परीक्षा सीबीआई जांच के दायरे में नहीं आती है।
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मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने जांच के लिए प्रदेश सरकार से अनुमति मांगी, क्योंकि प्रारंभिक जांच में इस बात के सुराग मिल चुके थे कि इस परीक्षा के जरिये आयोग और शासन स्तर के कई अफसरों ने अपने नाते-रिश्तेदारों का चयन करा लिया। सूत्रों के मुताबिक इस परीक्षा का अंतिम परिणाम भले ही बाद में जारी किया लेकिन अन्य चरणों के परिणाम उस वक्त जारी किए गए, जिस कार्यकाल की सीबीआई जांच कर रही है और अंतिम परिणाम भी मार्च-2017 से पहले तैयार कर लिया गया था लेकिन तकनीकी कारणों से बात में जारी किया गया। जांच के लिए हरी झंडी मिलने के बाद सीबीआई अब उन अफसरों पर शिकंजा कसने की तैयारी में हैं, जिन्होंने अपने नाते-रिश्तेदारों का चयन कराया। इसमें से कुछ अफसर सचिवालय में तैनात हैं। इसके अलावा उन अफसरों पर भी सीबीआई अपना शिकंजा कस सकती है जिन्होंने जांच का विरोध किया।
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