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रकम बरामदगी में अटका डेढ़ करोड़ की चोरी का खुलासा
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1.5 Crore theft case from cash van at Junction
आरोपी चिह्नित हुए पर नहीं मिल सका मुख्य आरोपी
चोरी गई रकम का कुछ हिस्सा भी नहीं हो सका है बरामद
प्रयागराज। जंक्शन पर कैशवैन से डेढ़ करोड़ की चोरी के मामले का खुलासा रकम बरामदगी के फेर में अटका हुआ है। पुलिस सभी आरोपियों को चिह्नित कर चुकी है। जिसके बाद गिरोह के दो सदस्यों को पकड़ा भी गया लेकिन, उनसे रकम का कुछ हिस्सा भी नहीं बरामद हो सका। यही वजह है कि पुलिस मामले का खुलासा करने से बच रही है।
डेढ़ करोड़ की चोरी में पुलिस ने त्रिचुरापल्ली से आदी व सिल्वा नाम की महिला को हिरासत में लिया है। जिनसे अज्ञात स्थान पर रखकर पूछताछ की जा रही है। इनसे गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में तो पता चला लेकिन, चोरी की रकम के बारे में दोनों कुछ नहीं बता सके। उन्होंने सिर्फ इतना ही बताया कि रकम लेकर सरगना विनोथ फरार है।
विनोथ की तलाश में पुलिस ने न सिर्फ उसके घर बल्कि उसके रिश्तेदारों के घर भी दबिश दी। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि उसके सास-सुसुर को भी हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर पूछताछ की जा रही है। उसकी तलाश में पश्चिम बंगाल के हुगली तक सुरागरशी की जा चुकी है लेकिन, अब तक उसका कोई सुराग पुलिस को नहीं मिल सका है। बड़ी बात यह है कि विनोथ के पकड़े जाने के बाद ही चोरी की रकम के बारे में पता चल सकेगा। सूत्रों का कहना है कि रकम बरामदगी के चक्कर में ही मामले का खुलासा अटका हुआ है।
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9.50 लाख ही बरामद हुए थे वाराणसी में
जिला पुलिस के लिए कैशवैन लूट में रकम की बरामदगी की चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि पूर्व में इस गिरोह की ओर से जितनी भी वारदातें की गईं, उसमें पुलिस के लिए रकम बरामदगी टेढ़ी खीर ही रही। मुगलसराय व वाराणसी में महज चार दिनों के भीतर कैशवैन से कुल 64 लाख रुपये चोरी किए गए। हालांकि इसमें से महज 9.50 लाख रुपये ही वाराणसी पुलिस बरामद कर सकी थी। यह हाल तब था जब लंका में हुई 26 लाख की लूट के चंद घंटों बाद ही मुगलसराय स्टेशन से गिरोह के तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया गया था। तीनों आरोपियों से ही पुलिस ने यह रकम बरामद की थी। उधर सूत्रों का कहना है कि इसी गिरोह ने जनवरी 2015 में लखनऊ में कैशवैन से 1.35 करोड़ रुपये चोरी किए थे। जिनमें से लखनऊ पुलिस महज 11 लाख रुपये बरामद कर सकी थी।
दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान भी गए थे
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जंक्शन पर डेढ़ करोड़ रुपये चोरी कर त्रिचुरापल्ली पहुंचने के बाद छिपने के लिए बदमाश अलग-अलग शहरों में भी गए। कुछ बदमाशों ने दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान में भी शरण ली। जिनमें सरगना विनोथ भी था। जिसकी भनक लगने पर क्राइम ब्रांच की एक टीम राजस्थान भी भेजी गई थी। हालांकि वहां पहुंचने के बाद गिरोह के सदस्य अलग-अलग हो गए और फिर अपने करीबियों से संपर्क भी खत्म कर दिया। जिसके बाद कई दिनों तक खाक छानने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम वापस आ गई।
नाबालिग मददगार भी पकड़ा गया
डेढ़ करोड़ की लूट में पुलिस ने शातिर चोर गिरोह के एक नाबालिग मददगार को भी हिरासत में लिया है। सूत्रों का कहना है कि यह नाबालिग मददगार घटना के वक्त जंक्शन पर मौजूद नहीं था। लेकिन वह गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ वाराणसी तक आया था। साथ ही रुपयों भरा बक्सा लूटने के बाद वाराणसी से ट्रेन पकड़ने में उनकी मदद की थी। यह आरोपी भी त्रिचुरापल्ली के उस रामजीनगर गांव का रहने वाला है जहां के गिरोह के अन्य सदस्य भी मूल निवासी हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि इस गांव में कैशवैन से चेारी करने वाले अन्य गिरोह भी सक्रिय हैं। जो घूम-घूमकर शहरों में इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हैं।
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चोरी गई रकम का कुछ हिस्सा भी नहीं हो सका है बरामद
प्रयागराज। जंक्शन पर कैशवैन से डेढ़ करोड़ की चोरी के मामले का खुलासा रकम बरामदगी के फेर में अटका हुआ है। पुलिस सभी आरोपियों को चिह्नित कर चुकी है। जिसके बाद गिरोह के दो सदस्यों को पकड़ा भी गया लेकिन, उनसे रकम का कुछ हिस्सा भी नहीं बरामद हो सका। यही वजह है कि पुलिस मामले का खुलासा करने से बच रही है।
डेढ़ करोड़ की चोरी में पुलिस ने त्रिचुरापल्ली से आदी व सिल्वा नाम की महिला को हिरासत में लिया है। जिनसे अज्ञात स्थान पर रखकर पूछताछ की जा रही है। इनसे गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में तो पता चला लेकिन, चोरी की रकम के बारे में दोनों कुछ नहीं बता सके। उन्होंने सिर्फ इतना ही बताया कि रकम लेकर सरगना विनोथ फरार है।
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विनोथ की तलाश में पुलिस ने न सिर्फ उसके घर बल्कि उसके रिश्तेदारों के घर भी दबिश दी। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि उसके सास-सुसुर को भी हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर पूछताछ की जा रही है। उसकी तलाश में पश्चिम बंगाल के हुगली तक सुरागरशी की जा चुकी है लेकिन, अब तक उसका कोई सुराग पुलिस को नहीं मिल सका है। बड़ी बात यह है कि विनोथ के पकड़े जाने के बाद ही चोरी की रकम के बारे में पता चल सकेगा। सूत्रों का कहना है कि रकम बरामदगी के चक्कर में ही मामले का खुलासा अटका हुआ है।
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9.50 लाख ही बरामद हुए थे वाराणसी में
जिला पुलिस के लिए कैशवैन लूट में रकम की बरामदगी की चुनौती इसलिए भी बड़ी है क्योंकि पूर्व में इस गिरोह की ओर से जितनी भी वारदातें की गईं, उसमें पुलिस के लिए रकम बरामदगी टेढ़ी खीर ही रही। मुगलसराय व वाराणसी में महज चार दिनों के भीतर कैशवैन से कुल 64 लाख रुपये चोरी किए गए। हालांकि इसमें से महज 9.50 लाख रुपये ही वाराणसी पुलिस बरामद कर सकी थी। यह हाल तब था जब लंका में हुई 26 लाख की लूट के चंद घंटों बाद ही मुगलसराय स्टेशन से गिरोह के तीन बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया गया था। तीनों आरोपियों से ही पुलिस ने यह रकम बरामद की थी। उधर सूत्रों का कहना है कि इसी गिरोह ने जनवरी 2015 में लखनऊ में कैशवैन से 1.35 करोड़ रुपये चोरी किए थे। जिनमें से लखनऊ पुलिस महज 11 लाख रुपये बरामद कर सकी थी।
दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान भी गए थे
पुलिस सूत्रों का कहना है कि जंक्शन पर डेढ़ करोड़ रुपये चोरी कर त्रिचुरापल्ली पहुंचने के बाद छिपने के लिए बदमाश अलग-अलग शहरों में भी गए। कुछ बदमाशों ने दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान में भी शरण ली। जिनमें सरगना विनोथ भी था। जिसकी भनक लगने पर क्राइम ब्रांच की एक टीम राजस्थान भी भेजी गई थी। हालांकि वहां पहुंचने के बाद गिरोह के सदस्य अलग-अलग हो गए और फिर अपने करीबियों से संपर्क भी खत्म कर दिया। जिसके बाद कई दिनों तक खाक छानने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम वापस आ गई।
नाबालिग मददगार भी पकड़ा गया
डेढ़ करोड़ की लूट में पुलिस ने शातिर चोर गिरोह के एक नाबालिग मददगार को भी हिरासत में लिया है। सूत्रों का कहना है कि यह नाबालिग मददगार घटना के वक्त जंक्शन पर मौजूद नहीं था। लेकिन वह गिरोह के अन्य सदस्यों के साथ वाराणसी तक आया था। साथ ही रुपयों भरा बक्सा लूटने के बाद वाराणसी से ट्रेन पकड़ने में उनकी मदद की थी। यह आरोपी भी त्रिचुरापल्ली के उस रामजीनगर गांव का रहने वाला है जहां के गिरोह के अन्य सदस्य भी मूल निवासी हैं। सूत्रों का यह भी कहना है कि इस गांव में कैशवैन से चेारी करने वाले अन्य गिरोह भी सक्रिय हैं। जो घूम-घूमकर शहरों में इस तरह की वारदातों को अंजाम देते हैं।