{"_id":"6a3c0e1a9c6979788000bd6e","slug":"workshop-on-buddhist-perspectives-in-sustainable-development-and-environmental-conservation-2026-06-24","type":"story","status":"publish","title_hn":"Aligarh News: सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध दृष्टिकोण पर शुरू हुई कार्यशाला, 29 जून तक चलेगी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Aligarh News: सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध दृष्टिकोण पर शुरू हुई कार्यशाला, 29 जून तक चलेगी
Wed, 24 Jun 2026 10:34 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Wed, 24 Jun 2026 10:34 PM IST
सार
अंजू अग्रवाल ने आर्ट ऑफ लिविंग से संबंधित ध्यान पर आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने ध्यान की आवश्यकता और अंतर ज्ञान से वस्तुओं की पहचान का उदाहरण भी दिया।
विज्ञापन
सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध दृष्टिकोण पर कार्यशाला
- फोटो : स्वयं
विस्तार
अंतरराष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान, संस्कृति विभाग, उत्तर प्रदेश और धर्म समाज महाविद्यालय अलीगढ़ ने संयुक्त रूप से एक साप्ताहिक कार्यशाला का आयोजन किया है। यह कार्यशाला सतत विकास और पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध दृष्टिकोण विषय पर केंद्रित है। इसका आयोजन 23 जून 2026 से 29 जून 2026 तक किया जा रहा है।
विज्ञापन
प्राचार्य मुकेश कुमार भारद्वाज ने कहा कि गौतम बुद्ध का दर्शन आज भी अत्यंत प्रासंगिक है। उन्होंने बताया कि बुद्ध के जीवन काल में भी यह उतना ही महत्वपूर्ण था। आज पर्यावरण संरक्षण के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। यदि पहले से ही बुद्ध के दर्शन का अनुपालन होता तो पर्यावरण अधिक श्रेष्ठ रहता। सुनीता गुप्ता ने गौतम बुद्ध के जीवन की पलास जातक कथा का उल्लेख किया। यह कथा सीधे पेड़ों के संरक्षण और पर्यावरण पर चिंता व्यक्त करती है। बुद्ध स्वयं से अधिक दूसरों और पर्यावरण के लिए चिंतित थे। यह कथा सिखाती है कि पेड़ के कटने से केवल लकड़ी का नुकसान नहीं होता। वरन् उस पर आश्रित अन्य जीव जंतुओं को भी हानि पहुंचती है। सचिन वर्मा ने प्रस्तुति के माध्यम से जल संरक्षण और पर्यावरण पर विचार प्रस्तुत किए।
विज्ञापन
कार्यशाला का उद्घाटन और प्रमुख वक्ताओं के विचार
कार्यक्रम का शुभारंभ मां सरस्वती को माल्यार्पण और दीप प्रज्वलन से हुआ। प्राचार्य मुकेश कुमार भारद्वाज ने बुद्ध के दर्शन की वर्तमान प्रासंगिकता पर जोर दिया। उन्होंने पर्यावरण संरक्षण में बौद्ध सिद्धांतों के महत्व को रेखांकित किया। सुनीता गुप्ता ने पलास जातक कथा के माध्यम से पर्यावरण के प्रति बुद्ध की चिंता समझाई। उन्होंने बताया कि बुद्ध दूसरों और पर्यावरण के लिए अधिक चिंतित थे।
विज्ञापन
अन्य प्रस्तुतियाँ और सहयोग
अंजू अग्रवाल ने आर्ट ऑफ लिविंग से संबंधित ध्यान पर आधारित व्याख्यान प्रस्तुत किया। उन्होंने ध्यान की आवश्यकता और अंतर ज्ञान से वस्तुओं की पहचान का उदाहरण भी दिया। मंजू सिंह, रुचिन वर्मा और योगेश कुमार ने कार्यशाला में विशेष सहयोग दिया। पूनम और धीरज कुणाल जैन की भी कार्यक्रम में विशेष उपस्थिति रही।