शूटर मुनीर-आशुतोष गैंग: कुख्यातों के मुकदमे में एक भी गवाह की नहीं कराई पेशी...आरोपी बरी
अलीगढ़ सीजेएम न्यायालय से गांधीपार्क पुलिस द्वारा दर्ज कराए गए पुलिस से मारपीट के एक मुकदमे में भी गवाहों के न आने के कारण मुकदमा छूटा है।
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पश्चिमी यूपी के कुख्यात शूटर मुनीर-आशुतोष गैंग के खिलाफ दर्ज मुकदमे में पुलिस एक भी गवाह को पेश नहीं कर पाई। इसी का परिणाम रहा कि मुनीर गैंग के खास शूटर शादाब को सीजेएम न्यायालय से रंगदारी-मारपीट के मुकदमे में बरी कर दिया गया। ये हालात तब हैं, जब अदालत ने कई बार समन और वारंट जारी किए।
यह मुकदमा थाना सिविल लाइंस में 10 जनवरी 2014 को निजामुद्दीन खां ने दर्ज कराया था। मुकदमे के अनुसार वह देर शाम सेंटर प्वाइंट से चश्मा लेकर आ रहे थे, रास्ते में नगर निगम के सामने चाय पीने के लिए रुक गए। वहां पहले से मौजूद एएमयू से निष्कासित तीन छात्रों आशुतोष मिश्रा फैजाबाद, शेख शादाब आजमगढ़, कासिफ लॉरी आजमगढ़ के अलावा अतीउल्लाह चंपारण बिहार व मुनीर बिजनौर मिले। इन्होंने उनके साथ तमंचे की बटों से मारपीट की। मुकदमे के अनुसार वे पहले से उससे रंगदारी मांगते आ रहे थे।
पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की। न्यायालय में सत्र परीक्षण की प्रक्रिया में मई 2018 से गवाहों के लिए समन जारी होना शुरू हुए, गवाहों के नहीं आने पर वारंट जारी किए गए। बाद में एसएसपी को पत्र भी लिखा गया। किसी गवाह को पुलिस ने पेश नहीं किया। न ही पुलिस के ही गवाह आए। शादाब की पत्रावली पर सुनवाई करते हुए उसे साक्ष्यों व गवाही के अभाव में बरी कर दिया। बाकी नामजदों में से मुनीर की जेल में बीमारी के चलते मृत्यु हो चुकी है, जबकि अन्य आरोपियों की पत्रावली अलग चल रही है। आशुतोष मिश्रा अभी दिल्ली तिहाड़ जेल में निरुद्ध है।
पुराने मुकदमों के निस्तारण के लिए गवाहों की तलबी के हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। गवाहों के न आने पर न्यायालय स्तर से मुकदमे निस्तारित किए जा रहे हैं। इनके विषय में वरिष्ठ अधिकारियों को भी अवगत कराया जा रहा है। - सत्यानंद सिंह, वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी
कुख्यातों का द किलिंग मशीन ए गैंग
मुनीर मेहताब और आशुतोष मिश्रा पश्चिमी यूपी के जरायम गैंग द किलिंग मशीन ए गैंग के रूप में पहचाने गए। सोशल मीडिया पर इन्होंने अपने गैंग का यह नाम रखा हुआ था।
एएमयू में छात्र गुटों की रंगबाजी से आपराधिक पृष्ठभूमि में आए गैंग ने शहर में कारोबारी फहद की हत्या के बाद सुर्खियां बटोरीं। इस हत्या के बाद आशुतोष तो जेल चला गया। मुनीर ने रेलवे मजिस्ट्रेट के गनर, एएमयू छात्र आलमगीर, बरला में अपने दोस्त की हत्या के अलावा एनआईए डीएसपी तंजील अहमद और उनकी पत्नी हत्या की। गिरफ्तारी के बाद अनगिनत अपराध स्वीकारे। आशुतोष-मुनीर के इस गैंग को बिजनौर में पंजीकृत किया गया। जिसमें कुल 15 सदस्य हैं। इसी गैंग का एक साथी सऊद आज तक लापता है। जिस शादाब को बरी किया गया है, वह यहां मुनीर के साथ आलमगीर हत्याकांड में पचास हजार का इनामी रहा था। ब्यूरो
पुलिस से मारपीट में भी नहीं आया गवाह, मुकदमा छूटा
अलीगढ़ सीजेएम न्यायालय से गांधीपार्क पुलिस द्वारा दर्ज कराए गए पुलिस से मारपीट के एक मुकदमे में भी गवाहों के न आने के कारण मुकदमा छूटा है। यह मुकदमा 22 जून 2018 को थाने के प्रशिक्षु दरोगा केशव कुमार वशिष्ठ ने दर्ज कराया था।
इसमें उल्लेख था कि वे रात में दुबे पड़ाव पर दुकान के सामने आग लगने की सूचना पर सिपाही नकुल संग गए थे। वहां इलाके का सौरभ नाम का युवक आया। उसने बेवजह की बातें करते हुए पुलिस के कार्य में बाधा उत्पन्न की व सिपाही से मारपीट कर दी। इस मुकदमे में आरोपी पर पुलिस ने चार्जशीट दायर की। न्यायालय में ट्रायल के लिए कई बार समन, वारंट व एसएसपी को पत्राचार के बाद भी कोई गवाह नहीं पहुंचा। इसके चलते अदालत ने अभियोजन का समय समाप्त करते हुए साक्ष्यों व गवाही के अभाव में आरोपी को बरी कर दिया।