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प्रदेश में 110 डॉक्टरों से क्या होगा.. जिले में 172 की जरूरत
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जिला व प्रदेश स्तर पर स्वास्थ्य महकमा इन दिनों डाक्टरों की कमी के संकट से जूझ रहा है। हालांकि शासन स्तर पर 110 डॉक्टरों के मिलने की उम्मीद है। ये वे डॉक्टर हैं जो सेवानिवृत्त हो चुके हैं और इन्हें पुनर्योजन योजना के तहत पुन: सेवा में लेकर प्रदेश भर में सीएचसी पर भेजा जाएग। मगर ये संख्या नाकाफी हैं, क्योंकि अकेले अपने जिले में मानक के अनुसार 172 डॉक्टरों की पहरे से ही कमी चल रही है। ।
जुलाई में चली तबादला एक्सप्रेस के कारण जिले में डॉक्टरों की कमी हो गई है। पहले 172 डॉक्टरों की कमी थी। इसमें से 32 के और तबादले और हो गए। हालांकि जिला अस्पताल व दीनदयाल अस्पताल के अधिकांश डॉक्टर अभी कार्यमुक्त नहीं किए गए। फिर भी कुछ डॉक्टरों के जाने से संकट गहराया हुआ है।
इसी कड़ी में प्रदेश स्तर पर सेवानिवृत्त हो चुके 110 डॉक्टरों को पुनर्योजन के तहत पुन: सेवा में लेकर सीएचसी पर भेजा जाना तय हुआ है। अब इसमें से जिले को कितने मिलेंगे, यह तो आने वाला समय बताएगा। मगर सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी कहते हैं कि प्रदेश भर में चल रहे इस संकट पर शासन और निदेशालय स्तर पर मंथन चल रहा है। शुक्रवार शाम तक कुछ डॉक्टरों के जिले को मिलने की उम्मीद है।
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मेडिकोलीगल ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर न छोड़ें अस्पताल: सीएमओ
पिछले सप्ताह महिला अस्पताल में दुष्कर्म मामलों की मेडिकल जांच को एक साथ कई पीड़ितों के आने पर हुए विवाद का सीएमओ ने संज्ञान लिया है। इसे लेकर सीएमओ डॉ.नीरज त्यागी के स्तर से एक आदेश जारी किया गया है कि मेडिकोलीगल के लिए ड्यूटी पर निर्धारित डॉक्टर अस्पताल नहीं छोड़ेंगे। उनके रुकने ठहरने का प्रबंध जब अस्पताल परिसर में होता है तो वे क्यों वहां से चले जाते हैं।
ऐसी स्थिति में बात अधिकारियों तक पहुंचती है। इसे लेकर उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा है कि डॉक्टर कतई अस्पताल नहीं छोड़ेंगे। इसके अलावा उन्होंने एक पत्र एसएसपी को भी लिखा है, जिसमें दुष्कर्म मामलों में ससमय पर मेडिकोलीगल के लिए पीड़ित के पहुंचने या डॉक्टर के न मिलने पर समय से सूचना न मिलने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि थाना रवानगी के 24 घंटे के अंदर अगर मेडिकोलीगल न हो पाए तो उन्हें अवगत कराया जाए। ताकि डॉक्टर की व्यवस्था कराई जाए।
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जुलाई में चली तबादला एक्सप्रेस के कारण जिले में डॉक्टरों की कमी हो गई है। पहले 172 डॉक्टरों की कमी थी। इसमें से 32 के और तबादले और हो गए। हालांकि जिला अस्पताल व दीनदयाल अस्पताल के अधिकांश डॉक्टर अभी कार्यमुक्त नहीं किए गए। फिर भी कुछ डॉक्टरों के जाने से संकट गहराया हुआ है।
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इसी कड़ी में प्रदेश स्तर पर सेवानिवृत्त हो चुके 110 डॉक्टरों को पुनर्योजन के तहत पुन: सेवा में लेकर सीएचसी पर भेजा जाना तय हुआ है। अब इसमें से जिले को कितने मिलेंगे, यह तो आने वाला समय बताएगा। मगर सीएमओ डॉ. नीरज त्यागी कहते हैं कि प्रदेश भर में चल रहे इस संकट पर शासन और निदेशालय स्तर पर मंथन चल रहा है। शुक्रवार शाम तक कुछ डॉक्टरों के जिले को मिलने की उम्मीद है।
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मेडिकोलीगल ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर न छोड़ें अस्पताल: सीएमओ
पिछले सप्ताह महिला अस्पताल में दुष्कर्म मामलों की मेडिकल जांच को एक साथ कई पीड़ितों के आने पर हुए विवाद का सीएमओ ने संज्ञान लिया है। इसे लेकर सीएमओ डॉ.नीरज त्यागी के स्तर से एक आदेश जारी किया गया है कि मेडिकोलीगल के लिए ड्यूटी पर निर्धारित डॉक्टर अस्पताल नहीं छोड़ेंगे। उनके रुकने ठहरने का प्रबंध जब अस्पताल परिसर में होता है तो वे क्यों वहां से चले जाते हैं।
ऐसी स्थिति में बात अधिकारियों तक पहुंचती है। इसे लेकर उन्होंने अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी देते हुए कहा है कि डॉक्टर कतई अस्पताल नहीं छोड़ेंगे। इसके अलावा उन्होंने एक पत्र एसएसपी को भी लिखा है, जिसमें दुष्कर्म मामलों में ससमय पर मेडिकोलीगल के लिए पीड़ित के पहुंचने या डॉक्टर के न मिलने पर समय से सूचना न मिलने की बात कही है। उन्होंने कहा है कि थाना रवानगी के 24 घंटे के अंदर अगर मेडिकोलीगल न हो पाए तो उन्हें अवगत कराया जाए। ताकि डॉक्टर की व्यवस्था कराई जाए।