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Research: एएमयू में हुआ शोध, 10 में से हर आठवां वेल्डर दर्द से परेशान, ये तथ्य आए सामने
Mon, 13 Apr 2026 04:34 PM IST
Chaman Kumar Sharma
इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़
इकराम वारिस, अमर उजाला, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Mon, 13 Apr 2026 04:34 PM IST
सार
फुट-ऑपरेटेड स्पॉट वेल्डिंग और ओवरहेड आर्क वेल्डिंग जैसे कार्य शरीर पर अत्यधिक दबाव डालते हैं। इससे न केवल वेल्डरों की कार्यक्षमता घटती है, बल्कि चोट और बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।
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कंधे का दर्द
- फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
गलत पॉश्चर यानी कार्य के दौरान बैठने, खड़े होने और कष्टदायक शारीरिक मुद्रा वेल्डिंग कारीगरों को बीमार बना रही है। 10 से हर आठवां कारीगर दर्द से परेशान है। यह खुलासा एमएयू के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के यूपी में छोटे उद्योगों में कार्यरत 87 वेल्डरों पर किए गए अध्ययन में हुआ है। इनमें 81 फीसदी को कमर दर्द की शिकायत मिली है।
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अध्ययन में पाया गया कि 83 फीसदी को पैरों में दर्द और 60 फीसदी को कोहनी में दर्द की शिकायत है। गर्दन और कंधे में दर्द की भी शिकायतें आईं। 59 फीसदी वेल्डरों ने शरीर के कई हिस्सों में एक साथ दर्द होने की बात कही, जो इस समस्या की गंभीरता को दर्शाता है।
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एएमयू के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के डॉ. इम्तियाज अली खान के निर्देशन में शोधार्थी मोहम्मद दिलशाद आलम ने पाया कि फुट-ऑपरेटेड स्पॉट वेल्डिंग और ओवरहेड आर्क वेल्डिंग जैसे कार्य शरीर पर अत्यधिक दबाव डालते हैं। इससे न केवल वेल्डरों की कार्यक्षमता घटती है, बल्कि चोट और बीमारी का खतरा भी बढ़ जाता है।
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इस तरह किया जा सकता है समाधान
इस गंभीर समस्या के समाधान के लिए शोधकर्ता ने आधुनिक वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लिया है। मल्टी क्राइटेरिया डिसीजन मेकिंग और अन्य विश्लेषणों के जरिये यह पता लगाया गया कि किस तरह कार्य क्षेत्र और पॉश्चर को बेहतर बनाकर इस खतरे को कम किया जा सकता है। डॉ. इम्तियाज अली खान के मुताबिक, वेल्डिंग कार्य में वैज्ञानिक तरीके से पॉश्चर और उपकरणों को डिजाइन किया जाए, तो श्रमिकों की सेहत, सुरक्षा और कार्यक्षमता में बड़ा सुधार संभव है।
ये तथ्य भी अध्ययन में आए सामने
- खड़े होकर वेल्डिंग करते समय 35 सेमी पैडल ऊंचाई और 80 सेमी दूरी उपयुक्त पाई गई।
- बैठकर वेल्डिंग करने के लिए 45 सेमी की कुर्सी की ऊंचाई बेहतर रही है।
- ओवरहेड वेल्डिंग में 115–125 डिग्री कंधे का कोण और न्यूट्रल कलाई की स्थिति से दर्द में कमी आई।
- सही मानव-केंद्रित डिजाइन से वेल्डर का दर्द कम होता है, काम की गुणवत्ता और उत्पादकता भी बढ़ती है।
- छोटे उद्योगों में अभी भी एर्गोनॉमिक सुधारों की कमी है, जिससे वेल्डर लंबे समय तक स्वास्थ्य समस्याओं से जूझते रहते हैं।