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अमर उजाला संवाद: अलीगढ़ के उद्यमियों ने साझा कीं अपनी चिंताएं, 20 फीसदी निर्यात प्रभावित, बदल रही व्यवस्था
Wed, 08 Apr 2026 10:12 PM IST
Chaman Kumar Sharma
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़
Published by: Chaman Kumar Sharma
Updated Wed, 08 Apr 2026 10:12 PM IST
सार
अलीगढ़ उद्यमियों ने कहा कि जो माल पहले 21 से 22 दिनों में गंतव्य तक पहुंच जाता था, अब उसे पहुंचने में 45 दिन लग रहे हैं। इस देरी के कारण विदेशी खरीदारों से मिलने वाला भुगतान अटक गया है।
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संवाद कार्यक्रम में मौजूद इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के पदाधिकारी
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
पश्चिम एशिया में गहराते तनाव और युद्ध ने पूरे विश्व की अर्थव्यवस्था के साथ-साथ अलीगढ़ के निर्यात की भी कमर तोड़ दी है। तालानगरी स्थित अमर उजाला कार्यालय में इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के पदाधिकारियों के साथ हुए संवाद में उद्यमियों ने इस गंभीर समस्या पर अपनी चिंताएं साझा कीं। निर्यातकों का स्पष्ट कहना है 20 फीसदी निर्यात प्रभावित हुआ है। यदि हालात जल्द नहीं सुधरे, तो अलीगढ़ के विदेशी व्यापार को और बड़ा झटका लग सकता है।
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एसोसिएशन के सीनियर सीडब्ल्यूसी सदस्य और प्रमुख निर्यातक अजय पटेल ने बताया कि अलीगढ़ से होने वाले कुल निर्यात का लगभग 20 फीसदी हिस्सा मध्य पूर्व के देशों को जाता है। उन्होंने कहा कि संयुक्त अरब अमीरात जैसे देशों में भी अब निवेश और पर्यटन पर गहरा असर पड़ रहा है। इससे पूरी वैश्विक व्यवस्था बदल रही है।
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उपाध्यक्ष उमंग मोंगा ने कहा कि सप्लाई चेन एक बार प्रभावित होती है, तो उद्योगों को उससे उबरने में महीनों लग जाते हैं। वर्तमान स्थितियां अब नियंत्रण से बाहर होती जा रही हैं।सीडब्ल्यूसी सदस्य मोहित कुमार ने माल की आवाजाही में हो रही देरी पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि जो माल पहले 21 से 22 दिनों में गंतव्य तक पहुंच जाता था, अब उसे पहुंचने में 45 दिन लग रहे हैं। इस देरी के कारण विदेशी खरीदारों से मिलने वाला भुगतान अटक गया है।
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सीडब्ल्यूसी सदस्य विकास जैन ने कहा कि युद्ध के चलते प्राकृतिक गैस की आपूर्ति बाधित हुई है। इसके कारण आने वाले दिनों में ईंधन और कच्चे माल के दाम बढ़ना तय है। उन्होंने कहा कि यदि युद्ध समाप्त भी हो जाए, तो भी इसका दीर्घकालिक नकारात्मक प्रभाव उद्योगों पर बना रहेगा। मंडलाध्यक्ष मनीष बंसल ने कहा कि बदलते वैश्विक माहौल को देखते हुए अब उद्योगों को अपनी रणनीति बदलनी होगी। उन्होंने जोर दिया कि चुनौतियों का सामना करने के लिए हमें आत्मनिर्भर साधनों को मजबूत करना होगा, ताकि बाहरी संकटों का असर हमारे घरेलू उत्पादन पर कम से कम पड़े।