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2002 का विधानसभा चुनाव : कल्याण की नाराजगी से बिगड़ा खेल... सभी सीटों पर हारा भगवा दल
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संघ से सियासत की शुरुआत करने वाले प्रदेश के दिग्गज नेता स्व. कल्याण सिंह की मेहनत के दम पर भाजपा प्रदेश की सत्ता तक पहुंची। उनकी मेहनत का ही प्रयास था कि भाजपा जिले की सभी सीटों पर जीतने लगी। मगर इस चुनाव में कल्याण सिंह के भाजपा से अलग होने के बाद सबसे ज्यादा नुकसान भाजपा को ही हुआ। हालांकि वे अपनी सीट जिताने में कामयाब रहे। मगर उनके प्रभाव वाली छर्रा सहित जिले की सभी सीटें भाजपा हार गई। इस चुनाव में बसपा, सपा व कांग्रेस को जिले में बढ़त मिली। इस चुनाव में एक और खास बात रही कि हाथरस अलग होने के बाद जिले में सात सीटें रह गईं, जिन पर चुनाव हुआ। कुल मिलाकर अलीगढ़ सहित आसपास के कई जिलों में भाजपा को नुकसान पहुंचाकर कल्याण सिंह ने भाजपा को अपनी ताकत का अहसास कराया।
ध्रुवीकरण का तिलिस्म तोड़कर शहर पर कांग्रेस की वापसी
अर्से बाद यह ऐसा चुनाव रहा, जब ध्रुवीकरण का तिलिस्म तोड़कर कांग्रेस ने शहर सीट पर वापसी की और विवेक बंसल यहां से विधायक निर्वाचित हुए। कहा जाता कि अर्से बाद यह पहला मौका था, जब इस सीट पर धार्मिक ध्रुवीकरण के आधार पर होने वाले चुनाव से इतर चेहरे और पार्टी के दम पर चुनाव हुआ। इसी का परिणाम रहा कि लगातार तीन बार से जीत रही भाजपा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इसी तरह कल्याण सिंह के प्रभाव वाली गंगीरी सीट से भी भाजपा हारी और अतरौली पर भी कल्याण सिंह के सामने भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। हां, प्रदेश में लगातार अपना वजूद बढ़ा रही बसपा के बैनरतले बरौली से नए चेहरे जयवीर सिंह, खैर से प्रमोद गौड़ व कोल से महेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की। वहीं इगलास से कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह ने वापसी की।
ये था प्रदेश में दलों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में 6 राष्ट्रीय दल भाजपा, बसपा, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस व एनसीपी मैदान में थे, जबकि यूपी की राज्य स्तरीय सपा मैदान मे थी। वहीं अन्य राज्यों की 9 पार्टी चुनाव मैदान में थीं। 75 अपंजीकृत दल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में प्रदेश की 425 सीटों में से 88 पर भाजपा, 25 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि बसपा 98 और सपा ने 142 सीटें जीतीं। शुरुआत में भाजपा व बसपा की सरकार बनी। 2003 में सपा ने सरकार बनाई, जिसमें कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह राजू भैया को मंत्री पद भी मिला।
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ये था सात सीटों का परिणाम
-2 लाख 25 हजार 946 मतों वाली गंगीरी सीट पर सपा के वीरेश यादव 39967 मत पाकर जीते और राक्रांपा के मुजाहिद हसन गुड्डू 29543 मत पाकर हारे।
-2 लाख 24 हजार 858 मतों वाली अतरौली सीट पर राक्रांपा के कल्याण सिंह 61838 मत पाकर जीते और भाजपा की डॉ.उमेश कुमारी 26690 मत पाकर हारीं।
-3 लाख 13 हजार 598 मतों वाली अलीगढ़ सीट पर कांग्रेस के विवेक बंसल 47801 मत पाकर जीते और भाजपा के दीपक मित्तल 23357 मत पाकर हारे।
-2 लाख 83 हजार 826 मतों वाली कोल सीट पर बसपा के महेंद्र सिंह 44334 मत पाकर जीते और भाजपा के राजेंद्र कुमार 36617 मत पाकर हारे।
-2 लाख 19 हजार 075 मतों वाली इगलास सीट पर कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह 49639 मत पाकर जीते और बसपा के नरेंद्र कुमार दीक्षित 39730 मत पाकर हारे।
-2 लाख 23 हजार 618 मतों वाली बरौली सीट पर बसपा के जयवीर सिंह 52231 मत पाकर जीते और रालोद के दलवीर सिंह 41737 मत पाकर हारे।
-2 लाख 24 हजार 164 मतों वाली खैर सीट पर बसपा के प्रमोद गौड़ 45490 मत पाकर जीतीं और रालोद के सत्यपाल सिंह 45128 मत पाकर हारे।
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ध्रुवीकरण का तिलिस्म तोड़कर शहर पर कांग्रेस की वापसी
अर्से बाद यह ऐसा चुनाव रहा, जब ध्रुवीकरण का तिलिस्म तोड़कर कांग्रेस ने शहर सीट पर वापसी की और विवेक बंसल यहां से विधायक निर्वाचित हुए। कहा जाता कि अर्से बाद यह पहला मौका था, जब इस सीट पर धार्मिक ध्रुवीकरण के आधार पर होने वाले चुनाव से इतर चेहरे और पार्टी के दम पर चुनाव हुआ। इसी का परिणाम रहा कि लगातार तीन बार से जीत रही भाजपा को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा। इसी तरह कल्याण सिंह के प्रभाव वाली गंगीरी सीट से भी भाजपा हारी और अतरौली पर भी कल्याण सिंह के सामने भाजपा प्रत्याशी को हार का सामना करना पड़ा। हां, प्रदेश में लगातार अपना वजूद बढ़ा रही बसपा के बैनरतले बरौली से नए चेहरे जयवीर सिंह, खैर से प्रमोद गौड़ व कोल से महेंद्र सिंह ने जीत दर्ज की। वहीं इगलास से कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह ने वापसी की।
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ये था प्रदेश में दलों का समीकरण
उत्तर प्रदेश में 6 राष्ट्रीय दल भाजपा, बसपा, सीपीआई, सीपीएम, कांग्रेस व एनसीपी मैदान में थे, जबकि यूपी की राज्य स्तरीय सपा मैदान मे थी। वहीं अन्य राज्यों की 9 पार्टी चुनाव मैदान में थीं। 75 अपंजीकृत दल चुनाव मैदान में थे। इस चुनाव में प्रदेश की 425 सीटों में से 88 पर भाजपा, 25 पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की, जबकि बसपा 98 और सपा ने 142 सीटें जीतीं। शुरुआत में भाजपा व बसपा की सरकार बनी। 2003 में सपा ने सरकार बनाई, जिसमें कल्याण सिंह के बेटे राजवीर सिंह राजू भैया को मंत्री पद भी मिला।
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ये था सात सीटों का परिणाम
-2 लाख 25 हजार 946 मतों वाली गंगीरी सीट पर सपा के वीरेश यादव 39967 मत पाकर जीते और राक्रांपा के मुजाहिद हसन गुड्डू 29543 मत पाकर हारे।
-2 लाख 24 हजार 858 मतों वाली अतरौली सीट पर राक्रांपा के कल्याण सिंह 61838 मत पाकर जीते और भाजपा की डॉ.उमेश कुमारी 26690 मत पाकर हारीं।
-3 लाख 13 हजार 598 मतों वाली अलीगढ़ सीट पर कांग्रेस के विवेक बंसल 47801 मत पाकर जीते और भाजपा के दीपक मित्तल 23357 मत पाकर हारे।
-2 लाख 83 हजार 826 मतों वाली कोल सीट पर बसपा के महेंद्र सिंह 44334 मत पाकर जीते और भाजपा के राजेंद्र कुमार 36617 मत पाकर हारे।
-2 लाख 19 हजार 075 मतों वाली इगलास सीट पर कांग्रेस के बिजेंद्र सिंह 49639 मत पाकर जीते और बसपा के नरेंद्र कुमार दीक्षित 39730 मत पाकर हारे।
-2 लाख 23 हजार 618 मतों वाली बरौली सीट पर बसपा के जयवीर सिंह 52231 मत पाकर जीते और रालोद के दलवीर सिंह 41737 मत पाकर हारे।
-2 लाख 24 हजार 164 मतों वाली खैर सीट पर बसपा के प्रमोद गौड़ 45490 मत पाकर जीतीं और रालोद के सत्यपाल सिंह 45128 मत पाकर हारे।