Veterinary: अलीगढ़ में 600 एकड़ सरकारी भूमि पर खुलेगा वेटरनरी कॉलेज, बनेंगे वृहद गो संरक्षण कें-पशु चिकित्सालय
यह पूरी कवायद छर्रा विधायक ठा. रवेन्द्र पाल सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए एक पत्र के बाद शुरू हुई है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन ने इसे आवश्यक कार्रवाई के लिए पशुपालन विभाग को अग्रसारित किया था।
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अलीगढ़ जिले में पशुपालन और गो-संरक्षण के लिए एक अत्याधुनिक पशु चिकित्सा महाविद्यालय (वेटरनरी कॉलेज), वृहद गो-संरक्षण केंद्र (काउ सेंचुरी) और एक क्षेत्रीय पशु चिकित्सालय स्थापित करने की योजना है। यह निर्माण उत्तर प्रदेश पशुधन उद्योग निगम लिमिटेड की 600 एकड़ सरकारी भूमि पर होगा।
इसके लिए उत्तर प्रदेश पशुधन उद्योग निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने अलीगढ़ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी (सीडीओ) और सामान्य प्रबंधक से तत्काल विस्तृत आख्या मांगी है। यह पूरी कवायद छर्रा विधायक ठा. रवेन्द्र पाल सिंह द्वारा मुख्यमंत्री को लिखे गए एक पत्र के बाद शुरू हुई है। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए शासन ने इसे आवश्यक कार्रवाई के लिए पशुपालन विभाग को अग्रसारित किया था।
पत्र के अनुसार, जिस भूमि पर इस परियोजना को आकार दिया जाना है, वह उत्तर प्रदेश पशुधन उद्योग निगम लिमिटेड के नाम दर्ज है। पूर्व में जनपद की तहसील कोल के अंतर्गत ग्राम महुआखेड़ा में स्थित गाटा संख्या 97 (रकबा 52.257 हेक्टेयर) भूमि को स्पोर्ट्स कॉलेज और लेखपाल प्रशिक्षण विद्यालय/छात्रावास के लिए आरक्षित करने की बात सामने आई थी।
निगम के निदेशक मंडल की 132वीं बैठक (जो 19 मार्च 2026 को अपर मुख्य सचिव, पशुधन की अध्यक्षता में हुई थी) में यह साफ किया गया था कि निगम एक व्यावसायिक संस्था है और वर्तमान में उसके पास आय का कोई अन्य स्रोत नहीं है। चूंकि यह जमीन निगम द्वारा क्रय की गई थी, इसलिए भू-अधिग्रहण अधिनियम के तहत आंकलित मूल्य मिलने के बाद ही इस भूमि को हस्तांतरित किया जाएगा।
मामले की संवेदनशीलता और महत्ता को देखते हुए प्रबंध निदेशक डॉ. राजेन्द्र प्रसाद ने अलीगढ़ के मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को निर्देशित किया है कि वे इस पूरे विषय पर अपनी स्पष्ट संस्तुति और आख्या सीधे निदेशक पशुपालन विभाग को भेजें।
पशु चिकित्सा महाविद्यालय खुलने से क्षेत्र के युवाओं को वेटरनरी साइंस की पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। - डॉ. दिवाकर त्रिपाठी, मुख्य पशुचिकित्सा अधिकारी