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टीकाकरणः अप्रैल-मई में 9124 शिशु नहीं पहन सके सुरक्षा कवच
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इस साल के अप्रैल और मई -2021- महीने में जनपद में 9124 शिशु टीकाकरण से वंचित रह गए। इन महीने में 18186 शिशुओं को टीका लगना था। कोरोना की दूसरी लहर के कारण 9062 शिशुओं को ही टीकाकरण हुआ।
वर्ष 2021-22 में जनपद में 109118 शिशुओं को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस हिसाब से प्रत्येक महीने 9093 शिशुओं को टीका लगना है। जनपद में अप्रैल महीने में 4762 और मई महीने में करीब 4300 शिशुओं को ही टीका लग पाया। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. दुर्गेश कुमार कहते हैं कि अप्रैल एवं मई महीने में कोरोना की दूसरी लहर के कारण टीका का कार्य प्रभावित हुआ। कुछ एएनएम, आशा व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी कोविड में लग गई थी। इसके अतिरिक्त कोरोना के खौफ के कारण लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर टीका लगवाने वालों की संख्या काफी गिर गई थी।
वर्ष 2020 में 88889 शिशुओं को लगा था टीका
एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 की अवधि में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक लाख 7 हजार 134 शिशुओं को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था। लक्ष्य के विरुद्ध जनपद में 88889 शिशुओं को टीका लगाया गया था। पिछले वर्ष भी कोरोना के कारण टीकाकरण कार्य प्रभावित हुआ था।
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कोरोना की वजह से टीकाकरण का कार्य प्रभावित हुआ है। सभी चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक कर टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। जिन क्षेत्रों में टीकाकरण का कार्य कमजोर है, वहां विशेष अभियान चलाकर लक्ष्य पूरा किया जाएगा।
- डॉ. दुर्गेश कुमार, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
बच्चों को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण जरूरी है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अभिभावक बच्चों को लेकर घर से बाहर निकले ही नहीं। जिन लोगों के टीके छूट गए हैं, वह अब लगवा सकते हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है।
- डॉ. विभव वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ
जन्म के बाद लगने वाले टीके
- जन्म के समय - बीसीजी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी
- जन्म से 6 सप्ताह पर -पोलियो-1, रोटा वायरस-1, आईपीवी-1, पेंटावैलेंट-1 और पीसीवी-1
- जन्म के 10 सप्ताह पर - पोलियो-2, रोटा वायरस-2 एवं पेंटावैलेंट-2
- जन्म के 14 सप्ताह पर - पोलियो-3, रोटा वायरस-3, आईपीवी-3, पेंटावैलेंट-3 एवं पीसीवी-2
- 9 से 12 महीने पर - मीजेल्स-रूबेला-1, पीसीवी बूस्टर डोज
- 16 से 24 महीने पर - पोलियो बूस्टर डोज, मीजेल्स-रूबेला-2, डीपीटी बूस्टर-1
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वर्ष 2021-22 में जनपद में 109118 शिशुओं को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस हिसाब से प्रत्येक महीने 9093 शिशुओं को टीका लगना है। जनपद में अप्रैल महीने में 4762 और मई महीने में करीब 4300 शिशुओं को ही टीका लग पाया। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डॉ. दुर्गेश कुमार कहते हैं कि अप्रैल एवं मई महीने में कोरोना की दूसरी लहर के कारण टीका का कार्य प्रभावित हुआ। कुछ एएनएम, आशा व अन्य स्वास्थ्यकर्मियों की ड्यूटी कोविड में लग गई थी। इसके अतिरिक्त कोरोना के खौफ के कारण लोग घरों से नहीं निकल रहे हैं। स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचकर टीका लगवाने वालों की संख्या काफी गिर गई थी।
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वर्ष 2020 में 88889 शिशुओं को लगा था टीका
एक अप्रैल 2020 से 31 मार्च 2021 की अवधि में स्वास्थ्य विभाग द्वारा एक लाख 7 हजार 134 शिशुओं को टीका लगाने का लक्ष्य रखा गया था। लक्ष्य के विरुद्ध जनपद में 88889 शिशुओं को टीका लगाया गया था। पिछले वर्ष भी कोरोना के कारण टीकाकरण कार्य प्रभावित हुआ था।
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कोरोना की वजह से टीकाकरण का कार्य प्रभावित हुआ है। सभी चिकित्सा अधिकारियों के साथ बैठक कर टीकाकरण के लक्ष्य को हासिल करने का प्रयास कर रहे हैं। जिन क्षेत्रों में टीकाकरण का कार्य कमजोर है, वहां विशेष अभियान चलाकर लक्ष्य पूरा किया जाएगा।
- डॉ. दुर्गेश कुमार, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
बच्चों को विभिन्न बीमारियों से बचाने के लिए टीकाकरण जरूरी है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान अभिभावक बच्चों को लेकर घर से बाहर निकले ही नहीं। जिन लोगों के टीके छूट गए हैं, वह अब लगवा सकते हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए यह जरूरी है।
- डॉ. विभव वार्ष्णेय, बाल रोग विशेषज्ञ
जन्म के बाद लगने वाले टीके
- जन्म के समय - बीसीजी, पोलियो, हेपेटाइटिस बी
- जन्म से 6 सप्ताह पर -पोलियो-1, रोटा वायरस-1, आईपीवी-1, पेंटावैलेंट-1 और पीसीवी-1
- जन्म के 10 सप्ताह पर - पोलियो-2, रोटा वायरस-2 एवं पेंटावैलेंट-2
- जन्म के 14 सप्ताह पर - पोलियो-3, रोटा वायरस-3, आईपीवी-3, पेंटावैलेंट-3 एवं पीसीवी-2
- 9 से 12 महीने पर - मीजेल्स-रूबेला-1, पीसीवी बूस्टर डोज
- 16 से 24 महीने पर - पोलियो बूस्टर डोज, मीजेल्स-रूबेला-2, डीपीटी बूस्टर-1