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अंतिम संस्कार को लेकर आमने-सामने आए दो पक्ष
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क्वारसी थाना क्षेत्र के गांव कौंछोड़ में अनुसूचित जाति के युवक का अंतिम संस्कार करने को लेकर सवर्ण और अनुसूचित जाति के लोग आमने-सामने आ गए। मौके पर पहुंची पुलिस के काफी प्रयास के बाद सवर्ण जाति के लोग अपने खेत में शव का अंतिम संस्कार कराने को राजी हुए, लेकिन इसके बाद गांव में बने शमशान में ही शवों का अंतिम संस्कार कराने की सहमति बनी।
मूल रूप से गांव कौछोड़ निवासी 25 वर्षीय राजेश ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर था। गत दिवस उसकी बीमारी के कारण मौत हो गई। राजस्थान में रहने वाले उसके परिजन शव को लेकर अपने पैतृक गांव कौंछोड़ पहुंचे। यहां उसके शव को प्रमोद नामक व्यक्ति के खेत में अंतिम संस्कार के लिए रखा। तभी खेत स्वामी मौके पर पहुंच गया और गांव के शमशान में दाह संस्कार करने को बोला।
इसको लेकर दोनों समाज के लोग आमने सामने आ गए। सूचना पर पहुंची पुलिस के समक्ष अनुसूचित जाति के लोगों का तर्क था कि उनके पूर्वजों के शवों का भी इसी स्थान पर दाह संस्कार हुआ है। जबकि खेत स्वामी का कहना था कि जब गांव में शमशान बन गया है तो वहां शव का अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जा रहा। इसको लेकर देर तक पंचायतों का दौर चलता रहा। अंत में फैसला हुआ कि आगे से गांव के सभी शवों का अंतिम संस्कार शमशान में ही किया जाएगा। इस बात पर सहमति बनने के बाद ही युवक के शव का अंतिम संस्कार हुआ।
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मूल रूप से गांव कौछोड़ निवासी 25 वर्षीय राजेश ग्रेटर नोएडा में इंजीनियर था। गत दिवस उसकी बीमारी के कारण मौत हो गई। राजस्थान में रहने वाले उसके परिजन शव को लेकर अपने पैतृक गांव कौंछोड़ पहुंचे। यहां उसके शव को प्रमोद नामक व्यक्ति के खेत में अंतिम संस्कार के लिए रखा। तभी खेत स्वामी मौके पर पहुंच गया और गांव के शमशान में दाह संस्कार करने को बोला।
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इसको लेकर दोनों समाज के लोग आमने सामने आ गए। सूचना पर पहुंची पुलिस के समक्ष अनुसूचित जाति के लोगों का तर्क था कि उनके पूर्वजों के शवों का भी इसी स्थान पर दाह संस्कार हुआ है। जबकि खेत स्वामी का कहना था कि जब गांव में शमशान बन गया है तो वहां शव का अंतिम संस्कार क्यों नहीं किया जा रहा। इसको लेकर देर तक पंचायतों का दौर चलता रहा। अंत में फैसला हुआ कि आगे से गांव के सभी शवों का अंतिम संस्कार शमशान में ही किया जाएगा। इस बात पर सहमति बनने के बाद ही युवक के शव का अंतिम संस्कार हुआ।
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